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Reposts
  • tengoku 5w

    WN, dhatt natkhat noty boi.

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    and when she is gone
    with your cold days on her spine,
    all you're left with is, warmth of her wings
    and feathery quills underneath
    your trembling feet.




    -Ananya

  • tengoku 16w

    As I always say, you're special. For me, for Mirakee and for everyone else. I'm so glad that I've a friend like you. We don't talk much but whenever we do, it never feels like we ain't good friends :"))

    Happiest birthday ♡
    @thunderclap
    #HBDP

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    Sangfroid

    She is fragile like a human heart
    but strong like the spine of a book.
    She is the chaos of the ocean depth
    and sangfroid in a babbling brook.

    She is far away among the stars, but
    seems close to you like phosphenes.
    She can't be touched with bare hands
    but can be fathomed in naked poetry.

    Her bones are made up of haiku
    and sonnets' blood run in her veins.
    She is the dance of summer wind and
    songs sung by the earth when it rains.

    She is loud like ear piercing silence
    while she speaks the tongue of peace.
    She is the cool shelter under tree and
    the warmth in the December breeze.

    She fights like roaring waves of ocean
    but she loves like the moon to the night.
    She owns the whole world, and everything
    belongs to the universe in her eyes.




    -Ananya

  • tengoku 22w

    #tengohindi
    जी में आता है तेरे दामन में सिर झुकाए हम, रोते रहें, रोते रहें।

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    पता है, अरसा हो जाता है लेखकों को रोए हुए। कविता में नहीं, आंखों से रोए हुए। कितना साहस का काम होता है लिखना। और उस साहस को जुटा पाने के लिए पहले खुद टूटकर बिखरना पड़ता है।
    पर कभी कभी हारकर हम इतना थक जाते हैं की लिखने से कई ज़्यादा आसान एक बेबस लाचार इंसान की तरह रोना लगता है।
    मन उब जाता है कलम, स्याही और अकेलेपन से। खीजकर कई बार पेन की नोक टूट जाती है और पन्नों में छेद हो जाता है।

    आखिरी बार तुम्हे दूर जाते देखकर, हमारे गले की टीस कब रिसकर आंखों से बहने लगी इसका कुछ पता ही नहीं चला। उस वक़्त लगा था तुम्हारा हाथ पकड़ कर रोक लें, कहें, चलो ना फिर से शुरू करते हैं और इस बार कोई गलती नहीं होगी।
    पक्का।
    पर तब तक तुम काफी दूर जा चुके थे। और अच्छा ही हुआ की तुमने पीछे मुड़कर नहीं देखा, वरना हमें रोते देखकर क्या सोचते हमारे बारे में भला? लगता कि हम कमज़ोर हो गए हैं तुम्हारे बिना। सच में हो गए हैं क्या?

    हमारे में से कुछ टूटकर गिरा था उस दिन, आवाज़ बहुत हल्की सी आई थी। पर भीतर खोखलापन इतना भरा हुआ था कि आज भी चीख सी गूंजती है।
    और पता है, शांति इन आवाजों को उग्र कर देती हैं। अकेलेपन में काटने को दौड़ती है। फिर लिखने के बहाने तुम्हारे गोद में सिर रखकर, तुम जा चुके हो ये भुलाने की कोशिश करने के सिवा और कोई चारा नहीं बचता है।

    अच्छा सुनो ना, रिहा करदो हमें अब इस सबसे। लिखना कठिन होता जा रहा है अब। और ना लिखो तो दम घुटता है। तुम्हारे जाने के बाद, तुम्हे खुदके इतना करीब रखना और कुछ नहीं पर सिर्फ हमारा मोह है।
    और तुम्हे कलम से छूकर अमर कर देना हमारा स्वार्थ।


    -अनन्या

  • tengoku 22w

    बारिशों में बरामदे की ठंडी फर्श पर बैठकर, तुम्हे हमारी हाथों कि लकीरों को तराशना बहुत अच्छा लगता था। हर बार, लकीरों में खुदको देखकर तुम हल्का सा शरमाते थे और बस, हमारा दिन बन जाता था। लेकिन हां, तुमने हमें कभी बताया नहीं की तुम्हे बिजली की आवाज़ से डर लगता है। पर जैसे ही बिजली कड़कती थी, तुम्हारे हाथ हमारी हथेली को ज़रा कसकर पड़ लिया करते थे। हम भी दुबककर तुमसे लग जाते थे और तुम्हारा डर हमारा हो जाता था।

    तुम कहते थे, हमारी आंखों में तुम्हे खुदा दिखता है। शायद इसीलिए तुम्हे हमारी बातें सुनने से ज़्यादा, हमें निहारना भाता था। बिना किसी रोक-टोक के। और इसका एहसास हमें तब होता था जब हम सारी बात कर चुके होते थे।
    "सुन भी रहे हो तुम हम तबसे क्या कह रहे हैं?"
    तुम धीरे से आंखों पर आए हमारे बालों को कान के पीछे करते और हल्का सा मुस्कुराते थे। जैसा चांद को थोड़ा और करीब से ताकने के लिए खिड़की पर लगे पर्दे को सरका रहे हो।
    "हां बाबा सब सुना"
    "अच्छा जी! क्या सुना?"
    "वहीं जो तुमने कहा"
    "हां तो हमने क्या कहा?"
    "तुमने कहा कि हम तुम्हारे और तुम हमारी।"
    "कुछ भी? जाओ हम नहीं करेंगे अब से बात!"
    "ओफ्फो!"
    फिर कुछ घंटों तक हमारा रूठना और तुम्हारा मनाना चलता था। लेकिन हां, तुमने हमें कभी ये नहीं बताया कि हमारी आंखों में तुम खुदको भी देखा करते थे। हमारी आंखों के खुदा होने का अर्थ है, उनमें तुम्हारी झलक दिखना। सिवा तुम्हारे खुदा पत्थर मात्र है।

    खैर अभी तो बहुत सी यादों को उड़ेलना बाक़ी है, अभी तो हमे तुम्हे और भी लिखना बाक़ी है।

    अच्छा सुनो ना, हाल ही में एहसास हुआ कि तुमने कितना कुछ छुपाया था हमसे, नहीं बताया कभी। आज जब उस छुपे हुए को ढूंढने, लिखने बैठते हैं तो खुदको थोड़ा और बारीकी से जान लेते हैं। मानो जैसे तुम्हारी खोज में निकलें हों और रास्ते में खुदको पा लिया। आज कल तो फुर्सत से बैठकर खूब रोते हैं उसके साथ, पर कभी नज़रें नहीं मिला पाते उससे।
    फिर अंत में उस छुपे खुदको तुम्हारे पास उसी मोड़ पर छोड़कर, वापस आ जाते हैं। तुमसे दूर, खुदसे दूर।



    -अनन्या

  • tengoku 22w

    Nestle your soul in my arms,
    press your lips against mine.
    Let this shattering cold world
    make sense once in a while.





    -Ananya

  • tengoku 23w

    कभी कभी हमारी आँखें घर की चौखट पर बैठकर घर की याद में रिस दिया करती हैं। आंसू से तर हुई हथेली अपनी मुठ्ठी में उस घर की महक को भरने में नाकाम हो जाती है। आखिर घर महकता कैसा था? ये सवाल दिमाग में आते ही, आम सी महकती उस कमीज़ की खुशबू इर्द गिर्द मंडराने लगती है। गर्मी की उस जलती हुई दोपहर में, जब सब सो जाया करते थे तब बिस्तर के नीचे बिछे आम के ढेर में से सबसे पका हुआ आम चुना जाता था, दोपहर की दावत के लिए। फिर घर के सबसे शांत कोने में किसी पुराने पेपर पर बैठकर, कमीज़ के पीला हो जाने तक आम खाया जाता था। रात को मां से चिपककर सोते वक़्त, माँ आम महक लेती थी और फिर अगली सुबह बाबूजी दो किलो और लाकर ठीक उसी जगह रख दिया करते थे।

    ये दीवारों की दरारें कितने किस्से और ये छत की सीलन कितनी बरसाते अपने भीतर छुपाए रहती हैं। दिल करता है किसी कागज़ की कश्ती पर बैठकर उन्हीं बरसातों में वापस लौट जाए जहाँ संसार की सारी खुशी एक पानी से भरे गड्ढे में समाई होती थी। बरसात के मेंढ़क को उछलता देखकर ना जाने कौनसा सुख मिलता था। कभी मोर का पंख तो कभी डेयरी मिल्क का सुनहरे रैपर किसी किताब के बीच दबा मिलता है तो लगता है, खुशी की परिभाषा पहले कितनी महीन हुआ करती थी।

    ठंड हमें आधी माँ की शॉल सी और आधी आग पर भुने हुए आलू मटर सी महकती नज़र आती है। स्कूल से आते वक़्त ठंडी हवा अपनी मुट्ठी में भरे लिया करते थे और घर आकर माँ के गालों पर सारा गुलाबी रंग उड़ेलकर दौड़ जाते थे। फिर वह मेरे पीछे भाग पड़ती थी और उसकी खिलखिलाहट की आवाज़ में हमारा घर हो जाता था।

    कहाँ गया वह घर? कितना रोने पर उसकी ओझल हुई तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी? क्या कभी वापस उस घर का आना, इस चारदीवारी में हो पाएगा? इन सवालों के साथ गालों पर चिपकी आंसू को निसहाय हथेलियों से पोछ दिया करते हैं। उन दिनों सा महकता था घर हमारा। वह महक अब किसी पल में नहीं रही।




    -अनन्या

  • tengoku 29w

    "वी कैं स्टिल बी गुड फ्रेंड्स। नो?" जाते जाते तुमने ठीक ऐसा ही कहा था ना? सिर तो धीरे से हमने भी हां में हिला दिया था पर सच कहें तो अब हम अजनबी होना ज़्यादा पसंद करेंगे। ऐसे अजनबी जो एक दूसरे को थोड़ा बहुत जानते हैं। ऐसे अजनबी जो एक दूसरे को कभी कभी याद करके रो लिया करते हैैं, शायद।
    दोस्ती प्रेम की चौखट होती है। और प्रेम से निकालने के बाद इस चौखट पर ठहर जाना, बर्बादी का दूसरा नाम। बेहतर होता है चौखट के इस पार, अजनबी बनकर रह जाना। हालांकि अक्सर दोनों में से किसी एक को, अजनबी से मोहब्बत रह ही जाती है।

    "ओफ्फो! और कितनी देर?"
    "बस बस आ ही गए।"
    हमारे कमरे कि खिड़की से तुम अपनी बाइक पर साफ दिखाई दिया करते थे। हमें देखने की राह देखते हुए।
    हम भी जल्दी जल्दी बालों को बनाते, हल्का काजल लगाते और तुम्हारी फेवरेट छोटी बिंदी।
    तुम्हारी भूरी आंखें ही हमारा आयना हुआ करती थी।
    "कैसे लग रहे?"
    ये सुनते ही तुम्हारी आंखें मुस्कुरा दिया करती थी। मानों जैसे कह रही हों 'आज काजल जच रही हैै तुम पर।' फिर क्या, हमारा लुक हो जाया करता था वेरीफाई।
    तुम्हारे लिए सुन्दर दिखना हमारा काम था। हमें सुन्दर महसूस कराना, तुम्हारा।
    खैर, अब बालों को संवारना और काजल लगाना हमें पसंद नहीं। और ना ही अब हम इन बेजान शीशों में खूबसूरत महसूस करते।

    अंत में, लौटाने को तो सब कुछ लौटा दिया था तुम्हें। पर सच कहें तो, तुम्हारे भेजे गाने अभी भी प्लेलिस्ट में कहीं पड़े हुए हैं। हिम्मत नहीं हो पा रही, ना तो डिलीट करने की, ना दुबारा सुन पाने की। नफ़रत नहीं उन गानों से। बस वो तुम्हारी तरह हो गए हैं, जाने अजनबी से।

    अच्छा सुनो ना, प्रेम कोई ऐसा गाना नहीं, जिसे दो बार लूप पर सुनने से मन उब जाए। प्रेम एक ऐसी उपन्यास होती है जिसके ख़तम होने के बाद भी, एक बार, दो बार या पांच बार पढ़ने के बाद भी रोज़ रात अपने सिरहाने रखने से अच्छा लगता है।





    -अनन्या

  • tengoku 30w

    Too often,
    forevers also beg for an end.









    -Ananya

  • tengoku 30w

    29th April, 2021.
    Your second birthday, together.

    Exactly a year ago, on the same day, at around 3 AM, I started writing a birthday post for the first time. To be honest I was a bit nervous because writing prose was (is still) never easy for me. And it's nearly impossible for me to write for someone I love and admire. Tho I tried to gather everything I had to ink, in my mind and heart. I won't lie, I was smiling all the time while writing it, thinking about the smile my small present would bring on your face. I had only sweet nostalgic aroma around me at that time. I had nothing to give you honestly, except some childish words and imperfect verses. So I gifted you some moments. I stuffed pauses between lines with laughters we happily spent and filled the spaces between words with smiles we shared. I always had a void in my life for an elder sibling (being eldest sucks). And that void seemed to be filled by your presence. Did I ever tell you that even my younger sister calls you bhai?

    I remember how you helped me once to learn writing prose. You inspired me each and every time. I remember how I used to send you my poems to check before posting them. I remember your reply "bol" on my text "bhai". I remember each and every time when you helped me to get rid of some hard situations. Can I ever thank you enough for all these things? No. Doesn't matter what happens today, I would always be grateful to you for whatever you did, for me in past.
    You were always a cool brother. The coolest I should say. You never got angry on me, not even for making jokes or memes on you. Not even on making edits of your pictures. Not even for spamming your posts.
    Like an ideal elder brother. You supported me everytime. Told me what is wrong and what is right.

    Today after a year, on the same day, at the same time (writing at 3 of night), I'm writing for you again. But instead of smiles I've tears in my eyes and a weird pain in my throat. You know what bhai? I miss the night when I was writing first birthday post for you. When I was a naive sister and you were my super hero.
    We didn't talk since days now. Maybe we can't anymore, like the way we used to. I swear, it takes all of me to accept this thing. But I'd always thank universe for letting me meet a soul like you, and call you my bhai. You can't imagine how much it means to me. No, you can't. You just can't. No one can. Only my heart knows what you are to me.

    I'm writing this post for the person my first dedication post was written for. And that's for my bhai. Not for the person I and we all saw few days back. Whoever was he, I don't wish to see him again. I hate myself for holding things way too hard and denying changes. I still hope that everything would be same, happy like before. I miss old days.

    Pardon me for being so silly and stupid. I never wanted to hurt your feelings.
    I just don't want a blot to ruin everything, we both have cherished so far.
    I still love and respect bhai.  


    Rooh se behti huyi dhoon ya ishare de
    Kuch mere raaz tere raaz awara se

    Kho gaye hum kahan
    Rangon sa ye jahan

    Tedhe mede raaste hain
    Jaaduyi imaaratein hain
    Main bhi hoon tu bhi hai yahaan

    Khoyi soyi sadkon pe
    Sitaron ke kandhon pe
    Hum naachte udte hain yahaan

    So gayi hain ye saanse sabhi
    Adhoori si hai kahani meri

    Phisal jaaye bhi toh darr na koi
    Ruk jaane ki zaroorat nahi

    Kagaz ke parde hain
    Taale hain darwazo pe
    Paani mein doobe huwe
    Khwab alfazon ke

    Kho gaye hum kahan
    Rangon sa ye jahan

    Happiest birthday bhai.
    I know I ruined your b'day post this year.
    मला माफ करा भाई :")

    @veloc1ty_
    #firstandlastlongpost #HBDP

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    Even poetry can't fathom,
    how many scars he hide in the
    depth of his heart.









    -Ananya

  • tengoku 31w

    Ounce of love in tons of rhymes,
    his bare soul is still stuck in mine.











    -Ananya