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Reposts
  • vaibhavpasrija 78w

    Sher

    मुझे बदज़ात कहने वाले भी,
    अब मेरी ज़ात पूछते है
    फटा जूता देख
    सब औकात पूछते है,
    कब तलक बचाओगे
    अपने माँस को इन भेड़ियों से,
    ये तो अपनी माँ से भी
    बाप के कागजात पूछते है।।
    ©vaibhavpasrija

  • vaibhavpasrija 119w

    Sher

    कैसे यक़ीन करूँ तेरी बात का ऐ काफ़िर,
    मेरा अपना ही साया दिन ढ़लते मुझे छोड़ देता है,
    यूँ तो शान्त पड़े दरिया में भी तूफान था कभी,
    बस वक़्त की बात है, वक़्त सब बदल देता है।।
    ©vaibhavpasrija

  • vaibhavpasrija 121w

    Sher

    मैं यार लिखूँगा, तुम जान समझ लेना,
    मैं वतन लिखूंगा, तुम ईमान समझ लेना,
    मज़हब से बहुत ऊँचा है मकाम हमारी दोस्ती का,
    मैं हिन्दू लिखूँगा, तुम मुसलमान समझ लेना।।।
    मैं गाऊँ भजन तो तुम आज़ान समझलेना,
    अल्लाहु अकबर के जाप को तुम राम समझलेना,
    मदमस्त सत्ता से सवाल हमेशा करेगी कलम ये मेरी,
    फिर चाहे तुम मुझे नक्सली या बेईमान समझ लेना।।।।।
    ©vaibhavpasrija

  • vaibhavpasrija 121w

    Unnao

    "हाथ लगाओ डर जायेगी
    बाहर निकालो मर जायेगी"
    .
    .
    यह पंक्तियाँ कब मछली से बेटी पर आगयी पता ही नहीं चला।।
    (Unknown writer)
    #unnao

  • vaibhavpasrija 121w

    Unnao

    बेईमानों की मंडी है,बेईमान तराज़ू है,
    सच ख़रीदने निकले थे और ईमान ही बिक गया ।।

    #unnao case
    ©vaibhavpasrija

  • vaibhavpasrija 122w

    A tribute to all the martyrs of kargil war..
    Kargil vijay divas ki shubhkaamnaye
    Jai hind��������������������������������
    @ramaiyya @vikrant_sadana @laughing_soul @vandna @rituchaudhry @writerstolli @deepajoshidhawan @raaj_kalam_ka @ayushibajpai_ @hindiwriters

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    Kargil

    इसी राख से जन्मे है,
    इसी में खाख होना है,
    किये जो पाप हमने है,
    मुसलसल उनको धोना है,
    तमन्ना एक दिल में है,
    वतन के काम आने की,
    कटा के शीश सरहद पे,
    शहीद-ऐ-हिन्द कहलाने की,
    कफ़न में हो मेरे तिरंगा,
    ख़ुदा से बस अर्ज़ इतना है,
    माँ भारती का मुझपे,
    क़र्ज़ इतना है।।।।।।
    ©vaibhavpasrija

  • vaibhavpasrija 122w

    बात नहीं करता

    जब आग लगी हो आँगन में,
    फिर कौन है भजन सुनाये,
    जब क्षुधा की अग्नि सुलग रही
    फिर कौन मसीति जाये,
    क्यों बात नही करता है कोई,
    यहाँ भूखी नंगी लाशों की,
    जिस घर में नहीं जलता चूल्हा,
    उसे क्या परवाह भजन अजानों की।।
    जब रोटी के इक इक टुकड़े को,
    यहाँ बच्चा तरस के सोता है,
    जब किसान खड़ा मजबूर यहाँ,
    बालक सा बिलख के रोता है,
    क्यों बात नहीं करता है कोई ,
    उन झूठे सियासी वादों की,
    जिस घर में पिता फाँसी झूला,
    उसे क्या परवाह भोग विलासों की।।।
    झूठा जो कलम लिखती है यहाँ,
    वही सोने सा बिकती है यहाँ,
    सच लिखने वाला ही जाने,
    क्यों उसकी थाली खाली है,
    तारीफ़ करो तो सब बेहतर,
    सच की ही ज़ुबाँ तो काली है।।।
    मत बाटों हमें यूँ मज़हब में ,
    इंसान है हम वही रहने दो,
    है चाह नही मुझे महलों की,
    पर उजड़े घर तो रहने दो,
    मै कहता नही कुछ किया नहीं,
    पर किया है जो वो काफी नहीं,
    जनमत का बहुमत मिला तुम्हें,
    पर ऐसे गुनाह की माफ़ी नहीं,
    चुन लिया प्रजा ने फिर तुमको ,
    सौंपी डोर तुम्हारे हाथों में,
    अब मर्ज़ी तुम्हारी जो देदो,
    है साँप तुम्हारे हाथो में,
    और मोर तुम्हारे हाथों में।।।।।।
    ©vaibhavpasrija

  • vaibhavpasrija 140w

    Desh

    जब मंदिर और मसीतों में,
    झूठी कसमो और रीतों में,
    इंसान बँधा रह जायेगा,
    तब देश वहीँ रुक जाएगा।
    जब धर्म के दंगे सुलग रहे,
    दिल भी अंगारे उगल रहे,
    अपनापन भी मर जायेगा,
    तब देश वही रुक जाएगा।।
    जब अपने और पराये में,
    जहाँ भेद हो साये- साये में,
    वो रब भी कहाँ बचपायेगा,
    उसको भी बाटा जायेगा।।।
    सोने की सुन्दर चिड़िया सा था देश मेरा,
    नानी के गुड्डे गुड़िया सा था देश मेरा,
    जहाँ महावीर के श्वेत कबूतर पलते थे,
    जहाँ नानक की वाणी से अमृत मिलते थे,
    मर्यादा के पालक जहाँ खुद राम हुए,
    जहाँ लाखों पीर पैग़म्बर ने अवतार लिए,
    जब बन्दों में वो प्रेम पुराना आएगा,
    तब भारत फिरसे विश्वगुरु कहलायेगा।।।।
    ©vaibhavpasrija

  • vaibhavpasrija 145w

    Shaheed

    आज फिर कायरता अपने,
    दामनो से झाँक रही थी,
    देख के लाशें जवानी,
    आँख मूंदे ताक रही थी,
    क्या यही अंजाम बस अब फौजी का है?
    क्या मौत ही पैगाम बस अब फौजी का है?
    खून से भीगी भारत माँ,
    जवाब अब ये मांग रही थी।
    जा के देखो हाल उस फौजी की माँ का,
    आँख सूखी के ना अब निकले है पानी,
    लाल मेरा खोज लाये फिरसे कोई,
    छुपा लुंगी आँचल में अपने रूहानी,
    बहन ने राखी भी तोड़ी हाथ से तब
    ना रहा भाई ना भाई की निशानी,
    प्रिया ने सिंदूर पोछा मांग से फिर,
    खेली होली वार के सिंदूरदानी,
    बेटी बोली गर्व है बाबुल पे अपने,
    डर सताता व्यर्थ ना जाये बलिदानी,
    दान कर आया वो रण में जान अपनी,
    कहलाता जो कुछ रोज़ में कन्या का दानी।।।
    जला दीप सड़कों पे निकलें,
    क्या यही हर बार होगा?
    चंद दिन का रोष ,
    फिर कुछ ना किसी को याद होगा,
    एक मौका दो जवानों को हमारे देश के,
    ना "मसूद" होगा और ना ही पाकिस्तान होगा,
    सेना के हाथों में पहना दी सियासी चूड़ियाँ,
    बाँट दी बंदूकें फिर क्यों गोलियों पे बेड़ियाँ,
    सौंप दो अब देश को हाथों में वर्दी वालों के,
    चीर देंगे घुसके अंदर पाकिस्तानी भेड़िया।।।।
    ©vaibhavpasrija

  • vaibhavpasrija 145w

    Love(2)

    कुछ यूँ याद आती,वो बातें तुम्हारी,
    मुलाकात पहली,और आँखें तुम्हारी,
    शोखी थी उनमे,और कुछ नमी भी,
    वैसे था पूरा,बस इनकी कमी थी।
    खुदा ने था तुझको,मेरे लिए ही बनाया,
    न किस्सा न राबता,फिर भी था मिलाया,
    पास आकर जब तूने ,गले से लगाया,
    मेरे लब हँसे थे,दिल मेरा था भर आया।।
    वो मुस्कान तेरी, बन गयी जान मेरी,
    गर जो टपके थे आँसू,तब गयी जान मेरी,
    थे तेरे लिए, वो आँसू बस पानी,
    है मोती सी कीमत, नहीं तूने जानी,
    बचा के ये मोती, मेरी पलकों पे सजा दे,
    बना ले तू अपना, और दिल में जगह दे,
    ना तोडूंगा इसको, है ये वादा मेरा ,
    अबसे आधी तू मुझमे,और मैं आधा तेरा।।
    ©vaibhavpasrija