vi_shine0202

jay shree krishna ♥️

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  • vi_shine0202 21h

    Kai bar satya ka swikar karna kathin lagta hai,.par usse satya badalta nahi ��


    हे रामचंद्र कह गए सिया से
    रामचंद्र कह गए सिया से

    ऐसा  कलयुग आएगा

    हंस चुगेगा दाना तुन का
    कौआ मोती खाएगा
    हे जी रे
    सिया ने पूछा 'भगवन!
    कलयुग में धर्म - कर्म को
    कोई नहीं मानेगा?'
    तो प्रभु बोले
    'धर्म भी होगा कर्म भी होगा,
    परंतु शर्म नहीं होगी
    बात बात में मात-पिता को
    बेटा आँख दिखाएगा'

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    हे रामचंद्र कह गए सिया से
    राजा और प्रजा दोनों में
    होगी निसिदिन खेचातानी,
    कदम कदम पर करेंगे दोनों
    अपनी अपनी मनमानी,

    हे जिसके हाथ में होगी लाठी
    जिसके हाथ में होगी लाठी
    भैंस वही ले जाएगा
    हंस चुगेगा दाना तुन का
    कौआ मोती खाएगा
    हे रामचंद्र कह गए सिया से
    सुनो सिया कलयुग में
    काला धन और काले मन होंगे
    काले मन होंगे
    चोर उच्चक्के नगर सेठ,
    और प्रभु भक्त निर्धन होंगे
    निर्धन होंगे
    हे जो होगा लोभी और भोगी
    जो होगा लोभी और भोगी
    वो जोगी कहलाएगा
    हंस चुगेगा दाना तुन का
    कौआ मोती खाएगा
    हे रामचंद्र कह गए सिया से
    मंदिर सूना सूना होगा
    भरी रहेंगी मधुशाला,
    मधुशाला
    पिता के संग संग भरी सभा में
    नाचेंगी घर की बाला, घर
    की बाला
    हे केसा कन्यादान पिता ही
    केसा कन्यादान पिता ही
    कन्या का धन खाएगा
    हंस चुगेगा दाना तुन का
    कौआ मोती खाएगा हे जी रे
    हे मूरख की प्रीत बुरी
    जुए की जीत बुरी
    बुरे संग बैठ ते भागे ही
    भागे, भागे ही भागे
    हे काजल की कोठरी में
    कैसे ही जतन करो
    काजल का दाग भाई लागे ही
    लागे रे भाई
    काजल का दाग भाई लागे ही लागे
    हे जी रे
    हे कितना जती को कोई
    कितना सती हो कोई
    कामनी के संग काम जागे
    ही जागे, जागे ही जागे
    ऐ सुनो कहे गोपीराम
    जिसका है नाम काम
    उसका तो फंद गले लागे ही
    लागे रे भाई

    उसका तो फंद गले लागे ही लागे

    हे जी रे

    हे रामचंद्र कह गए सिया से,.

  • vi_shine0202 1d

    3. त्रिवेणी

    विशाखा

    ऐसा लगता हैं, गंगा मैया को मेरी आँखे अतीव प्रिय हैं | जो वह बार बार उन्हें अपने दर्शन कराती हैं | अब मैंने अपना नया दुपट्टा रूपा को दिखाने के लिये ही बैग से निकाला था और हसी मजाक में उसने वो हवा में लहराया | तेज हवा चल गयी, और क्या ? दुपट्टा उन छिछोरे लड़कों के सामने जा गिर पड़ा | तो क्या में अपना नया दुपट्टा भूल जाऊ ? अब इस में मेरा क्या कसूर था भला,.आजकल के लोग भी बड़े पागल दिखते हैं,.बेक़सूर पे ही हसते हैं | फिर क्यों न मेरी आँखों से गंगा जमुना बहे ?

    संतोष

    उस पल सूरज अपना सारा तेज किसी ओर को सौपा कर खुद विराम लेने जा रहा था | आसमान में शाम की रंगबेरंगी छ़टाये फहल रही थी | उफ्फ्फ ! हटाओ उन्हें आज मुझे वो भी फीकी लगती हैं | मेरी नजरो के सामने ये स्वर्ग की प्रतिछाया किसने ला कर रखदी हैं ? मैं हैरान हूँ ! तब ही किसीने मेरे हाथों में गरम चाय रखदी और मुझे एहसास हुआ मैं किसी स्वर्ग में नहीं हालांकि चाय की दुकान पे हूँ | और मेरी नजरो के सामने कोई प्रतिछाया नहीं , एक पागल लड़की हैं | मेरी बात तो इसे सुनाई नहीं देती | अरे पागल इशारा तो समझ जाओ ,...

    विशाखा

    हाये राम ! आग लग जाये उस दुपट्टे को, अब मैं क्या इतनी पागल लगती हूँ ? जो कोई मुझे इशारा कर के बताये | न जाने क्या समझते हैं कुछ लोग खुद को ? अगर इतने ही सज्जन हैं, तो रख दे मेरी आँखों के सामने मेरा जामुनि दुपट्टा | यूँ तो आँखों में काजल ड़ालने सारी अंगुलिया बेक़रार रहती हैं पर वही काजल अगर आँखों के अंदर चल दिया , तो मजाल हैं मुँह की जो फूक मारने आँखों के सामने खड़ा हो जाये | हूँ,........

    संतोष

    अरे ! अब तो हाथ में दुपट्टा आ गया और ये हाथ से निकल गयी | वैसे आज मुझे ऐसा लगता हैं, आइने का रंग जामुनी ही होता होगा,...


    ©Vaishnavi ♥️

  • vi_shine0202 3d

    2. त्रिवेणी

    . खिले हुये फूलों की लता में से जैसे कुछ फूल मंदिर में भगवान को चढाने के हेतु से तोड़े जाते हैं | उसी प्रकार विशाखा को भी अपने परिवार से, अपने शहर से मिलो दूर एक अनजान शहर के विद्या के मन्दिर में भर्ती कराया गया | फूल ,.हाँ फूलों के भांति ही सुन्दर, कोमल और निरागस थी विशाखा | दुनिया की मैली हवा में ऐसे फूल का मुरझां जाना कोई बड़ी बात नहीं | वह जैसे तैसे अपने दिन काट रही थी |
    संतोष,..संतोष कोई फूल तो नहीं मगर भँवरा जरूर था | वह एक मस्त मौला लड़का था | संतोष भी उसी विद्यालय में पढता पर दोनों के समय अलग अलग रहते |
    अब इस उम्र में तरह तरह के रस चखने की उमंग किस भँवरे को नहीं होती | मगर हकीकत के अनुसार ही खुद को जिंदगी के सांचे में वह जैसे तैसे ढा़ह लेता | संतोष का गाव उस शहर से पास में ही पड़ता इसलिए समय मिलते ही वो घर आता जाता रहता था |
    रजत संतोष का जिगरी यार, मानो जैसे उसके आने वाली बीवी की सौतन उसने पहले ही तयार रखी हो,.हांहां,. संतोष की ऐसी कोई बात नहीं होती जो रजत से छुपी हुई हो, फिर चाहे वो उसके चड्डी बनियान का रंग ही क्यों न हो |
    रजत अपने गांव से ही शिक्षा ले रहा था | वैसे उम्र में तो वह संतोष से बड़ा था, तो संतोष विशाखा से दो साल बड़ा था |
    वैसे तो तीनो के उम्र में कोई साम्य नहीं , फिर भी समय की न जाने कौनसी अदृश्य डो़र थी जो इन्हे पास खींची जा रही थी | ऐसा लगता हैं , वो समय अब दूर नहीं रहा ,.ऐसा लगता हैं, फूल को उसके भगवान अब मिल ही जायेगें,.मगर वो तो मुरझाया हुआ फूल, क्या भगवान उसे स्वीकार करेंगे ?
    या संतोष के स्पर्श मात्र से ही विशाखा का फूल फिर से खिल उठेगा ? ये कैसा परिहास हैं, भला विशाखा का भी कोई फूल होता हैं , वह तो अनगिनत तारो में खिला नक्षत्र हैं | वह तो अपनी मधुर चांदनी को ही संतोष को पिला दे , और संतोष सारे प्याले कुचलकर उस चांदनी की और कदम बढ़ाता रहे |

    संतोष

    कदम,..ये किस के क़दमों की आहट हैं ? ये कौन सी पागल लड़की हैं ,. इसका मजाक उड़ रहा हैं | इसे समझ में नहीं आता क्या ? , अरे रुको वहां मत जाओ ,..
    .
    .

    ©Vaishnavi ♥️

  • vi_shine0202 3d

    #triveni_byVS

    दरअसल मैं एक श्रृंखला लिखने जा रही हूँ ��
    आप सब का प्रतिसाद मिलेगा तो लिखने में उत्साह रहेगा ��
    Isliye jo bhi reaction ho Sachi sachi btana ��

    ❤❤
    16-oct.-2021

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    1. त्रिवेणी

    विशाखा

    कितने अजीब होते हैं न संयोग, बोहोत ही अजीब !
    उस दिन संतोष ने इशारा कर के मुझे रोका न होता,
    तो शायद आज मैं 'हम' ना हो कर, सिर्फ 'मैं' ही रह
    जाती | मैं इस अनमोल समय को अर्थात जीवन को
    कभी भी समझ नहीं पाती | वो संयोग भी शायद कुछ
    जरूरी सा था | मैं आशा करती हूँ, वो केवल संयोग
    ही था | "संतोष" मेरा यार,. मेरा जन्मो जनम का प्यार,.
    'कोई पागल ही होगा जो इस मिलन को संयोग कहेगा'
    ऐसा मैं नहीं रजत कहता हैं | पर मैं ऐसा नहीं मानती,.
    क्यों की जहां बात मिलन की होती हैं, वहा जुदाई का
    आलम भी होता हैं | और जुदाई के आलम को, मैं
    केवल और केवल संयोग ही मानती हूँ | अब आप जो
    चाहे मान लो ,...मैं तो पागल हूँ |

    संतोष

    आज भी , यहाँ भी,..हाँ ! आज यहाँ भी वो मेरे साथ
    मौजूद हैं | मेरे पास , मेरी आँखों में उसकी छाया,.
    आहाँ,..कितना सुकून हैं मेरी आँखों को ,.जैसे किसी
    देवता के हाथ से अमृत का प्याला फिसल कर गिर गया
    हो ,और उस प्याले में से गिरती अमृत की एक एक बूँद
    को मेरी आँखे संतोष से गटक रही हो , आहाँ ,..
    मेरी आँखों में तुम्हारी छाया अमर हो गयी | "विशाखा"
    उसका नाम | जैसे मेरा समय, मेरा जीवन उसकी
    शाखाओं से लिपट कर पुलकित हो गया हो
    और मेरा अस्तित्व उस नक्षत्र का अँधेरे में भी
    साया बन गया हो |

    रजत

    मैं "रजत" , तुम और मैं , हाँ ! तुम जो मुझे सुन रहे हो
    हम शायद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं,.मेरा किरदार
    ही कुछ ऐसा हैं | तुम मुझे सुनते हो और मैं उन् दोनों को ,.
    वो दो तो नहीं फिरभी 'संतोष और विशाखा' को सुनता हुँ ,.
    नहीं नहीं ! वो मुझे सुनाते हैं | मैं संतोष का लंगोटिया
    यार | विशाखा का माना हुआ देवर कम भाई जादा |

    ©Vaishnavi ♥️

  • vi_shine0202 1w

    Pgl thoughts

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    Ek wakt aisa aata hai
    jab hasne ke baad bhi thakan hoti hai
    Na jane kon pagal hai
    Jo khushiya dhundne nikalta hai

    Kyo uthalu mei
    tumhare faltu ke nakhare
    Ye zindagi tum guarantee deti ho
    Kal tak mere sath chalogi ?

    Din bitate hai to bite
    Tujhe usse kya
    Ye yaad tera kam hai har roj aana
    Tujhe wakt se hai Kya

    Tumhe pata hai
    kitani aalsi hu mei ?
    Jee Jee kar thak jati hu,
    itani aalsi hu mei

    ©Vaishnavi

  • vi_shine0202 1w

    I'm back ��✋
    Kch bda ho gya ������

    @jigna_a #rachanaprati93

    Yha se padhiyega ��

    ● अनेक रसिक एक कलाकार

    उस पल जब तुम
    अपने हाथों से मेरे केश सवाँर रहे थे
    आसमाँ ने भी शर्माकर
    खुदको बादलों के आड़ कर लिया
    चाँदनी कुछ कह रही थी शायद
    मुझे पूर्णरूप से सुनायी नहीं दिया था
    शायद बिजली के कडाड़ने की आवाज से
    खैर ! फिर जो बारीश हुयी
    मेरे केश शायद बिखेरनें के लिये ही
    सवाँरे थे तुमने
    दोनों ने एक ही चाय की चुस्की लियी
    चाय की मिठा़स के साथ ही साथ
    मेरी लाली भी तुम्हारे होटों पें आ उतरी
    और ऐसे उतरी के शायद आज तक ऊसे
    कोई बरसात नहीं मिटा पायी
    साँझ में जैसे सारे रंग आपस में घुल जाते हैं
    हमारे सारे रस एकदुजें में मिल गये
    और एक कला का आविष्कार हुआ ऊस पल
    हाँ ! एक कला

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    जो कला मैं आज समझ पायी
    जब मैंने ऊस पल से लेकर
    अभी इस पल तक का सफ़र किया
    इस पल जब मैंने अपने केश बिखेरे हैं
    और उन्हे सवाँरने तुम मेरे पास नहीं हो
    इस पल जब मुझे चाँदनी की आवाज
    बिलकुल साफ और साफ सुनायी दे पां रही हैं
    मैं तुम्हे बताना चाहती हूँ
    चाँदनी मुझ से कुछ युँ कह रही हैं ,
    " मैं युगों युगों से देख रही हूँ , इस कला के रसिकों को
    हाँ जिन्हे मैं देखती हूँ , जो मुझे भी देखते हैं
    वे केवल इस कला को ऊपभोगने वाले रसिक हैं
    पर जो मुझे सुन पाते हैं , जो मुझे सुनाते हैं
    वे असली कलाकार हैं "
    मैंने भी चाँदनी से सवाल किया ,
    " वो कैसे ? "
    ऊसने मुस्काते हुये जवाब दिया ,
    " तुम अपनी नजर से देखती हो,
    चाँद और चाँदनी एक ही आसमाँ के रहगुज़र हैं,
    ऊस तरह मैं भी देखती हूँ तुम और तुम्हारा
    प्रियकर भी एक ही धरा के रहगुज़र हो
    जिस तरह हम दोनों एक ही रात के हमसफर हैं
    तुम दोनों भी एक ही मंझील की डगर हो
    ये वक्त ये जिदंगी तो महज़ एक साधन हैं
    तुम अपनी कला की साधना में मस्त मग़न हो
    कला वो नहीं जो तुमने ऊस पल रचायी
    कला वो हैं, जो इस पल भी तुमने ऊस पल से
    खुब़ वफा हैं निभायी, हाँ तुमने वफा हैं निभायी
    तब ही तो एक आधे बरस की याद को
    तुम अपने अाखिरी साँस तक जीना चाहती हो
    प्रेम की इस दुर्लभ कला को , तुम पाना नहीं,
    हर एक नये रंगरुप से सजाना चाहती हो
    अब देखो न ! मैं चाँदनी हूँ , मैं मिथ्या हूँ
    फिर भी अपनी कला से तुम मुझे सुन रही हो
    मुझे अपनी सुना रही हो, हाँ तुम रसिक नहीं
    तुम कलाकार हो ! "

    ©Vaishnavi ♥️

  • vi_shine0202 3w

    सरकार

    युगों युगों से चलती आ रही हैं
    ये प्रीत की रीत
    युगों युगों के बाद भी आज वही हाल हैं
    युगों युगों तक कैद हैं साज श्रिंगार दर्पण में
    दिवानी तो आजा़द हैं दिवाने ख़याल में
    कबूतर गये, तार गये, फोन से मेसेंज बारमबार गये
    फिर भी ना संदेशा पुरा हुआ
    ये कैसे हुआ ? ये कैसा रुठा़ सवाल हैं
    सामने जमा़ना हैं, मुझे जमा़ने से कुछ छुपाना हैं
    मुझे सबकुछ कहना हैं, मुझे चूप रहना हैं
    जिंदगी सुस्त पड़ी हैं
    और ये कागज़ कलम ने बिछाया अनोंखा जाल हैं
    खैर ! प्रेम डंठल जैसा सरल नहीं
    लताओं जैसा लचीला हैं
    प्रेम काँटो से लिपटा गुलाब नहीं
    किचड़ में पला, कमल खिला खिला हैं
    प्रेम युगों युगों से
    बिछ़डा-बिछ़डा मिला-मिला हैं
    जो ना समझे प्रेम, तो बला हैं
    जो समझे प्रेम, वो समझे
    प्रेम तो जीवन जीनें की अनमोल कला हैं
    और हाँ ! मैं कलाकार हूँ
    तुम युगों युगों से
    मेरी कला का बढ़ता आकार हों
    तुम प्रियकर हों मेरे
    कटाक्ष में कहू ? तूम मेरी सरकार हों /

    ©Vaishnavi ♥️

  • vi_shine0202 4w

    Aaj break ko break kar janam din manao re
    ,....ye naacho re ����

    �� @amateur_skm ��

    नारायण आप पे सदा आशीर्वाद बनाए रखे ��

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    इस से पहले के मैं रुठ़ जाऊ
    आप पहले ही मुझे अपनी नयी बैग थमा दो
    मैं तो ससुराल जाऊंगी
    कहाँ ऊम्रभर आपके पास रह पाऊंगी
    भैया भाभी के आने से पहले ही
    वो लाल, पिली और जामुनी चुड़ीया भी दिला दो
    रात बोहोत जा़दा हैं
    वो सामने वाले श्ख़स का बडा़ बुरा इरादा हैं
    आप ऊस से निपटने की तरकी़ब बता दो
    ऐ दुनियावाले रोकते़ हैं
    आप की बहऩ को आगे बढ़ने से
    आप इन्हे आगे का रास्ता दिखा दो
    आप भैया हैं मेरे , मेरे पिता भी हैं
    आप भोले हैं , थोड़े सावले हैं , थोडे़ शैतान भी
    और बोहो़त जादा अक्षरों के ज्ञाता भी हैं
    Sauम्य स्वभाव
    Raमन भाव
    Bhaस्कर समान खुद जलके
    ज्यो लेखनी से तेज़ लाते हैं
    अपने सहज सुंदर विचारो से लोगो को भाते हैं
    श्रुतीका के किस्से सुनाकर सबको हसाते हैं
    भाव-विभोर करने में
    ऐ अच्छे अच्छो को पिछ़े कर जाते हैं
    हाँ ऐ अपने भैया हैं , अपने सौरभ भैया हैं
    आओ बच्चा लोग
    आज हसीखु़शी से इनका Bda'y day मनाते हैं |
    ####नाचो रे ❤

    ©आपकी छोटी़ बहना

  • vi_shine0202 4w

    वक्त जरिया हैं जीने का, इसे गवाया न कीजिए
    कुछ दीजिये, लीजिये तो हिसाब ख़िताब कीजिए
    वक्त जरिया हैं जीने का, इसे गवाया न कीजिए
    न जाने किस घडी,
    ऐ घडी 'घडी' ना रह कर, फंदा बन जाये कलाई का
    नसों को अपने छोटे-बडे़ काटो के बीच दबोच ले
    घोंट दे एक जान को , बेजान कर के छोड़ दे
    कफ़स में बंधे पंछी को आस्मान दे दीजिये
    वक्त जरिया हैं जीने का, इसे गवाया न कीजिए
    कड़वी राते छोटी बाते
    कानों से सरका कर नीचे गिरा दीजिये
    हसीं बाते हसीं मुलाकाते रोज रोज पहनिये
    वक्त को रोज रोज सजा़या कीजिये
    वक्त जरिया हैं जीने का, इसे गवाया न कीजिए
    हाँ ! कुछ अरोंड़े मरोड़े
    तजुरबों में सिकुडते हो तुम
    जी हाँ ! अपने अपने तजुरबों का लिहाज कीजिए
    वक्त गिरेबां में छिपा लह़जा हैं
    यूँ तजुरबों का लिहाज करते करते
    वक़्त को नज़रअंदाज़ न कीजिए
    वक्त एकलौता जरिया हैं जिंदगी जीने का
    वक्त एकलौता जरिया हैं जिंदगी गवाने का
    यूँ वक़्त को जिए, यूँ जिंदगी गवां न कीजिये /

    ©Vaishnavi ♥️

  • vi_shine0202 5w

    ऐसा लग रहा है ,
    मैं जिन जिन अल्फाज़ को छू रही हूँ
    वो अदृश्य हो रहे हैं ,.
    मैं जिन जिन रंगों को चुन रही हूँ
    वो रंगहीन हो रहे हैं
    एहसासों को घुटते घुटते
    सुख़ गया हैं गला
    आँखों से सारा पानी ओज़ल हो रहा हैं
    समझ नहीं आ रहा ऐ कैसी तड़प हैं,
    कोई अपना खो तो नहीं रहा
    मैंने पाया भी तो नहीं किसी को
    फिर ये कैसी घबराह्ट हैं
    मुझे अपने आप से डर लग रहा हैं |

    ©Vaishnavi ♥️