unnati_writes

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listen to my poetries on YouTube now ��✌

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  • unnati_writes 21w

    To remain connected with me...see my bio ✌

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    I'm backing off now officially. It's been 2 years I've spent here and they were truly amazing. I made many friends here some being permanent.
    It was a nice experience here so if I change my mood I'll return
    Till then keep smiling and spreading love all around ✌

  • unnati_writes 23w

    My feeble poetries
    multiverse
    my torned
    scratched heart
    pieces!
    ©unnati_writes

    #multiverse #wod #pod

    200th post ✌

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    .

  • unnati_writes 25w

    भूख

    अपनी हथेली खोली मैंने    ;   एक सिक्का रखा हुआ था;
    जैसे भूखे किसी परिंदे को, रोटी का टुकड़ा मिल गया था।

    आँखों की चमक को मेरी  ;......     भला कैसे मैं छुपाता;
    नन्हे से हाथों से ही  ,.......            जब ख्वाब मैं बनाता।

    उसने देखा हाँ मेरे   ;........      छोटे से लबों की हंसी को;
    शायद भाँप गई वो   ,.......मेरे दिल की किसी तस्वीर को।

    लाख कोशिश की मैंने  ;.......     भूखा पेट मैं छुपा जाऊँ;
    आँखों की नमी से ही  ,.....अपनी प्यासी रात बुझा जाऊँ।

    उस एक सिक्के ने जैसे       ;.......   मेरी भूख मिटाई थी;
    उस दिन थाली अपनी मैंने    ,..... पकवानों से सजाई थी।

    पेट भरा मेरा तो मानो   ;   माँ ने प्यार से माथा सहलाया हो;
    घर भूल बैठे परिंदे ने कोई ,    फिर नया घोंसला बनाया हो।

    ©unnati

    Apni hatheli kholi maine; ek sikka rakha hua tha;
    Jaise bhukhe kisi parinde ko, roti ka tukda mil gaya tha.

    Aankhon ki chamak ko meri; bhala kaise mai chupata;
    Nanhe se haathon se hi, jab khwaab mai banata.

    Usne dekha han mere; chote se labon ki hansi ko;
    Shayad bhaanp gayi vo, mere dil ki kisi tasveer ko.

    Laakh koshish ki maine; bhookha pet mai chupa jaun;
    Aankhon ki nami se hi, apni pyaasi raat bujha jaun.

    Uss ek sikke ne jaise; meri bhuk mitai thi;
    Uss din thali apni maine, pakvano se sajai thi.

    Pet bhara mera to mano; maa ne pyaar se matha sehlaya ho;
    Ghar bhul baithe parinde ne koi, fir naya ghonsla banaya ho.
    ©unnati

  • unnati_writes 28w

    माटी का घड़ा

    उसने मिट्टी इक्ट्ठा कर माँ को दिखाते हुए कहा
    "माँ देखो मैने भी तुमसा एक घड़ा बनाया है!"
    उसके चहरे की चमक भांप माँ ने उसके नन्हे हाथ थामे
    और गीली मिट्टी को नाजुक पकड़ एक छोटी सी लुटिया बनाई
    वह भी अपने हाथों को गुदगुदा हँस पड़ा जब माँ ने कहा
    "ये ले तूने मुझसे भी उम्दा घड़ा बनाया है!"
    ©unnati_writes

  • unnati_writes 28w

    I've written a poetry based on the same story!
    It's a bit too long... if anyone interested in reading please let me know...I'll share it on mirakee.
    Shall I post it btw?
    Do comment down ��

    @writersnetwork @mirakee @writersbay

    Anyone interested reading??? ��

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    So This is Love
    What if Cinderella never tried on glass slippers?!
    A Twisted Tale
    Written by - Elizabeth Lim

  • unnati_writes 28w

    ����

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    Kuchh yaar mile purane aaj
    Ke ab jinki yaad nahi aati thi!
    Haan
    Ek vaqt vo bhi tha jab
    Aankhon me paani ke saath
    Unhi ki baat yaad aati thi!
    ©unnati_writes

  • unnati_writes 29w

    Yunhi ��

    @hindiwriters

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    कहो क्या कहूँ उस चाँद से जो थोड़ी देर ठहरकर
    मुझे तुम्हारा चेहरा दिखाने लगता है
    कभी कुछ इठला कर बादलों में छिप जाता है
    तो कभी आँखों से ही अपनी वो
    मुझे छेड़ मुस्कुराता है?

    कहो क्या कहूँ उस वेग से जो छूती खुद है
    और तुम्हारा नाम लगा जाती है
    कभी कुछ इतरा कर वो पत्तियाँ बिखराती है
    तो कभी शैतानी से वो
    तुम्हारे खत निकाल फैलाती है?

    कहो ना क्या कह दूँ उस शाम से
    वो रोज़ाना ना आया करे
    यूँ चाय की चुस्की संग गुफ्तगू कर ना जाया करे
    या आँखों में मेरी
    तुम्हारे ख्याल ना लाया करे?

    कहो...
    ©unnati_writes

  • unnati_writes 29w

    Kuchh bhi ��

    (padh kar gussa aaye to uske liye hum zimmedar nhi hain kripya apna gussa comment box ke alava kisi diwar pr nikalein ��)

    @hindiwriters

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    किसी शायर ने एक अजीबो-गरीब मोहब्बत की दास्तान लिखी है,
    इश्क करने वाले को सिरफिरा कहकर इश्कीया शहादत की शान लिखी है!
    ©unnati_writes

  • unnati_writes 30w

    किसी ने पूछ ही लिया उस चिड़िया से जो महीनो बाद नज़र आई थी
    क्या छुपी रहती हो आजकल, जो हर और महामारी छाई थी?
    सुनोगे उसने क्या कहा...?
    "जब तुम अपनो को पानी ना पिला सके तो मेरा पेट कहां से भरते!
    इसीलिए मैं खाने की तलाश में बहुत दूर निकल आई थी!"
    ©unnati_writes

  • unnati_writes 32w

    Hey Mirakeans,
    This is a personal post. I've recently started a new blogging page for my poetries and proses. If interested, please visit my page and encourage me write more poems and phrases and short stories and entertain you all.
    The link to my page is given in my bio.
    Do visit and share your love.
    Thank you