sushmita22

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  • sushmita22 27w

    तू साथ मेरे बैठा हो सर्द रातों में,
    हाथ तेरा थाम गर्मराहत होना चाहती हूँ।

    -Sushmita Sharma

  • sushmita22 116w

    मैं कमाती हूँ, लड़का बेचोगे क्या?
    ऑफिस जाती हूँ,चार लोगों मे बैठती हूँ,
    हर तरह के लोगों से मिलती हूँ,
    बोलो लड़का बेचोगे क्या?

    वैसे कोई बुराई नहीं मुझमें,
    कभी कभी देर से आती हूँ,
    तनाव हो तो थोड़ी पीती या धुँआ उडा़ती हूँ,
    बहुत जल्दी hyper हो जाती हूँ,
    ऑफिस का गुस्सा घर पर बरसाती हूँ,
    ज्यादा हो तो थोड़ा हाथ भी उठाती हूँ,
    मगर पैसे लाखों मे कमाती हूँ।।
    बोलो लड़का बेचोगे क्या?

    घर के कामों से कोसो दूर रहती हूँ,
    खाने मे नमक मिर्च ऊपर नीचे हो,
    तो थाली फैक देती हूँ।
    अगर कुछ बुरा लगे तो मुहँ पर बोल देती हूँ,
    वैसे कोई बुरी आदत नहीं मुझमें,
    मगर नखरे किसी के नहीं सहती हूँ।
    बोलो राजी हो क्या?

    हम दहेज में कुछ नहीं चाहिए
    माफ कीजिए.....
    आपको दहेज पूरा मिलेगा
    बस लड़का हमको है देना
    मुझे मेरी एक बात समझ नहीं आती,
    बिना सर और पाँव दबाये मुझे नींद नहीं है आती।
    थोड़ा बहुत तो यह भी होगा आता,
    चिंता न करो इसमें कोई नहीं है घाटा।

    घबराना मत आप मैं पूरा ध्यान रखूँगी,
    पत्नी धर्म निभाने का पूरा ध्यान रखूँगी,
    लाखों रुपये की तनख्वाह लुटायूँगी,
    और समय समय पर आपसे मिलवाने भी लाऊँगी।
    बोलो, लड़का बेचोगे क्या?

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    Mai kamati hu ladka bechoge kya

  • sushmita22 117w

    Reply

  • sushmita22 117w

    Mother

  • sushmita22 117w

    #kalyugkisita #womanpower

    ...
    मैं कलयुग की सीता बनना चाहती हूँ ,
    वो लक्ष्मी रुपा,अन्नपूर्णा,कोमल
    सुंदरी,सादगी से परीपूर्ण
    मगर जब आये कोई संकट
    हाथों में तलवार उठाना चाहती हूँ
    मैं कलयुग की सीता बनना चाहती हूँ।। .

    जो खड़ी रहे हर राह पर
    रक्षा करे खुद की
    अपने बल के साथ
    विश्वास हो साथी पर मगर
    छोड़े न आत्मविश्वास
    दुनिया को सीता का नया रूप दिखाना चाहती हूँ
    मैं कलयुग की सीता बनना चाहती हूँ।। .

    जब आये कोई रावण
    छूना चाहे गर अपनी आँखों से
    जबरन बैठाये या छूने लगे हाथों से
    अग्नि जैसी पवित्र रह
    अग्नि बन उसको जलाना चाहती हूँ
    मैं कलयुग की सीता बनना चाहती हूँ।।.

    जो खड़े रहते है हाथ
    मुझपे उँगली उठाने को
    लाख गलती रावण की हो
    मगर मजबूर करे मेरा सर झुकाने को
    ऐसे लोगों से अग्नि परीक्षा दिलवाना चाहती हूँ
    मैं कलयुग की सीता बनना चाहती हूँ।।.

    उन लाखों रावण से
    जो नोचते है, कभी हँसते हैं
    तो कभी छेड़ते हैं मासूमों को
    उस हर लड़की को रावण से
    लड़ना सिखाना चाहती हूँ
    मैं कलयुग की सीता बनना चाहती हूँ।।.

    हर सही को सही
    गलत को सजा दिलाना चाहती हूँ
    दूसरों की आँखों से आँखें
    कंधे से कंधा मिलाना चाहती हूँ
    गर्व हो मेरे राम को मुझे सीता कहते हुए
    ऐसे गर्व से उसका सिर उठाना चाहती हूँ
    मैं कलयुग की सीता बनना चाहती हूँ।।.
    . © Sushmita sharma

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    Kalyug ki sita

  • sushmita22 118w

    Time pass

  • sushmita22 118w

    Mareez_e_ishq

  • sushmita22 118w

    © sushmita sharma

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    Attitude

  • sushmita22 120w

    पिता