unrealheterodox

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Only a moment yet not of it...

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Reposts
  • unrealheterodox 1w

    अभी इस तरफ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ
    मेरा लफ़्ज़-लफ़्ज़ हो आईना तुझे आईने में उतार लूँ।
    ~बशीर बद्र

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    ......

    तन्हा रात मुँह फेर के हाए किसी का कहना!
    हम न मानेंगे, न मानेंगे किसी का कहना।


    एक दुश्मन है कि तुम सुनते हो उसका कहा
    एक मैं हूँ जो कभी होता नहीं मेरा कहना।


    दिलरुबा कहती है ऐ यार दुलारी कहो मुझे
    एक तो नाम हैं दो, फिर तुम्हे क्या-क्या कहना?


    हम मनाते हैं तुम्हें ऐ हसीना मान जाओ
    मान लो, मान लो ऐ जान हमारा कहना।


    मुझको एक जाम पिला के ये कहा मेरे यार
    हो अगर और ज़रूरत तो दोबारा कहना।


    दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-जिगर देखता जा ऐ हमनशीं!
    क्या कहा, क्या कहा फिर कहना दोबारा कहना।


    जो बुरा कहते हैं कहने दो उन्हें ऐ दोस्त
    हक़ तो ये है कि मेरे हक़ में है अच्छा कहना।
    ©unrealheterodox

  • unrealheterodox 2w

    क्या इज़ाज़त है एक बात कहूँ
    वो...मगर खैर कोई बात नहीं।
    ~जॉन एलिया

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    ......

    अब वो ज़ुल्फों सी महकी हुई रात नहीं
    बात क्या है कि अब वो बात नहीं।


    आँखें थकती नहीं अब सुबह की तरह
    रात है और जैसे कोई रात नहीं।


    बातों से अपनी तुम मुकर जाती हो
    ख़ैर जाने दो कोई बात नहीं।


    दिलों का किस्सा किया आँखों से शुरू
    ये इश्क़ है कोई वारदात नहीं।


    आए, रहे और फिर चल दिए!
    ये दिल है कोई 'गुजरात' नहीं।
    ©unrealheterodox

  • unrealheterodox 2w

    ......

    निगाहों से फ़लक को इशारा तो करो
    जन्नत से कोई सितारा हमारा तो करो।


    मौसम जवाँ हुआ है बहारों के नूर से
    बाहों में बाहें डालकर नज़ारा तो करो।


    तन्हाई की रातों में अब हमसे शर्म क्या
    कबायें ख़ामोशीयों की उतारा तो करो।


    दिल अजीब है तुम्हारे दर से लौटेगा नहीं
    इस एहतियात से कभी पुकारा तो करो।


    ये जाँ तुम्हारी नज़्र है चाहे तो जान लो
    ये दिल तुम्हारा घर है सँवारा तो करो।
    ©unrealheterodox

  • unrealheterodox 5w

    @rudramm @toshuu @sanil_thakur @saloni_04

    मेआर - दर्ज़ा, पद
    तरदीद - खंडन, काटना

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    ......

    यूँ तो महफ़िल में अक्सर, नहीं बोले
    जब बोले हैं मेआर से गिरकर,नहीं बोले।

    कहने को तो हर एक बात छुपाई गयी उनसे
    बोेले हैं हम मगर कभी खुलकर,नहीं बोले।

    दुनिया ने कहीं उनकी कोई बात सुनी है!
    चढ़ के जो कभी दुनिया के सर,नहीं बोले।

    नदियों की कुर्बानी का गिला किसको है भला!
    नदियों की हिफ़ाज़त में समंदर,नहीं बोले।

    आईना टूटने का शोर जो गया फ़लक पर
    जो तोड़ने वाले हैं वो पत्थर नहीं बोले।

    बेजान राहों के सन्नाटों की तरदीद करेगें!
    सरेराह जो होके कभी हमसफ़र, नहीं बोले।
    ©unrealheterodox

  • unrealheterodox 5w

    ......

    The sun sits high,
    Unstitched in solar flare.
    Cologne dripping down my skin,
    Summer-beat pulsing the air.

    Melted in apathy, I can't eat, I can't sleep.
    Cerulean skies feign relief.

    As time suffocates in this heat.....
    ©unrealheterodox

  • unrealheterodox 5w

    ......

    दरिया की बे-पनाह रवानी से डर लगा
    साहिल पे बहते हुए पानी से डर लगा।

    चेहरा था या था कोई वहशियत का साया
    देखा जो आईना तो जवानी से डर लगा।

    सर दे के भी हम उसकी हिफाज़त न कर सके
    बीते हुए दिनों की निशानी से डर लगा।

    ख़ुद को सुनाने बैठे जो हम अपनी दास्ताँ
    इतनी अजीब थी कि कहानी से डर लगा।

    करके निसार आए ज़िन्दगी जो चंद साँसों में
    इतनी आसान थी कि आसानी से डर लगा।
    ©unrealheterodox

  • unrealheterodox 5w

    ......

    तुम अपने साथ मेरी नज़र भी ले जाओ
    सफर लम्बा है एक हमसफ़र भी ले जाओ।

    आँधियों में इन चराग़ों पर भरोसा कौन करे
    सजा के अपनी हथेली पे सर भी ले जाओ।

    स्याह रातों को सजाओ तुम नए उजालों से
    हमारा क्या है, हमारा सहर भी ले जाओ।

    मिलेंगें ज़ख़्म कितने इस ज़िन्दगी के मेले में
    तुम अपने साथ हमारा जिगर भी ले जाओ।

    ज़रा सी देर में ही उकता जाओगे इस जहाँ से
    तुम अपने साथ एक नई दुनिया भी ले जाओ।
    ©unrealheterodox

  • unrealheterodox 12w

    धरावतरण दिवस की बहुत बहुत बधाई आपको शेट्टी साहब। ����❤❤

    किंचित मैं व्यक्तिगत रूप से आपके व्यक्तित्व से अनभिज्ञ हूँ, किन्तु आपकी रचनाओं में परिलक्षित मार्मिक दर्शता एवं सार्वभौमिकता इस बात का प्रमाण हैं कि जीवन की कठिनाईयाँ, साकार एवं निराकार के मध्य स्थापित निहित अंतर को काव्यगत व्यक्त करने की प्रतिभा जो आप में है यद्यपि ही किसी में होगी।

    भाषा और व्यक्तित्व की मर्यादा का जीवित पर्याय हैं आप, आपके लेखों में भाषा की मधुरता हृदय में करुणा का भाव जागृत करती है, परिहास से परिपूर्ण विचारों का पिटारा जब कोई लेख का रूप धारण करके हम-सबके समक्ष आता है उसमें एक निःस्वार्थ अन्तर्मन की झलक मिलती है, इसी प्रकार अपने अद्वितीय लेखों से सभी को अवगत कराते रहिये।

    आशा करता हूँ आप सकुशल होंगी, पुनः आपको बहुत-बहुत बधाई जन्म दिवस की।
    @saloni_04

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    .

  • unrealheterodox 14w

    A Railway line from railway station
    comes straight to my heart,

    But the train always stops at a bridge.


    Some star after becoming an engine, keeps going.

    The moon also travels
    at a fireplace.

    No wonder why flowers
    keep changing colors.

    Hail's waving on leaves in the cold air

    A hidden bird sings soft songs.....
    _______________________
    @toshuu @rudramm @sanil_thakur @saloni_04 @sisira @rahul_govindan

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    The Invisible Rainbow

    ©unrealheterodox

  • unrealheterodox 14w

    ......

    ज़खीरा ख़्वाबों का सूरज के साथ रखना है
    धूप के परों पर एक स्याह रात रखना है।

    ज़बाँ जो खोलो तो न जाने क्या-क्या हो जाये
    मगर ध्यान रहे कहाँँ आँखों पे हाथ रखना है।

    अंजाम-ए-जंग के तो हम ही हैं सौदागर
    तुम्हारे हिस्से में भी तो एक मात रखना है।

    मुद्दतों से कुरेदा नही है रगों को अपनी
    इन् भरे जख़्मों को अब हमेशा साथ रखना है।

    आसमाँ ने ये कहकर भेजा कि ज़मीं तेरी है
    मगर हमें तो अब वो आसमाँ भी साथ रखना है
    ©unrealheterodox