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  • vipin_vn 2d

    #Miraquill #hindi poetry #writersnetwork
    #31Nov./2021.
    @anusugandh,


    Today I am right there
    The leaves also fell, forced to leave together..
    In the first thick shade, the caress of the cold wind
    Having found, all my own flourishing famous..
    Today each one has his own abode somewhere in his own world, his own place, engrossed in happiness..
    Today the leaves are no longer changing the sun into the shade
    Now burning the ground with heat, the sunshine laughed.. be proud..
    All scattered, where to be left somewhere
    There are only memories left, swings, it used to be that fairs were plentiful..
    Destiny is of the tree, not to be ashamed.. is accepted
    I am above dry ground, many roots are buried within..
    Waiting for the heat of summer, the roots start drying up
    The storms of rain, the inundation rose.. take me away, towords end...

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    आज मैं वहीं हूँ बड़ा ऊँचा, बचा ढांचा भर,
    पत्ते भी गिर, साथ छोड़ ने पर मजबूर..
    पहले घनी छाँव में, ठंडी हवा का दुलार,
    पा कर, मेरे सभी अपने फले फुले हुए मशहूर..
    आज हर एक का अपना आशियाँ है कहीं ओर, अपनी दुनियाँ,अपने जहाँ, खुशीयों में मशरूफ..
    आज धूप को छाँव में बदलतें पत्ते नहीं रहे,
    अब जमीं को तपते जलाते, धूप हसे.. करे गरूर..
    सब बिखर गये, छोड़ गये जाने किधर कहीं पर,
    बस यादें है बाकि, झूले लगते, कभी मेले भरपूर..
    नियति है दरख्त की, गिला नहीं.. है स्वीकार,
    सुखा जमीं से ऊपर हूँ, जड़े भितर गड़ी बहु..
    इंतजार है ग्रीष्म का ताप से हो जड़ें सुखनी शुरू,
    बारिशों के, उठे सैलाब..बहा ले जाये अंत की ओर..
    ©vipin_vn

  • vipin_vn 2d

    ईश्वर से हम हैं याचना करते,
    सिर्फ याचक हैं हम..
    क्या सही में हम ऐसा हैं समझते?
    हां.. तो अहंकारी न होते हम..
    याचक दीन, नम्र, लीन है होता
    जहाँ सिर्फ " मै " है.. वही अहं..
    याचना में अपूर्णता, गरज से,
    आर्तता से पुकारते हम..
    " मै " है परिपूर्ण..भाव दाता के,
    मेरा कह.. संचय करते हम...
    " मै " बन के रहें... डर घेर सताये
    संचित के खोने का, नींदे होती कम..
    याचक बन मांगे, मांगने से मिले
    पातें, खाते सारी रात सोते हम..
    जीवन का कटु सत्य जान ले बंदे,
    दाता एक वही "परमात्मा " पिता परम..
    याचक ही बनो तुम मौज करोगे,
    " मै " में तय अकेले जीना अकेले ही मरण..
    ©vipin_vn

  • vipin_vn 4w

    धन... एक सुनहरा आज,
    एक मजबूत उम्दा कल...
    पगचिन्ह मिटाता आये,
    एक बेदाग, सशक्त बल..
    ना कोई कोसे, ना टोके,
    पूजे उसे, चाहे हर पल..
    बदले खाक में या रहे प्रचूर,
    अगर जाये सम्भल...
    ©vipin_vn

  • vipin_vn 4w

    शुभ दीपावली

    इस दीपावली पर्व पर...
    अपने घर की सफाई की है ना..
    आओ जरा मन की सफाई भी कर लें..
    दीपक जला घर को रौशन किया ना..
    आओ दिलों में प्यार के दीप जलाये..
    आओ खुशियाँ बाटें,
    बाँटने से बढ़ती जाये..
    आओ मीठे हो जाएं,
    मिठास बढ़ाएं

    दीपावली पर्व की..
    हार्दिक शुभकामनायें..!
    ©vipin_vn

  • vipin_vn 5w

    #Miraquill #hindinama#writernetwork
    #Oct 26/2021
    बोल के ढ़ोल सुहाने.. अति आनंद में बजा गए ��
    क्षमा प्रार्थी हूँ बहन। कछुआ चाल से वक़्त से पीछे रह गए।

    @Rachnaprati 101
    @anusugandh

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    जीवनसाथी

    अनमोल थी वह
    शुभ घड़ी,जब हम
    बंधे परिणय सूत्र में,
    ले हाथ में हाथ..

    जिंदगी में हुई शामिल,
    आप ऐ.. जींद मेरी,
    गृहप्रवेश से, कर आगास,
    आज भी अटूट है साथ..

    मेरी बेजान, वीरान..
    जिंदगी की दरारें भरी,
    सवांरा घर मेरा..
    जीवनसाथी बन, आयी..

    सूखी शाख पर फिर
    कोपलें फूंट आयी,
    प्रेम अमृत सिंच मृत
    धरा पर हरियाली छायी..

    कारवाँ खट्टी-मीठी, कुछ
    तीखी कड़वी यादों का..
    सुख-दुःख..आंधी-तूफ़ाँ,
    धूप-छाँव भरी सौगातों का..

    साथ चला, चल रहा,
    चलता रहेगा.. अथक..
    साथ छूटे जब सांस टूटे,
    अटूट जोड़ ना हो पृथक..
    ©vipin_vn

  • vipin_vn 6w

    एक मानव ही चौरासी लाख
    जीव जन्तुओं मे है श्रेष्ठ जीव
    सोचता, अहम किरदार निभाता
    जीवन पहिये में बसा एक टिव
    कच्चा हीरा जो सत्कर्म से तराशा
    ईश सानिध्य पात्र छवि, जैसे दिव
    ©vipin_vn

  • vipin_vn 6w

    #Miraquill #hindi poetry #hindi writers
    #oct /22/2021

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    अकेला

    खुद की कमजोरी ढूंढ़, उन्हें मान कर,
    मज़बूती में बदल, बड़ी मेहनत लगन से..
    व्यक्तित्व में ज्ञानतेज, आत्मविश्वास भर,
    खुद इतना ऊँचा पातें हैं, अपनी नज़रों में..
    उपलब्धि, दिखाये नहीं विनम्र रहे.. पर,
    काम दिखता हैं.. ना छिपा है छुपाने से..
    कुछ खुश होतें, कुछ दिखते... देख शीर्ष पर,
    मानें तब.. जब विकल्प ना मिले ढूंढने से..
    पर आईना देख.. छवि करती एक सत्य उजागर
    सब पा.. कर, खो.. कर, मर.. कर भी तू अकेला रे..
    ©vipin_vn

  • vipin_vn 7w

    #Miraquill #hindinama #hindi poetry
    #oct / 14 / 2021

    बाहरी आंधी, तूफ़ाँ..
    बदलते हर मौसम से बचने,
    घर की दीवारें, छत..
    मजबूत करें हम,
    भीतर, रिश्तों में प्यार और आपसी
    विश्वास,भी अगर मजबूत करें हम
    तो.. घर खुशहाल,
    आजीवन आबाद रहेगा..
    नींव पर, अडिग रहेगा,
    आओ करें प्रयास हम..!

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    घर एक कल्पना १

    एक आसरा, चारदिवारी सर पर छत,
    जरुरी है मकान, बाद रोटी,कपडे के..

    हर जीव चाहे, हैसियत से बनाए,
    कोई जरुरत से,कोई दिखावा या गरूर से..

    पाल से बने, बास मिट्टी घास से बने,
    तम्बू... झोपड़ा, कवेलू है तो मकान कहे..

    एक इंसान नहीं, सब मिल परिवार बना,
    जब अपनी लगन से, प्यार से अपनेपन से..

    सब मेहनत से अपनों के लिए जो बनाये,
    मकान.. तो अपना प्यारा घर कहलाये..

    गृहप्रवेश कर रहें.. एक हो,रखें खयाल सबका,
    सबका हो मान, जियें सदा एक दूजे के लिए..

    हर दिन सफाई, लीपा पोती, झाड़ू कटका,
    तुलसी बिंद्रावन सजा,रंगोली से बिच आंगन में..

    अपनत्व घर का गहरा हो चला, ये क्या हुआ
    परिवार घर में घुल के, घरपरिवार एक हो गए..
    ©vipin_vn

  • vipin_vn 8w

    Collab with @sramverma

    उम्र तो अपनी गति से चलती रहती है ;
    फिर क्यों ख्वाहिशें वहीं की वहीं खड़ी रहती है!
    Sramverma

    उम्र अपनी गति से चले,
    उदय है तो अस्त है,समय तय करे.
    ख्वाहिशें शुरू हो ख़त्म नहीं, बढ़ती रहें,
    हैं जाल.. इंसानी बुना, स्थिर रहे..
    ��©vipin_vn

    #Miraquill #hindi collab #writers natworks
    #hindinama

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    Collab

    उम्र तो अपनी गति से चलती रहती है ;
    फिर क्यों ख्वाहिशें वहीं की वहीं खड़ी रहती है!
    Sramverma

    उम्र अपनी गति से चले,
    उदय है तो अस्त है,समय तय करे.
    ख्वाहिशें शुरू हो ख़त्म नहीं, बढ़ती रहें,
    हैं जाल.. इंसानी बुना, स्थिर रहे..
    ©vipin_vn

  • vipin_vn 8w

    Collab with @nilesh_writes

    अरमानों कि गलियों से गुजरना
    अच्छा नहीं लगता
    क्यों की बदकिस्मती का चौराहा
    जो बिच में पड़ता है
    nilesh..

    अरमानों को हवा न दे, बदकिस्मती से,
    टकरा के, अपाहिज ना बनना..
    हौसला रख बुलंद, उठ कोशिश कर,
    बेशक़ रात काली घनी,पर सुबह तो तेरी है ना..