vinaypandey84

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⚖️ Lawyer, Poet, Writer, socialist I AM A LIMITED EDITION ��11sep facebook/vinay pandey

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  • vinaypandey84 16h

    बहुत सी होलिया खेली है हमने
    ये रंग क्या बिगाड़ेंगे हमारा
    इन रंगो से पुराना नाता जो ठहरा।।
    गर खेलना ही हो तो इश्क़ की होली खेलना,
    इन रंगो में रखा क्या है,
    इन रंगो से ना चोट होगी,
    ना दर्द होगा ना ज़ख़्म ही होगा।।
    गर चोट पौहचानी ही हो,
    तो आशिकी में दिल तोड के पौहचालेना,
    तुम्हे चोट पौहचाने में भी मज़ा आएगा,
    और हमें उस चोट की दर्द सैहने में...✍️ विनय पांडे
    ©vinaypandey84

  • vinaypandey84 2d

    काले और गोरे में,
    मै श्याम वर्ण चुनूंगा।।
    तुम ढूंढ लेना सुदामा,
    मै तो मित्र कर्ण चुनूंगा।।

  • vinaypandey84 2w

    जो दूसरों को दुख देकर खुद हस्ता है।
    तो होनी उसे दुख देकर सौ सौ बार रुलाती है।
    इसलिए दूसरो को दुख देने से पेहले इतना अवश्य सोच लेना चाहिए।
    यदि इसी दुख का वज्र अपने सिर पर गिरे तो क्या होगा।।
    भगवत गीता
    ©vinaypandey84

  • vinaypandey84 3w

    मशहूर होने का हमे भी शौख है
    हम भी चाहते है के हमे देखकर लोग कहे वाह क्या शकसियत है।
    मगर कमबख्त पता ना था के अपने वजूद को बेच कर मशहूरियत की कामयाबी मिलती है...✍️ विनय पांडे
    ©vinaypandey84

  • vinaypandey84 3w

    मैने जो पढ़ा देखा सुना वही माना है,
    जिसने जो दिखाया वो मैने कभी ना माना है,
    अपने विचारों को ही मैंने सही माना है।।
    मै नही केहता के मै सही हु, हा मगर मै ये भी नहीं केहता के मै गलत हू,
    मेरी सिख से मैंने जो सीखा है वही मेरे लिए सही है।
    तुमने जो सुना वो तुमने माना है।।
    ये देन है उनकी जो हम खुली सास लेस रहे है वरना इन सासो पर भी कर होता,
    हुऐ जो कुर्बान हम सबकी आजादी के खातिर।।
    आज तुम केहते हो के जो किया सब गलत किया
    ऐसी तौहमत जो तुमने लगाई है, ये सुन कर
    जो कुर्बान हुऐ है उनकी भी आंख भर आई है।।
    मै केहता हु ना तुम थे ना हम थे सब सुनी सुनाई है,
    ये जान कर के तुमने तोहमत लगाई है
    जब समझोगे के ये तो शडीयंत्र था,किसी
    का बनाया ये खेल था,तब बरदाश कैसे कर पाओगे।।
    देखना चाहोगे मगर सबसे तुम आंख ना
    मिला पाओगे सासे चलेंगी मगर जिंदा होते हुए
    भी बे मौत तुम मर जाओगे... ✍️ विनय पांडे
    ©vinaypandey84

  • vinaypandey84 3w

    बापू ना ये सिर्फ नाम है ये है एक सोच।
    अंधियारो में रोशनी को तलाशना ये थी उनकी खूबी।
    अपने हक के खातिर मुस्कुराके न्याय से है पार पाना ये बापू का था हम सबको संदेश।
    हार कभी ना मानी जिसने वो था बापू के हौसलो का दृढ़ संकल्प।
    हिंसा से कोसों दूर है रैहना ये था बापू का व्यक्तित्व।
    अहिंसा परमो धर्म है ये उनका था उद्देश।
    फल दार वृक्ष हमेशा झुका हुआ सा ये वर्णन है सही व्यक्ति की व्याख्या।
    ये बापू की एक सोच ही थी जिसने अग्रेजो को कर कानून को भंग करने पे किया था मजबूर दांडी यात्रा नामक(नमक सत्याग्रह) सत्याग्रह ने बदली थी हम सबकी तकदीरे...✍️ विनय पांडे
    ©vinaypandey84

  • vinaypandey84 4w

    महज़ ख्याल भर से खुशी इतनी है,
    तो हक़ीक़त मै रूबरू हुए तो आशिक़ी कितनी होगी,
    क्या मिलकर बिछड़ना यही आशिक़ी थी।।
    कब अधूरा प्यार किसी और का प्यार हो गया समझा ही नहीं,
    मिले जब दोबारा तो आशिकी भी शरमाई थी।।
    पैहले जिन आंखो में ख़्वाब बस्ते थे
    अब उन आंखों मे शर्म और हया उतर आई थी,
    मन ही मन दोनों के जैहन में सवालों
    की एक लंबी कतार सी थी।।
    बस पैहले पहल कोन करे आशिकी भी इसी इंतजार में थी...✍️विनय पांडे
    ©vinaypandey84

  • vinaypandey84 4w

    किरदार अलग है मेरा मुस्कुराकर
    गमाें को जो बाट लेता हूं।।

    कहानी तो किरदारों की होती है
    हम तो राहगीर है...✍️ विनय पांडे
    ©vinaypandey84

  • vinaypandey84 5w

    मुझे समझो तो आसान हु,
    जो ना समझो तो मुश्किल,
    ये मै नही मेरा व्यक्तित्व है
    ...✍️ विनय पांडे
    ©vinaypandey84

  • vinaypandey84 5w

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    अक्सर मेरी परछाई मुझसे पूछती है।
    के मै कोन हूं,
    और मै चुप चाप पलके झपकाकर केहता हूं।
    के तू मेरी कद है,
    तुझे देख मेरी औकात का पता चलता है...✍️विनय पांडे
    ©vinaypandey84