vaish_02

If you can't find the way ' create one ~

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Reposts
  • vaish_02 18h

    Kal sham ko 6:48 ke aas paas meri Dadi/Aaji ne iss jagat se vidai lie,.takreebn pichle 10-12 varsho se wo cancer patient rahi hn ,..pr abi 2-3 sal se unka sangharsh bohot badh gya tha,...parivar jano ki seva aur apne manodhairya ke aadhar pr wo ye sangharsh hasi khushi karti rahi,....pr kal iss sangharsh ka ant ho gya,..aur wo mukti ki aur chal pdi,..mei bchpn se dadi k bohot karib rahi hu,..wo meri dadi kam dost jada rahi,..bhale aaj dadi hmare bich n rahi ho pr dadi ki bohot sari baate, dhero smritiya aur amulya sanskar unki agli pidhiyo mei amar rahenge,.. yha Mirakee pareevar mei aap sab se nivedan karti hu,..aap meri dadi ki atma k shanti ke liye 2 min. Maun reh kr unko bhavpurna shraddhanjali arpan krey.

  • vaish_02 1d

    वो मुसाफिर हैं यारो
    दुनिया से कोई वास्ता नहीं रखता
    बस सहम जाता हैं कभी
    कही ठहरने के ख़याल से ~

    ©Vaishnavi ♥️

  • vaish_02 1w

    गम तो कोई नहीं हमारी मोहब्बत में
    हमने लेन देन की बाते ही नहीं कियी कभी
    फिर भी न जाने कैसे
    ज़िन्दगी के पास उधार रह गया कुछ वक्त
    कुछ वक्त जो एक दूसरे से परे कटा था
    अब हिसाब कौन देगा ?
    कफ़न ने हमे कस कर पकड़ लिया हैं
    ये सिलसिला शायद बेहिसाब चलेगा /

    ©Vaishnavi ♥️

  • vaish_02 1w

    क्यों हाँकते हो इतनी बड़ी बड़ी बातें तुम ?
    यहां एक औरत ने ही एक औरत को ना समझा /

    ©Vaishnavi ♥️

  • vaish_02 2w

    तुमसे दूर भी
    रंज ओ गम बतलाने को मजबूर भी
    मेरी आँखे सूखी सूखी
    मेरी आँखों को पिलाने आ,..

    खेल सारा छुपन छुपाई का
    प्याला जिस्म से भरा
    प्याला खत्म होते ही
    अपनी रूह को मिलाने ला,..

    झूठ ये हैं के 'सच रूठा हैं तुम से'
    सच कहूं तो 'सच मुस्कुरा रहा हैं'
    साँसे करवटें बदल रही है
    रात बाकी हैं अभी, तु मुझे सुलाने तो आ,..

    ©Vaishnavi ♥️

  • vaish_02 4w

    माँ बाप को परखा नहीं
    समझा जाता हैं,..

    ©Vaishnavi ♥️

  • vaish_02 4w

    समय कितना भी बीत जाये
    कुछ एहसास भुलाए नहीं जाते ,..

    ©Vaishnavi ♥️

  • vaish_02 5w

    तुम आओ न आओ
    तुम्हारी महक जरूर आती हैं
    जैसे की तुम मेरे पास आेर पास आ रहे हो
    वह महक मेरे भीतर तक फहल जाती हैं
    सर्द रातों में सुनी खिड़की पे कोहरे का छाना
    वैसे होता हैं तुम्हारा आना
    तुम धुंदले जरूर लगते हो
    मगर शामिल हो मेरी महफ़िल में
    तुम्हारे आने न आने से
    ये सच नहीं बदलता
    के ये सारे गीत तुम्हारे नाम हैं
    ,..तुम आओ न आओ
    तुम्हारी महक जरूर आती हैं
    और खुदखुशी कर लेते हैं मेरी बाग़ के सारे गुलाब
    फिर मैं अपने केशो में लगा लेती हूँ
    तुम्हारे साथ बिताए वह सारे लम्हात
    आह !! तुम्हारी महक मेरी साँसों में घुलने लग जाती हैं
    ,..तुम आओ न आओ
    तुम्हारी महक जरूर आती हैं
    कभी मुझे आया करती थी
    अब मुझ से ही आती हैं
    ,..तुम आओ न आओ
    तुम्हारी महक जरूर आती हैं ,...

    ©Vaishnavi ♥️

  • vaish_02 6w

    इक बहुँत कुछ हैं,
    जो चल रहा हैं अंदर
    इक सब कुछ हैं,
    जो थमा सा लगता हैं
    और तो क्या कहूँ ?
    इक मैं हूँ, इक तुम हो
    क्या इतना काफी नहीं !

    ©Vaishnavi ♥️

  • vaish_02 8w

    अब मान लिया मुश्किल को आसान
    एक मेरे गुमसुम होने पें दुनिया रुकती नहीं
    तुम जाओ, तुम रूठ जाओ
    मुझे अपना सा लगता हैं ये मिज़ाज़
    शुरू में रात आयी थी या दिन कौन जाने ?
    एक आना जरूरी सा था
    यूँ अपनी पलकों पे मोती पिरोया न करो
    मैं तुम्हारी पलकें चूम लूँगी
    मेल न ये मेरी कविता खाती हैं, न अपने हालात
    मगर मुझे नहीं लगता,
    यादों के क़ाफिये को किनारा करने में हर्ज हैं कोई |

    ©Vaishnavi ♥️