sweta_singh99

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  • sweta_singh99 4w

    हम पाने की चाहत में खोते जा रहे अपने वजूद को
    कहीं ये चाहते हमें अंतिम छोड़ पर ला कर ना तोड़ दें
    रहना मजबूत अपने कदमों को ज़मी पर कि आसान
    नहीं आकाश में बादलों के संग तैरना ..................
    कदमों के तले तो दो गज जमीं ही भाती है...............

  • sweta_singh99 6w

    हिन्दी दिवस

    जेष्ठो में जेष्ठ हिन्दी
    भाषाओं में सर्वश्रेष्ठ हिन्दी
    अपनी पहचान हिन्दी
    साहित्य की जान हिन्दी
    अलंकार से अलंकृत हिन्दी
    स्वर,व्यंजन विधिवत हिन्दी
    व्याकरण से पुरस्कृत हिन्दी
    प्रत्येक राष्ट्र में प्रचलित हिन्दी
    हिन्दी है हिन्दुस्तान की बिंदी


    हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

  • sweta_singh99 6w

    जीने के लिए दो बहाने ज़रूरी है
    आज से ज्यादा कल के फसाने जरूरी है

    जीने के लिए दो बहाने ज़रूरी है
    आने वाले कल के लिए तेरा आना जरूरी है

    जीने के लिए दो बहाने ज़रूरी है
    जीवन के लम्बी सफ़र में एक सफरनामा ज़रूरी है

    जीने के लिए दो बहाने ज़रूरी
    वक़्त कब किसका रहा आज मुस्कुराना जरूरी है

    जीने के लिए दो बहाने ज़रूरी है
    बांटना हो खुशियां तो दिलों में जिंदादिली ज़रूरी है

  • sweta_singh99 6w

    ❤️❤️

    बदलता कुछ नहीं बस यादें दिल में बस जाती है
    एक दिल जैसा चीज़ है जिसने सिर्फ बदलाव ही देखें है
    ©sweta_singh99

  • sweta_singh99 7w

    सिखना एक प्रक्रिया है और सिखाना एक अलग प्रक्रिया है।
    जिसने सीख कर सिखलाया वह शिक्षक कहलाया।

    आइए हम सब मिलकर एक बार फिर से अपने देश को विश्वगुरु बनाए।
    @Bal_Ram_pandey ji@vipin_bahar ji,& समस्त गुरुवर

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    गीली मिट्टी को ढाल दिया
    कर दिया मेरा कल्याण
    सार्थक है आज मेरा जीवन
    बना दिया मुझको महान
    ऐसे हैं मेरे प्रभु जिनके
    चरणो में बारम्बार प्रणाम।

    समस्त शिक्षक वर्ग को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
    ©sweta_singh99

  • sweta_singh99 8w

    हो गर मोहब्बत तो थोड़ी दूरी भी ज़रूरी है
    चाहते हो कितना ,आजमाना भी जरूरी है
    ©sweta_singh99

  • sweta_singh99 8w

    ना जाने ये मन क्या ढूंढता है
    देख कुंठित व्यथा ये मन बहुत
    विचलित हो जाता है

    ना जाने ये मन क्या ढूंढता है
    जीवन संचीत है परन्तु
    सुख से वंचित हैं

    ना जाने ये मन क्या ढूंढता है
    दिन उजाले से रात अंधेरा में
    ये प्रकृति का नियम बन जाता है

    फिर ना जाने हमारी आकांक्षाएं
    संसारिक मोह-माया में उलझ सा
    जाता है

    ना जाने ये मन क्या ढूंढता है
    जन्म से मरणासन्न के चक्रव्यूह
    में मनाव निजात नहीं पाता है

    ये चक्र है जीवन का आधार है
    जीने का, रस्म अदायगी करने सब
    पृथ्वी पर जन्म पाता है
    ©sweta_singh99

  • sweta_singh99 8w

    बस यूं ही ������

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    मेरी ये जो आंखें हैं और इन आंखों में जो सपने हैं, उन सपनों में तुम ही तुम हो
    या यूं कहें कि सपने हैं तो मेरी ये आंखें हैं.........…........

  • sweta_singh99 9w

    तराशो खुद को इस क़दर की चाहने वाले कि इबादत बन जाओ
    गर मिलों जो तुम किसी से सिर्फ तुम ही उसकी चाहत बन जाओ
    ©sweta_singh99

  • sweta_singh99 9w

    ☕☕

    वतन की मिट्टी को चुमने का एक एहसास होगा
    जब हाथ में चाय से भरी कुल्हड़ की गिलास होगी

    हर चौराहे पर चाय की एक मीठी सी दुकान होगी
    दिवाने है जो चाय के जुबां पर वाह क्या ताज होंगी

    सुबह-शाम की तलब है चाय मिल जाए तो दिन का संचार है चाय

    मिल बैठेंगे जब संग चार यार हो हाथ में चाय की गिलास
    ये चाय है या इश्क का बुखार ना मिले तो दिन लगे पहाड़

    मेहमान नवाजी का उपहार है चाय वो आए तो हम चाय पिलाए
    ©sweta_singh99