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  • tusharkumar 4d

    25-11-2021

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    मैं आज कुछ कहना चाहता हूँ..
    थोड़े दूर है पर साथ तेरे रहना चाहता हूँ
    संग तेरे लड़ना भी चाहता हूँ
    हमारे सपनो तक साथ बढ़ना भी चाहता हूँ
    पास हो इसलिए नही प्यार करता हूँ
    दूर भी होता हूँ तो तेरा ही इन्तज़ार करता हूँ
    देखो ना कैसा प्यार तुमसे में करने लगा हूँ
    तुझे खोने से एहसास से तक डरने लगा हूँ
    बातें किसी कहानी सी है पर जज्बात सारे सच्चे है
    तुम खुद ही सोचो साथ हम कितने अच्छे है।
    साथ हो हमेशा कभी बीच मे दूरी ना होनी चाहिए
    माना अधूरी है ये कहानी पर अब पूरी होनी चाहिए।
    ©तुषार कुमार

  • tusharkumar 1w

    International men's day

    #support #share #like #follow

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    आँसू भी आते है और दर्द उसे भी होता है
    नही दिखाता वो पर काफी कुछ वो खोता है।
    सपने उसके भी टूटते है...अफसोस उसे भी होता है..
    जाने क्यों कहते है ऐसा की मर्द नही रोता है?

    हालतों के आगे बेबस, झुकना उसे भी पड़ता है
    ज़िम्मेदारियों के बोझ तले रुकना उसे भी पड़ता है
    सबकी खुशी की खातिर लुटना उसे भी पड़ता है..
    समझ भी ना सके कोई ऐसा घुटना उसे भी पड़ता है।

    इन्तज़ार की कीमत वो अच्छे से जानता है
    जिससे जुड़ते है भाव उसे अपना मानता है
    तकलीफ में साथ कोई खड़ा हो या ना हो...
    हर किसी की अहमियत को वो पहचानता है।

    तकलीफों से जुड़कर मुस्कुराना भी होता है
    मर्द होना भी इतना आसान भी नही होता है।
    ©तुषार कुमार

  • tusharkumar 2w

    कभी मिलना हो तो बताना जरुर
    कभी सोचो हमें तो दिखाना जरूर
    कभी याद करो तो आना जरूर।

    छोड़ कर तुम गए हो...हम नही!
    खबर है हमें भी कि दुःख अब भी कम नही।

    कभी हो अकेले तो पास बिठाना जरूर
    कभी आँखे बरसने लगी तो हँसाना जरूर
    कभी ख्याल आये तो जताना जरूर।

    टूट गए थे इसलिए जाना पड़ा..मानता हूँ
    अभी तक नही जुड़ पाए यह भी जानता हूँ।

    कभी मुझ से सवाल हो तो आना जरूर
    कभी शिकायत भी तो सुनाना जरूर
    कभी निभा सको तो रिश्ता बनाना जरूर।

    दूरी है यह जानकर भी इन्तज़ार है तुम्हारा
    इतनी आसानी से खत्म हो ऐसा रिश्ता था नही हमारा।
    ©तुषार कुमार

  • tusharkumar 3w

    9/11/2021

    उत्तराखंड दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं��

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    उत्तराखंड

    है चार धाम तुझमें... है मेरा काम तुझसे
    दूर जितना मैं चला जाऊं... है मेरा नाम तुझसे।
    धन्य होते है वो जो जन्म लेते है ऐसी देवभूमि में
    हर किसी को धरती में जन्नत नसीब नही होती।
    है दो भागों में बंटा तू..
    पर कुमाऊँ और गढ़वाल दोनों एक है।
    हर किसी के लिए तेरे रूप ही अनेक है....
    है सरयू, गोमती, और कोसी की कल-कल तुझमें...
    होता भक्ति का संगम, पल-पल तुझमें।
    तेरी गोद में, तेरे आँचल में, पल कर जो बड़ा है...
    क्या विडंबना ऐसी की दूर तुझसे खड़ा है?
    शायद यही वक़्त का होता फेर है...
    औरों के लिए यह संस्कृति और उसके लिए अंधेर है।
    हाँ, माना कि सुविधाओं का तुझमें थोड़ा अभाव है..
    पर तुझमें ही बसते ना जाने कितने गाँव है...
    तू सर्दियों की धूप है, तुझमें ही गर्मियों की छावं है।
    तेरी हवाओं में उमंग, तेरे पहाड़ो में जोश, तेरी संस्कृति ही तो हमारा श्रृंगार है,
    फिर भी छोड़ कर तुझे जाते लोग क्योंकि पैसों से उनको प्यार है।
    तुझमें जन्मे कितने देश की रक्षा के लिये खड़े है...
    तेरा नाम रोशन करने बहुत आगे तक बड़े है।
    जो छोड़ कर तुझको गया है...
    उन सब से मुझे इस इतना सा ही कहना है....
    अगर देवभूमि उत्तराखंड को छोड़ कर भी रहना है तो क्या रहना है.........
    ©तुषार कुमार

  • tusharkumar 10w

    22-09-21

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    हाँ, हर जेठालाल को एक तारक मेहता चाहिये..
    जो उसे उस जगह रोके जहाँ वो गलत हो..
    जो उसे उस वक़्त अकेले ना छोड़े जब वो अकेला हो।
    जो उसे तकलीफ में तस्सली नही साथ दे...
    जो उसे गिरने से पहले ही अपना हाथ दे।
    जो उदासी देख कर कारण ना पूछे और हँसाने की कोशिश करें...
    जो उसकी मुस्कुराहट की वजह भी हो..
    जिसके लिए उसके दिल मे ढेर सारी जगह हो।
    जिससे खून का ना सही दिल का रिश्ता हो..
    जो बिल्कुल आयने सा हो..जो साथ रोता और हँसता हो।
    ©तुषार कुमार

  • tusharkumar 11w

    इन्तज़ार

    कुछ लोग किसी एक मे बसता संसार लिखते है
    मेरे जैसे कुछ ही होते है जो यह इन्तज़ार लिखते है।

    जिनके पास मनाने को होता है वो हर त्योहार लिखते है
    मेरे जैसे कुछ ही होते है जो सिर्फ इन्तज़ार लिखते है।

    जीत तो सब लिखते है बस कुछ ही अपनी हार लिखते है
    मेरे जैसे कुछ ही होते है जो जीत का इन्तज़ार लिखते है।

    मुश्किल से हो पाता है जो वो तक अपना प्यार लिखते है
    मेरे जैसे कुछ ही होते है जो प्यार का इन्तज़ार लिखते है।

    यह बस्ती उजड़ती दुनिया में सब मिलकर संसार लिखते है
    किसी के बिना रह पाना कैसा है हम इसका इन्तज़ार लिखते है।
    ©तुषार कुमार

  • tusharkumar 12w

    5-09-21

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    सच तो यह है कि कहा नही जाता है...
    बिन तेरे अब रहा नही जाता है।
    दूरी है जितनी भी सहा नही जाता है...
    बिन तेरे अब रहा नही जाता है।

    कहानी है अधूरी मेरी..मैं जानता हूँ
    तू बहुत जरूरी हिस्सा है मैं मानता हूँ
    कोशिश की तो भूल जाने की तुझे...
    पर नही हो पायेगा, मैं खुद को इतना तो पहचानता हूँ।

    माना प्यार की डोर हमारी थोड़ी कच्ची है..
    देख मुमकिन नही है साथ हमारा बात सच्ची है।
    पर कौन कहता है हम साथ हो नही सकते...
    इस प्यार से ज्यादा हमारी दोस्ती अच्छी है।
    ©तुषार कुमार

  • tusharkumar 12w

    "दोस्ती" सबसे बड़ी होती है। एक अच्छा और सच्चा दोस्त मिलना किस्मत की बात होती है और अगर आपके पास कोई है जिसे आप अपना सबसे अच्छा दोस्त कहते हो तो कोशिश करना यह दोस्ती हमेशा के लिए रहे।��

    इस साल की इस "बारिश" का बहुत-बहुत शुक्रिया।

    अगली बारिश का इंतज़ार रहेगा.......


    @neehaa thanks for suggestion ��

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    बारिश -11

    बारिश कैसी भी हो... कभी जुदा कर देती है तो

    कभी मिला भी देती है...इस बारिश ने मुझे मिला दिया।

    उससे जिससे बिछड़ना मेरा या उसका फैसला नही था।

    दोस्ती दिल से होती है और दिल भले left में होता है...

    पर हमेशा right होता है...दोस्त बनाने से ज्यादा...

    एक अच्छा दोस्त बनने का try करो.. क्योंकि जैसा तुम चाहते हो...वैसा बन जाओ तो क्या बात है...

    खैर, दोस्ती में सब खास होता है..सच्चा दोस्त हमेशा आपके पास होता है।

    बारिश ने मुझे उससे मिला दिया जिसको मैंने कभी खोया ना था...

    लोग सच्ची दोस्ती तक में रोते है...कैसे कह दूँ मैं उसके लिए रोया ना था।

    गलतफेमियों से किसी को कभी खोना नही...और किसी अपने से दूर होकर किसी और का होना नही...

    चलो इस बारिश में भीग कर उससे तो मुलाकात हुई...

    बहुत अच्छा हुआ कि हम दोनों के लिए यह बरसात हुई।

    अब मिलते है अगली बारिश में.........
    ©तुषार कुमार

  • tusharkumar 12w

    2-09-21

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    बारिश -10

    और पहले की तरह हम भीग कर घर पहुँचे।

    मैं खुश था और वो बहुत खुश....

    एक बात बता तूने कभी मुझसे दोस्ती निभानी नही छोड़ी ना? उसने कहा।

    तुझे क्या लगता है? मैं इतनी आसानी से दोस्ती तोड़ सकता हूँ?

    और अपने दोस्त को ऐसे कभी अकेला छोड़ सकता हूँ?

    फ़र्क़ नही पड़ता कि दूर रहते है या बहुत पास रहते है..

    रिश्ते मेरे लिए हमेशा उतने ही खास रहते है।

    क्यों? तू मुझे याद नही करती थी? इतनी ज्यादा नाराज थी क्या?

    यार मैं क्या कहूँ... मैं दुःखी थी तेरा दिल दुखाकर..और तू भी तो चला गया था बिना कुछ बताकर...

    चल छोड़ अब नही इस बारे में बात होगी।

    क्या लगता है अब और भी बरसात होगी???
    ©तुषार कुमार

  • tusharkumar 13w

    बारिश -9

    चलो ठीक है...अब मैं चलता हूँ.. बारिश भी रुक गयी है।

    कल आओगे क्या मुझसे मिलने? क्यों? कल कुछ खास है क्या??.... अरे नही बस ऐसे ही...

    मैं निकल गया। याद है मुझे कल उसका जन्मदिन है....

    मुझे यह तो नही पता कि अब वो इसे कैसे मानती है पर जब हम सब साथ थे...

    तब हम इसको अनाथ बच्चों के साथ मनाते थे।

    और पिछले 5 साल से मैं अपनी दोस्ती कुछ इस तरह निभाता हूँ...

    उसका जन्मदिन अनाथालय के बच्चों के साथ मनाता हूँ।

    कल मैं उससे मिलने जाऊंगा..पर शाम को सुबह मुझे बच्चों के पास जाना है।

    अगली सुबह..उसके लिए पूजा कर..मैं जाने लगा।

    अनाथालय के पास एक मंदिर था..वो उधर आई थी।

    मैनें उसे नही देखा था..पर वो मुझे देख चुकी थी।

    मैं अंदर गया बच्चों को मिठाई दी...डांस गाना हुआ...और फिर मैंने उनके साथ मिलकर केक काटा...

    मैं केक सबको खिलाने लगा... उसके होते हुए भी अपने तरीके से उनका जन्मदिन मनाने लगा..

    कि तभी अचानक वो मेरे सामने आ गयी...उसकी चेहरे पर खुशी के आँसू और मेरे चेहरे पर हैरानी छाने लगी...

    मैं चुप था...तभी वहाँ की care taker बोल पड़ी...सर यहाँ हर साल अपनी best friend का जन्मदिन मनाने आते है...

    अपना पूरा दिन इन बच्चों के साथ बिताते हैं...

    इतना अच्छा दोस्त कोई होता है क्या?...काश हर दोस्त सर की तरह होता....

    उसके चेहरे पर अब ढेरों खुशियां छाने लगी.... इतना काफी ही था कि अब बारिश भी आने लगी।
    ©तुषार कुमार