utkarsh007

i write even when everything's okay.

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Reposts
  • utkarsh007 63w

    फिसल गई तुम ज़िन्दगी से,

    मानो हाथो से रेत ।

    तुम्हारे बिना सूखा है आसमान मेरा,

    और रंग उसका श्वेत,

    ©utkarsh

  • utkarsh007 63w

    फिर कलम उठाई है,

    लगता है फिर कोई आफत आयी है,

    पुछता मुझसे मेरा खुदा है,

    क्योंकि फरिश्ता उसका अब मुझसे जुदा है ।

    गलत मत समझना दुखी नही हूँ मैं,

    बस सबसे अलग और सही हूँ मैं ।

    ©utkarsh

  • utkarsh007 94w

    कर रहे है तैयार खुदको,
    तेरे हिसाब से,

    फर भी छूट रहा है,
    आधा पौना तेरे नाप से ।

    ©utkarsh007

  • utkarsh007 95w

    बा मानी शोर
    या मुसलसल सन्नाटा
    मेरे सवालो का मेरे जवाबो से
    सिर्फ इतने का नाता ।

    ©उत्कर्ष

  • utkarsh007 99w

    सोनल

    बेफिक्र उसकी डगर
    युही चल दिया मैं

    जैसे,

    बेबाक उसकी नज़र
    में हर पल जिया मैं ।

    ©उत्कर्ष

  • utkarsh007 99w

    ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नही है,

    और क्या जुर्म है पता ही नही है ।

    इतने हिस्सो में बट गया हूँ मैं,

    मेरे हुस्से में कुछ बचा ही नही है ।

  • utkarsh007 101w

    Tum purane khayalo jaisi,

    Main daur aaj ka Hoon.

    Tum mushkil sawaalo jaisi,

    Main befikr taur aaj ka Hoon.

    ©utkarsh007

  • utkarsh007 111w

    हर कदम चलते ही,

    बढ़ता मुझपे उसका कर है,

    आज ईंट से ईंट जोड़के मेरी,

    वो खुद बेचारा बेघर है ।

    ©उत्कर्ष

  • utkarsh007 116w

    क्या गलत क्या सही,

    इसका क्या पैमाना है,

    अपनी हट मनवता,

    पूरा ज़माना है ।

    ©उत्कर्ष

  • utkarsh007 122w

    ऊसुलो पे अगर आंच आए,

    तो टकराना ज़रूरी है,

    ज़िंदा अगर हो,

    तो ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है ।