writer_shubh

“बेताब सपने, बेचैन उम्मीदें, बेपरवाह हौसले, बेबस रास्ते, बेहाल हम, बेख़बर तुम और तमाम ख़र्च हमारी साँसें ।”

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  • writer_shubh 41w

    मैं हिंदी की कविता सा,
    तुम संस्कृत की श्लोक प्रिये ।

    तुम उपन्यास सी,
    मैं लड़का अनपढ़ ग्वार प्रिये ।

    मैं लिट्टी-चोखा का,
    तुम मोमोस-नूडल्स की शौक़ीन प्रिये ।

    तुम शहर की इमारत सी ,
    मैं गाँव का हरियाली प्रिये ।

    दिन भर का थकान सा मैं,
    तुम चाई सी सुकून प्रिये ।

    तुम Instagram की reels सी,
    मैं Twitter सा boring प्रिये ।

    तुम WhatsApp की Status सी,
    मैं Telegram सा अस-मंजस प्रिये ।

    तुम CEO मेरे दिल की,
    मैं EMI वाला बेरोज़गार प्रिये ।

    यूँ सरल भांसा में कहूँ
    तो इस भाग-दौड़ की ज़िंदगी में ,
    तुम मेरी सुकून प्रिये ।

    ©लेखक_शुभ

  • writer_shubh 41w

    यूँ सरल भांसा में कहूँ
    तो इस भाग-दौड़ की ज़िंदगी में ,
    तुम मेरी सुकून प्रिये ।

    ©लेखक_शुभ

  • writer_shubh 41w

    तुम CEO मेरे दिल की,
    मैं EMI वाला बेरोज़गार प्रिये ।

    ©लेखक_शुभ

  • writer_shubh 41w

    तुम WhatsApp की Status सी,
    मैं Telegram सा अस-मंजस प्रिये ।

    ©लेखक_शुभ

  • writer_shubh 41w

    तुम Instagram की reels सी,
    मैं Twitter सा boring प्रिये ।

    ©लेखक_शुभ

  • writer_shubh 41w

    दिन भर का थकान सा मैं,
    तुम चाई सी सुकून प्रिये ।

    ©लेखक_शुभ

  • writer_shubh 41w

    तुम शहर की इमारत सी ,
    मैं गाँव का हरियाली प्रिये ।

    ©लेखक_शुभ

  • writer_shubh 41w

    मैं लिट्टी-चोखा का,
    तुम मोमोस-नूडल्स की शौक़ीन प्रिये ।

    ©लेखक_शुभ

  • writer_shubh 41w

    तुम उपन्यास सी,
    मैं लड़का अनपढ़ ग्वार प्रिये ।

    ©लेखक_शुभ

  • writer_shubh 41w

    मैं हिंदी की कविता सा,
    तुम संस्कृत की श्लोक प्रिये ।

    ©लेखक_शुभ