the_fussy_one

Just understand my profile picture Though not an open book But you'll surely get to know me just by those "three magical words" :)

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  • the_fussy_one 2w

    Dhund to sakte hain tumhare jesa koi aur
    Par yeh dil hai ki manta nahin

    Tumhare piche aane ka dil krta hai
    Par yeh dimag hai ki sath deta nahin

    Un khubsurat si yadon ke bich jeena chahti hun
    Par wahin kho jane ka dar chain se jine deta nahin

    Kabhi sath me chalun, kabhi alvida keh dun
    Is gaflat me hi gum ho jaun, yeh mujhe manzur nahin

    Pyaar ki kami nhin meri zindagi me
    Maa-baap, bhai-behen, dost, sab hain is safar me kahin

    Tumhara sath hota toh char chand lag jata
    Khair, dur jo hue ho tum is kadar
    Laut aane ki tamanna ko dhwast kar diya hai ab
    Jao khush raho tum apni zindagi me
    Kuch apne hain abhi meri bhi zindagi me.

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    Rishton ka tutna

    ©the_fussy_one

  • the_fussy_one 2w

    Ham jante hai ap nasib nhi ho humare
    Yeh bandhan ko jodna
    Aur akhir me nibhane se muh fer lena
    Na hame manzur hai
    Na humara dil chahta hai
    Par dil sirf ek sawal puchta hai
    Jb is mod pe aake khada krna tha
    Hamare rasto ka alag hona tha
    To yeh safar krwaya hi kyun
    ©the_fussy_one

  • the_fussy_one 2w

    Yeh jo faisle kiye the tumne
    Faaslo ko badha gaye
    Tum yun hi guzar gaye humari nazron se
    Aur hum dekhte reh gaye
    ©the_fussy_one

  • the_fussy_one 2w

    उस रात बारिश हुई
    हल्की-हल्की बूंदें हमें भिगा गई
    उन ठंडी हवाओं का रुख हमारे तरफ था
    क्या कुछ कहना चाहती थी?
    सोचने पर मजबूर हो गए थे हम

    पानी से लथपथ सड़कों पर
    अजीब सन्नाटा सा छाया हुआ था
    हम चल रहे थे मग्न होकर
    जीवंत नज़ारों को निहार कर
    क्या हमें किसी बात का डर नहीं था?
    सोचने पर मजबूर हो गए थे हम

    स्कूल का बस्ता लेकर चलते हुए
    कागज़ की नाव को तैराते हुए
    उन बच्चों के चेहरे पर अलग ही उत्साह था
    चंद रुपये के चीज़ों से ही खुश होकर
    हँसते-खेलते, तनाव को पीछे छोड़ते
    बस बड़ते चले जा रहे थे
    क्या हमारा बचपन वाकई पीछे छूट गया था?
    सोचने पर मजबूर हो गए थे हम

    गर्म-गर्म चाय पीकर
    पकोड़े का मज़ा ले कर
    आज जम के भीगे पुरानी यादों मे
    आँसुं छलक पड़ा उन यादों के साथ
    पर छुप-सा गया बरसात में आज
    शायद बारिश इन्ही यादों को जगाना चाहती थी
    बहुत कुछ कहना तो चाहते थे हम
    पर खैर छोड़िये, किसी और दिन

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    बरसात का मौसम

    ©the_fussy_one

  • the_fussy_one 2w

    तेरी परछाई से ही,
    मुझे छाव मिली है
    कभी साथ न छोड़ने वाली हमदर्द मिली है
    हज़ारों की भीड़ में मुझे साहिल मिली है
    अब तन्हाई तो ना जाने कहाँ गुम है
    ऐसी मुझे चाहने वाली मिली है
    ©the_fussy_one

  • the_fussy_one 2w

    Kabhi kabhar zindagi ke sath khud ko badal lena chahie
    Zindagi jine ka maza doguna ho jata hai
    ©the_fussy_one

  • the_fussy_one 5w

    ख़ामोश सा लगने लगा है ये सफर मेरा
    ना मंज़िल का पता, ना रास्तों की समझ
    बह रही हूं मैं किसी दरिया की तरह
    किसी समंदर में मिल जाऊं, बस यही आसरा है.

    तरक्की, कामयाबी, हुनर
    मेरे हाथों की लकीरों में कहाँ
    दो पल की खुशी फिर अंधेरा और गम
    बस यही सोच मे हैं मशगूल हम.

    तमन्ना बहुत है मेरी कुछ कर दिखाने की
    पैसे कमाने की और सुकून से रहने की
    लोगों को उपर चढ़ता देख आदत सी हो गयी है
    पर ये चीज़ मुझमें कहीं खो सी गयी है.

    ढूँढना चाहती हूं बड़े सुकून से
    पर बे-सुकूनि का आलम हो रखा है
    कोई हो समझाने वाला तो बताए मुझे
    क्या खता हुई जो इस कदर हैं हम.
    ©the_fussy_one

  • the_fussy_one 33w

    Dodging life's battles is an easy thing to do
    But still, there's a possibility of stumbling on it and making things worse
    So, it's better to face it till the end
    You'll either make it through or remain short of it
    But there won't be any guilt that will come biting at you.
    ©the_fussy_one

  • the_fussy_one 34w

    दहेज

    एक पिता ने अपनी बेटी का हाथ आगे बढ़ाया

    हाथ थामने से पहले उसने चार चीजें मांग लिया

    उन चीजों से एक बेटी को तोला जा रहा था

    वो बेटी जो पिता की सबसे कीमती अमानत थी

    पर उसे लड़के वालो का हक़ बताया जा रहा था

     

    ये कैसा हक़ है मैं जानना चाहती हूं

    जिसमे काग़ज़ के वो नोट

    शादी जैसे पवित्र बंधन से बढ़कर हो गया

    जिसमे बेटी को रुखसत करना

    एक लेन-देन के माहौल में आ गया

     

    कहते हैं हम बड़े-बुज़ुर्गों से बहुत कुछ सीखते हैं

    पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का पालन करते हैं

    पर ये परंपरा कहां तक जायज़ है

    जिसे निभाने का बोझ दूसरों के कंधों पे डाला जाता है

    जिसे ना निभा पाने पर यूं ठुकरा दिया जाता है

     

    गर्व से दहेज को मांगना

    और पिता का ख़ामोशी से स्वीकारना 

    समाज कब तक इसे लड़के वालों का अधिकार बताते रहेगी

    बेटी को दुल्हन बने देखने की ख़ुशी का

    यूं मोल-भाव ना करें

    क्योंकि उनके दूर जाने का ग़म ही असीमित होता है

    उन्हें इस कदर पाबंद ना करें ।
    ©the_fussy_one

  • the_fussy_one 43w

    Yeh zamana jo hamari khamiyan ginata hai
    Jo agar khud aayine me dekh le
    toh manzar hi kuch aur hoga.
    ©the_fussy_one