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  • tengoku 38w

    Thirteen Bruises
    Old


    I was born as a rotten flower,
    among the evergreen leaves.
    Neglected by the zeal of sun,
    burnt by the December breeze.

    I was told to portray stars,
    and conceal all my birthmarks
    Lie is worshipped everywhere
    so hide truth of your heart.

    I was taught how to hide
    melancholy in the keys of piano,
    and seeking pinch of warm hope
    lost in the handful of snow.

    I wove lullabies for my pain,
    when I was thirteen bruises old.
    I was always asked to smile after
    killing every inch of my soul.

    and when my breaths writhed,
    oozing with agony all alone.
    I was dreaming some verses
    where my actual home belong.

    I learned bleeding through ink,
    till my fingertips would all ache.
    Bare paper can hold heavy tears,
    that a shoulder can never take.





    -Ananya

  • tengoku 43w

    She and poetry,
    both are no different.
    She smiles, she bleeds,

    all at once.









    -Ananya

  • tengoku 44w

    Life is all about,
    how real you smile,
    how louder you laugh,
    and how beautifully you dance

    when you are in pain.








    -Ananya

  • tengoku 44w

    after heartbreak,
    darling treat yourself with some sunset and poetry in a wine glass.







    -Ananya

  • tengoku 44w

    WN, bhaisahab kuch zyada nahi ho gaya. Matlab kuch bhi.

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    I fear..

    I fear voids filling my pages,
    and no urge to write in my bones.
    I fear being afraid of nights and
    accompanying dark all alone.

    I fear no pain in heart to bleed,
    and my pen getting cold and numb.
    I fear fake smiles stuck on my lips,
    and tears caged in hollow lungs.

    I fear promises of forever,
    which end up in the grave of rhymes.
    I fear screams of love hidden in the
    soothing wind chime of lies.

    I fear loving people who left me,
    in the middle of life, alone the way.
    I fear reminiscing their gentle touches,
    and then dying for them every day.

    I fear shattering of syllables,
    and verses dying with autumn leaves.
    I fear rains without metaphors and
    seasons without brimming poetry.






    -Ananya

  • tengoku 44w

    हम हमेशा से सिर उठाकर क्लास में लेट घुसने वालों में से थे। वहीं तुम, फर्स्ट आने के बावजूद चुप चाप एक कोने में दुबककर बैठने वाले। कहां हम कैंची सी खुली ज़ुबान और कहां तुम शर्ट की सबसे ऊपर वाली बंद बटन। हम जितने बड़े राउडी, वहीं तुम उतने ही बड़े नर्डी। सारे कॉलेज में चर्चित रहते तो दोनों ही थे। बस फर्क इतना सा रहता था कि तुम होशियारों की लिस्ट में सबसे ऊपर और हम, खैर जाने दो अब उस बात को। दोनों का ही कोई दोस्त नहीं था। हम सो-कॉल्ड फ्रेंड्स से घिरे रहते और तुमसे तो दोस्ती करने के काबिल कोई था ही नहीं।
    दोनों ही आखिरी सीट पर बैठते थे। हमारी सीट तुम्हारे सीट से बिल्कुल लगके थी, पर शायद ही पहले सेमेस्टर तक हमने आपस में कभी आई कॉन्टैक्ट जैसा कुछ किया होगा। हां, पर हम तुम्हें देखते ज़रूर थे। ज़्यादातर किताबों में घुसे। या खिड़की के बाहर ना जाने कौनसे बादल को देखते हुए। बिना किसी सुध-बुध के।

    उस दिन भी महिमा मैम के अटेंडेंस लेते वक़्त तुम अपनी ही दुनिया में लीन थे। मैम के तुम्हारा रोल नंबर दो बार बोलने के बावजूद भी जब तुम्हारा ध्यान ना पड़ा तो हमने बिना कुछ सोचे ज़ोर से प्रेज़ेंट मैम चिल्ला दिया। बस इतना ही होना था कि सारी क्लास हमें ऐसे घूरने लगी जैसे हमने कौनसी बड़ी गाली सबके सामने दे दी हो। और तुमने भी हड़बड़ाकर एकदम से हमारी तरफ देखा। मैम ने चश्मा उठाकर तुम्हे एक पल को देखा, और फिर सब नॉर्मल हो गया।

    दो प्रैक्टिकल क्लास के बीच में बीस मिनट का ब्रेक हुआ करता था। जब सारी क्लास बाहर कैंटीन में होती थी, सिवाय तुम्हारे। पर उस दिन किसी वजह से हम भी रुक गए थे। अब किस वजह से, वो हमें याद नहीं।

    "थैंक यू।" तुमने धीमी आवाज़ में कहा।
    "हम? हमसे कुछ कहा क्या?"
    "हां, तुमसे ही। थैंक यू।"
    पता है? तुम्हारी आंखें भूरी हैं, ये उसी वक़्त पता चला। जब पहली बार तुमने सीधा हमारी आंखों में देखा था।
    "किस लिए भला?"
    "अरे वो अटेंडेंस के लिए।"

    #tengohindi

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    "वैसे तुम देख क्या रहे थे बाहर?" तुमने शायद सिर्फ वेलकम एक्सपेक्ट किया था।
    "अरे वो...तुम्हे पता है? वो सामने एक शीशम का पेड़ है। उस पर ना एक बुलबुल ने घोंसला बनाया है। उसके तीन बच्चे हैं। वो इतने प्यारे हैं की क्या ही बताएं।" इतने सारे शब्द एक साथ कहते हुए हमने तुम्हे पहली बार देखा था। अचानक से हमें चुप देखकर तुम्हे भी इसका एहसास हो गया।
    "किधर?" थोड़ी देर बार हमने जिज्ञासा से पूछा।
    तुम थोड़ा मुस्कुराए फिर खिड़की में से पेड़ के एक कोने की ओर इशारा कर दिया। हमारी गर्दन ठीक तुम्हारी उंगली के साथ साथ पेड़ की ओर चली गई , और नज़रें घोंसले पर।
    बाकी के बचे कुछ मिनट दोनों बाहर पेड़ पर ही देखते रह गए।

    उस दिन के बाद से हमने भी ब्रेक में बाहर जाना बंद कर दिया। नोट्स या डाउट्स के बहाने थोड़ी बात कर लिया करते थे तुमसे। तुम्हारी आंखों ने कभी इनकार नहीं जताया तो हमने भी संकोच नहीं की।
    क्लास के लड़कों के देखने पर हमें उतना ही बुरा लगता था जितना तुम्हारे ना देखने पर। ट्रुथ देयर में "हु इज़ योर क्रश?" जैसे बेकार से पर्मानेंट सवाल पर हर वक़्त तुम्हें देख "नो वन" कहकर हंस दिया करते थे।
    पर तुम शायद क्रश से भी कई ज़्यादा थे। तुम्हे देखते ही ना जाने क्यूं ज़ुबान लड़खड़ाने लगती थी। कुछ का कुछ बोलने लगते थे। तुम्हारे सामने तो अपनी इमेज एक बेवकूफ पागल लड़की की बना रखी थी।

    खैर, दिल की बात कभी बोल नहीं पाए हम तुमसे। रिजेक्शन से काफी डर लगता हमें। ऊपर से सुन और देख रखा था, प्यार को ज़िंदगियां बर्बाद करते। अगर बाय चांस तुम हां कह देते तो?
    अब जो भी है, ठीक ही है। जाने दो।
    ऐसे ही क्या पता कितने ही दो तरफा प्यार रिजेक्शन, या यूं कहें कि प्यार के डर से एक तरफा होकर ही रह जाते हैं।
    सच कहें तो बड़ा ही खूबसूरत होता है ये। बिना प्यार का इज़हार किए, किसी से बेशुमार प्यार करना और उसको इसकी भनक तक ना लगने देना।
    बस फर्क इतना सा रहता है कि दो तरफा में दो ज़िंदगियां बर्बाद होती हैं, और एक तरफा में सिर्फ एक।



    -अनन्या

  • tengoku 44w

    You left my home,
    and suddenly I was homeless.









    -Ananya

  • tengoku 45w

    If I ever write a letter to you again,
    is it still okay to write yours before my name?









    -Ananya

  • tengoku 46w

    WN, are you comedy me?

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    Unsaids of dead

    And soon I'm going to weave wings to my soul,
    when I would be a poem, and they call me dead.
    No, don't look at this body, this clay of sin with grace
    just wrap me with a cloth made up of my unsaids.

    My eyes seem close but I could see through my soul,
    so don't shed fake tears, don't weep sympathy on me.
    I have always been the slave of bitter truths so,
    don't make shelter of your sweet lies in my eulogy.

    My naked skin is alive yet, let it recite my story,
    don't decorate me with those fake lilies and stars.
    Sprinkle peace instead of holy water on me and put
    dandelions I've made, from my bruises and scars.

    Leave my corpse alone in my castle called coffin,
    don't cage even a single bit of me in bottle of memory.
    Dig six pages instead of digging six feet in soil so,
    I'd be still alive in some line, in some unwritten poetry.

    Make your heavy guilt sleep beside my hollow chest,
    fill all the empty space with my mistakes and sins.
    Don't leave anything to remember with sigh later,
    just think I don't exist anymore, like I've never been.






    -Ananya

  • tengoku 46w

    Somewhere,
    all writers wish for an empty mind,
    some old brandy and a silent incomplete
    prose,

    to sleep on.







    -Ananya