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  • youthsome 2w

    A day

    जिंदगी का बस्ता, सुबह सुबह उठाये, ना जाने किधर जाता हूँ
    बस में, ट्रेन में, ऑटो में, कितने ही धक्के खाता हूँ
    ऑफिस में जा कर सब से मुस्करा कर हाथ मिलाता हूँ
    Power point को डेटा के फूलों से बहुत सजाता हूँ.
    हाथो से उम्मीदों के पुल बनाता हूँ
    अरमानों को सिगरेट के कश में उड़ाता हूँ
    मुरझाए हुए सपनों को Bar का पानी पिलाता हूँ
    अपने काम पर खुद को शाबाशी देके मुस्कराता हूँ
    Competition के काम का थोड़ा मजाक उड़ाता हूँ.
    शाम को तो नहीं, पर देर रात तक तो वापस घर आ जाता हूँ
    सुबह से शाम तक, बस काम की चार-दीवारी में खुद को पाता हूँ
    आज पास इतने लोग होते है फिर भी
    इस भीड़ में अपने वजूद को भूल जाता हूँ.
    सब से मिलता हूं, सब के करीब जाता हू पर अक्सर
    खुद को, खुद के करीब नहीं पाता हूँ
    और बचपन में जो सपने देखें थे, उन्हें सोचकर
    रात के अंधेरे में, खुद से ही डर जाता हूँ.
    खुद ही अपनी गलतियां मिटाता हूं, कभी-कभी वही गलतियां फिर दोहराता हूँ
    ऑफिस में टार्गेट के प्रॉमिस को हर कीमत पर निभाता हूं
    पर अक्सर अपने आप से किए वायदे भूल जाता हूँ.
    किधर जाता हूं, कब जाता हू, सबकों ये खबर है
    पर ये खबर बस अपने आप को कभी नहीं दे पाता हूँ
    मंज़िल का पता नहीं पर emi के प्रेशर में बस चलते चले जाता हूँ
    कभी तो Economy में प्यार का सिक्का चलेगा,
    बस ऐसे टेढ़े मेढ़े ख्वाब,दिन में ही बनाता हूँ
    और शाम को थककर, अपने इरादों की रबर से
    इन सबकों मिटाता हूँ...
    और फिर से अपनी जिंदगी का बस्ता संभालता हूँ....

    ©youthsome

  • youthsome 5w

    Changing pattern

    तेरे लबों का जायका बहुत गमगीन सा हो गया है
    जब से मेरा मिज़ाज कुछ नमकीन सा हो गया है ।।

    जवाब तो मुझे देना है इन मुश्किल सवालों का
    क्यूँ मोहब्बत का गाढ़ा रिश्ता इतना महीन सा हो गया है ।।

    के मैं तो गुनहगार हूं अपनी सज़ा काट ही लूँगा
    पर लगता है तुझसे भी कोई जुर्म संगीन सा हो गया है ।।

    के तेरी उम्मीदों के कर्ज की चक्की चलाता हूं अब मैं
    तेरे मिलने के बाद मेरा साया मुझसे रहीन सा हो गया है।।

    ©youthsome

  • youthsome 5w

    Flutemaker

    शाम को आज फिर खाली हाथ घर जाएगा वो,
    बच्चों की खुशी देखकर फ़िर अंदर से मर जाएगा वो.
    आज भी नहीं मिला कोई लकड़ी का खरीदार,
    आज फ़िर इन ही लकड़ियों से अपनी चिता बनाएगा वो.
    के कहते तो बहुत हैं के बदल दो अब अपना कारोबार,
    और आज फिर सबके दरों पर ठुकराया जाएगा वो.
    दिन भर की मशक्कत के बाद ठहर सा जाता हैं ईमान,
    पर कल फिर अपनों की जिंदगी संवारने में लग जायेगा वो.
    अकेले देख नहीं पाता के समय निकलता जाता हैं जिंदगी से हर पल,
    कोई तो हाथ पकड़कर थामेगा, इसी उम्मीद में फिर दिन रात निकालेगा वो.
    आज नहीं तो क्या हुआ कल मिलेगा इस मेहनत का मोल,
    बचपन में सुनी किसी कहानी की सीख को, सच बनाएगा वो.
    ©youthsome

  • youthsome 5w

    Priorities

    आज सुबह दौड़ते हुए जब अचानक बारिश होने लगी
    तो एक पेड़ के नीचे सहारा ले लिया,
    ध्यान से देखा तो याद आया के ये तो वही पेड़ है, जिसके नीचे अभी कुछ महीनों पहले गर्मी की चिलचिलाती धूप में छाया के लिया खड़ा था.
    वही पेड़.

    रिश्ते भी शायद ऐसे ही होते है, शायद.
    बारिश हो या धूप, हमेशा बचाते हैं ऐसे ही इस पेड़ की तरह.
    पर कभी कभी जब बारिश तेज हो तो ये पेड़ भी नहीं बचा पता,
    कोशिश करता हैं,
    पर खुद भीग जाने पर आपको भी भिगा ही देता है और लगातार तेज धूप में तो खुद ही सूख जाता है..

    पर देखना ये होता है के, आप के लिए ज्यादा महत्व क्या रखता है,
    उस पेड़ के नीचे बारिश और धूप से अक्सर बचना
    या फिर उस पेड़ के नीचे कभी कभी भीग जाना.

    ©youthsome

  • youthsome 6w

    Night

    Thoughts
    In the morning fly out in the open
    Somewhere far off,
    Only to return back in dark night
    When I feel your absence.
    Is it this empty space between us
    Which keeps me awake
    In the cold nights
    Or these thoughts
    which keeps me warm.
    ©youthsome

  • youthsome 7w

    Beautiful

    खिड़की से देखता हू हर रोज
    गहरे नीले समंदर के बहते पानी को,
    चकाचौंध हो जाती है ये आँखें
    जब धूप पड़ती है पानी के ऊपर,
    जैसे तुम्हारे चमकते जिस्म ने
    मेरे ख़यालों की चादर ओढ़ ली हो
    या कभी मेरे खयाल
    मानो खेल रहे हों तुम्हारे जिस्म पर,
    ये ख्याल ही तो है जो
    बना देते है खूबसूरत तुमको,
    क्या तुम्हारा मन नहीं करता
    के समेट लू इन सेंकड़ों ख़यालों को
    और कैद कर लू अपने अंदर
    और फिर जब भी कभी धूप आए
    तो ओढ़ लू इन्हीं ख़यालों की चादर
    ताकी मैं इन्हें हर रोज़ देख सकूं
    इसी खिड़की से इस गहरे नीले समंदर की तरह
    ©youthsome

  • youthsome 8w

    Mirage

    ख्वाब है ये मेरे क्या करूँ
    उड़ते रहते है

    मेरे बस में कहा ये
    ये तो बस तुमसे जुड़ने का
    कुछ धागा सा
    बुनते रहते है.

    यहाँ से वहाँ और वहाँ से वहाँ,
    कहा मालूम है इन्हें कोई सरहद
    कहा सुनते है ये किसी की
    ये तो बस
    तेरी धुन में रहते है.

    कभी वो पुराने दिन कभी वो रातें
    तूने पकडा था जब हाथ
    बस उन्हीं यादो का कुछ बचा हुआ सामान
    हर रोज ढोते रहते है.

    तेरे जिस्म की खुशबू
    पता नहीं कैसी खुमारी है
    इसी खुशबू में मुझे
    हर रात डुबोते रहते है.

    आज नहीं मिला तो क्या हुआ, कल मिलेगा तू
    इससे एहसास से मेरी
    उम्मीदों की माला पिरोते रहते है.

    ख्वाब है मेरे क्या करूँ
    बस उड़ते रहते है
    बस उड़ते रहते है.
    ©youthsome

  • youthsome 8w

    Habits

    वो हर रात को
    कांसे की बोतल में पानी भरने की आदत
    सुबह के उजालों में अपनी अपनी बोतल से पानी पीना 
    और जिंदगी की जद्दोजहद में आगे चलना........
    पर एक दिन सुबह उठा तो देखा
    मेरी बोतल पानी के लिए तरस उठी थी
    और तुम्हारी बोतल पानी से लबालब भरी थी
    भूल गया था एक रात को, शायद बोतल में पानी भरना मैं
    या शायद तुम
    मुझे पूरी तरह भूल चुकी थी
    ©youthsome

  • youthsome 8w

    Why

    "Forever" or "Never"

    Does it even mean anything when forever is never.


    ©youthsome

  • youthsome 8w

    Thoughts

    कभी यूहीं मेरी हथेली की अपने हाथों से तो दबाओ तुम
    रूह की फिक्र छोड़ो इस जिस्म से तो जुड़ जाओ तुम
    भूल जाऊँ मैं, के मैं क्या हूं
    भूल जाऊँ मैं, के मैं क्या हूं
    कैदी परिंदा या फिर बहती हवा हूं
    उन सब के जैसा ही या बिल्कुल जुदा हूं
    ठहरा हुआ हूं या लहरों से बना हूं
    हर बार की कोशिश या किसी मर्ज की दवा हूं
    खाक का तिनका या बारूद नया हूं
    नादानी की हद्द या सोच की इन्तेहा हूं
    मैं, मैं ही हूँ ना या फिर तुमसे बना हूं
    जान लो तुम
    के ये सब भुलाकर भी मैं तुमसे जुड़ा हूं
    कभी तो तुमको कह सकू
    के चाह है मेरी
    बस यूहीं तुम्हें सोचूँ
    और उसी पल मेरे करीब आओ तुम
    मुझको पहनो, मुझको ओढ़ हो, मुझमे ही खो जाओ तुम
    बस मैं ही मैं रहूं हर मंजर में, तुम्हारे हर पल में
    के ये सोच है मेरी .....
    इस सोच की तरह इस कदर
    बस एक बार मेरे जेहन में समाओ तुम
    रूह की फिक्र छोड़ो इस जिस्म से तो जुड़ जाओ तुम
    ©youthsome