yashashvigupta_07

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twinkle twinkle little star raho apne aukat anusar

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  • yashashvigupta_07 64w

    कितना मुश्किल है ना चाँद का भी चाँद हो जाना
    छिटका के अपनी चाँदनी दूसरों पे
    खुद तन्हा रह जाना।
    अपने मन के जज़्बातों को छुपाकर
    हर रात प्रकाश बिखेर जाना
    अपनी खूबसूरती की तारीफ़ सुनकर भी
    सिर्फ मूक भाव को दर्शाना
    और मंद-मंद मुस्कुराना
    तारों संग रहकर भी अकेला
    कभी ना बहक कर पथ से
    खुद को एक सादगी की मिसाल बना जाना।
    देना शीतलता सभी को हर रोज
    पर
    उसका ज़िमेदार भी रातों को बता

  • yashashvigupta_07 64w

    तुम खुश हो न?
    बस इतना ही तुमसे पूछना है, न जाने कितने वक्त से। शायद सालों बीत गये हैं। अब वक्त याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती है, साल-दर-साल यादें धुंधली पड़ती जायेंगी। बस हादसे याद रह जायेंगे।
    तुम्हे मुस्कुराते हुए हम कभी नहीं देख पायेंगे। तुम्हारी हँसी पर तुम्हारे दायें गाल में छोटा-सा भंवर उठता था और तुम्हारी आँखों में अनगिनत सितारे झिलमिला पड़ते थे। क्या अब भी ऐसा होता है?
    हम! हम खुश हैं। ये सोचकर कि तुम खुश हो। तुमने कहा था कि तुम्हारे हथेली पर सालों पहले लगी चोट कभी-कभी टीसती है। बस किसी रोज हमें दर्द महसूस होता है, यूँ ही। क्या तुम्हारी हथेली अब भी टीसती है?
    शायद तुम नहीं जानती। छोड़े गये प्रेमी, अपनी प्रेमिका से पुनर्मिलन की अनेकों कल्पनायें करते हैं। हम भी अपनी कल्पनाओं में तुम्हे मिलते हैं, तुम्हे सीने से लगाकर रो लेते हैं, उन तमाम प्रेमियों की तरह यह जानते हुए कि तुमसे कभी नहीं मिल सकेंगे।
    तुम जानकर हँसोगी कि यह कल्पनायें इतनी सजीव लगती हैं कि हम कई बार सच में रो पड़ते हैं। तुम्हे महसूस कर पाना ही शायद हमें एक और दिन जीने की वजह देता है। हम डरते हैं किसी रोज अगर ये कल्पनायें महज कल्पनायें ही होकर रह गयीं तो! कहो, हम कभी, किसी रोज, कही किसी दूर शहर में ही सही, मिलेंगे?
    तुम्हे कभी बताया नहीं हमने। जब तुम थी और तुमसे घंटो बातें हुआ करती थीं तब तुम्हारी आवाज सहेजा करते थे हम। कभी जो तुमसे बातें नहीं हो पाती थीं तब उन्हे सुनते हुए, इस एहसास के साथ कि तुम बात कर रही हो, हम सो जाया करते थे। अब वो आवाजें गुम गयी हैं। अब नींद भी कहाँ आती है। सालों गुज़र गये हैं, ठीक से सोये नहीं हैं हम। तुम्हे तो नींद आती है न?
    बेचैनियाँ सीने में घर कर चुकी हैं। सफ़र बहुत लम्बा है और तुम कहीं नहीं हो। किसी रोज तुम्हारे शहर आना चाहते हैं, तुम्हे मिलने को। यह जानकर भी कि शायद तुम वहाँ न हो। लेकिन तुम्हारी कही एक आखिरी बात हमारे पाँवों से लिपट जाती है। वह एक बात जो हम भूले नहीं पर हमें याद भी नहीं है।
    हम कभी तुम्हे ढूंढ़ने को नहीं आयेंगे। इंतज़ार करते प्रेमी हादसों के कब्र होते हैं। हर हादसे उनके सीने में दफ्न हो जाते हैं और ता-उम्र वहीं रहते हैं। तुमने कहा था, इंतज़ार मत करना।
    हम और कुछ नहीं कर सकते हैं। तुम्हारे होने का एहसास, तुम्हे पा लेने की कल्पनायें और तुम्हारे लौट आने का इंतजार, हमारे होने की वजह है। तुमने कहा था, किसी गुमनाम शहर से, फिर मिलेंगे 'सोच'।
    क्या हम फिर मिलेंगे?
    बस इतना ही पूछना है तुमसे। न जाने कितने.

  • yashashvigupta_07 64w

    “Virtue alone has majesty in death.”

  • yashashvigupta_07 65w

    सोच रहा हूँ-क्या तुम हो
    दर्द हो या कि दवा तुम हो

    तुमसे रिश्ता कोई नहीं
    फिर भी इक रिश्ता तुम हो

    अपने तो हैं ही अपने
    अपनों से ज़्यादा तुम हो

    क्यों आता है ज़ेहन में
    सच हो या सपना तुम हो

    कोई कुण्डी खटकाये
    मुझको ये लगता तुम हो

    श्याम मुझे मानो न सही
    पर मेरी राधा तुम हो

    मैं गर खुद को प्यार कहूँ
    मेरी परिभाषा तुम हो

    चाहत के दोषी दोनों
    आधा मैं आधा तुम हो

    यों ही मुझे अपना कहते
    या कुछ संजीदा तुम हो

    दरवाज़ा खोला उसने
    फिर बोला-अच्छा, तुम हो

    मैं तो साथ तुम्हारे हूँ
    क्यों कहते तनहा तुम हो

    जब भी मेरा फ़ोन बजा
    मैंने ये सोचा तुम हो

  • yashashvigupta_07 65w

    “I wouldn't say that I've had a tough life by any stretch of the imagination.”

  • yashashvigupta_07 65w

    “The best time to make friends is before you need them.”

  • yashashvigupta_07 65w

    “Talent, like beauty, to be pardoned, must be obscure and unostentatious.”

  • yashashvigupta_07 65w

    उसकी चीखों से
    रात के सन्नाटे भी
    सिहर उठते हैं,
    बर्तनों के शोर में
    उसका रोना कहीं
    दब जाता है,
    और फिर,
    बत्तियां बुझ जाती और
    चाँद की रोशनी में भी
    खंडहर सा अंधेरा
    छा जाता है,
    फिर सुबह की रोशनी
    उन घावों को बालों से
    ढक देती है,
    हाथों पर बनें वो सिगार
    के निशान,
    आँचल में कहीं छिप
    जाते हैं,
    आँसू पलकों में ही
    सिमट जाते हैं,
    और लग जाती है वो
    फिर ऐसे ही काम में
    जैसे वो रात कभी
    आयी ही नहीं,
    जो रात हर रोज
    आती है.....

  • yashashvigupta_07 65w

    गुम सी हो गई है चांदनी बादल के आगोश में,
    हम ने खुद को तन्हा कर दिया इश्क़ के जोश में।
    मान गए साहब कुछ तो नशा जरूर था ,
    वरना हम खुद को यूं बरबाद नहीं करते पूरे होश में।

  • yashashvigupta_07 65w

    वो चाँद ही तो हैं ,
    इबादत क्यों करूं ?

    वो इतना ,
    बड़ा भी तो नहीं की ,

    उसकी वकालत ही करूँ !