succhiii

बिखरे बिखरे से अल्फ़ाज़

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  • succhiii 1w

    मीटर - 122 122 122 122
    पैहम -निरंतर
    पैकर -साक्षात
    बहम-साथ
    ख़म - टेढ़ापन

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    ग़ज़ल

    ख़ुशी की ख़ुशी कोई ग़म का न ग़म है ।
    न जाने ये क्यूँ आज फिर ,आँख नम है ।

    जिधर देखिए दश्ते-सहरा ही सहरा …
    कि अहले सफ़र में यहाँ ,ख़म ही ख़म है ।

    ज़माने तिरे चंद ख़ुशियों के सदक़े ….
    किये जीस्त पे हमने ,पैहम सितम है ।

    नहीं जो तू पैकर मेरे रूबरू है ..
    ख़यालों में मेरे सदा ही बहम है ।

    तेरे चाहतों के दयारो में यक्सर ..
    फ़क़त हमने देखें ,भरम ही भरम है ।

    अधूरे से कुछ ख़्वाब , हैं चंद यादें..
    यही हमने जोड़ी थी , बरसो रक़म है ।

    है दिल की फ़क़ीरी , कलम आशिक़ी है ..
    मुझे क्या कमी है , करम ही करम है ।
    @succhiii

  • succhiii 18w

    मुसलसल -निरंतर
    तसलसुल - निरंतर
    ब-दस्तूर -हमेशा की तरह
    212 212 212 212
    @sanjeevshukla_

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    ग़ज़ल - ज़िंदगी

    डूबते तो कभी हम उभरते रहे ।
    रौ में दरिया तेरे यूँ ही बहते रहे

    इस तरह भी बसर जीस्त करते रहे..
    चोट खाते रहे और हँसते रहे ।

    ज़िंदगी की पढ़ाई मुसलसल रही ..
    इंतिहाँ भी ब-दस्तूर चलते रहे ।

    काश और आस के जंगलो में फँसे ..
    जाने कब से तसलसुल भटकते रहे ।

    रूक जा ऐ ज़िंदगी ठैर जा तू ज़रा ..
    आबले पा के, कब-तक यूँ सिलते रहे?

    जी तो लेने दे उन लम्हों को भी कभी ..
    राह- ए-दिल से सदा जो गुज़रते रहे ।

    रात यूँ याद आई किसी ख़्वाब की …
    गुफ़्तगू चाँद तारो से करते रहे ।

    ख़ैर है ! रौशनाई रही हाथ में …
    शुक्र हम तो , खुदा तेरा करते रहे ।

    “सूचि” माने भी तो हार कैसे कोई …
    ख़्वाब पलको में कल के जो पलते रहे ।
    @succhiii

  • succhiii 20w

    आज ज़रा कुछ हट के लिखा है …उमीद है पसंद आएगी और आप लोग झेल पाइएगा 😊😊
    Duet ग़ज़ल है ये ❤️
    122 122 122 122
    @sanjeevshukla_
    _ @rekhta_ @hindiwriters @hindinama

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    ग़ज़ल - मौसम

    ये बारिश का मौसम गुलाबी -गुलाबी
    समा है नशीला , शराबी -शराबी ।

    निगाहें भी तेरी ,सवाली - सवाली …
    तो चेहरा मिरा भी ,किताबी- किताबी ।

    अदा हाय ! ये शोख़ियाँ तेरी जानाँ ..
    दिलो में करें हैं , ख़राबी -ख़राबी ।

    हैं मदहोश सी , ये हवाएँ -फ़जाएँ ..
    अजब सी है छाई , ख़ुमारी -ख़ुमारी ।

    छिटकने लगी हैं ये ख़ामोशियाँ भी
    तेरा इश्क़ तो है , जवाबी -जवाबी ।

    झुका लो तुम अपनी नशीली निगाहें..
    ये दिल हो न जाए , शराबी -शराबी ।

    फ़साना तो ये इश्क़ -ओ-हुस्न का है
    ये दुनिया बहुत है , सवाली- सवाली ।
    @succhiii

  • succhiii 20w

    @sanjeevshukla_ @rekhta_ @hindiwriters @hindinama @parle_g

    1222 1222 122

    कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा
    मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा
    - कैफ़ भोपाली

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    ग़ज़ल

    गुमां होता है हर -पल मुझको कोई
    सदा देता है पल-पल तुझको कोई ।

    रखे हैं तेरे ख़त सम्भाल अब -तक ..
    कि आहट हो कोई , दस्तक हो कोई ..

    शबे- फुरकत कभी ,ख़त्म हो मौला ..
    सहर की भी दिखे सूरत तो कोई ।

    महक उठती दरो-दीवार घर की ..
    सबा लाती तेरी ख़ुशबू जो कोई ।

    तेरा ग़म है, तू है ,तो रौशनी है …
    वगरना जीस्त बेमक़सद हो कोई ।
    @succhiii

  • succhiii 22w

    ग़ज़ल इंतिहा

    यही है इंतिहा तो इब्तिदा क्या है
    तुम्हीं बतलाओ अब ये माजरा क्या है ।

    दिलो में जब नहीं है क़ोई भी दूरी ……
    तो बतलाओ मियाँ , ये फ़ासला क्या है ।

    अना के शाख़ पे कलियाँ मोहब्बत की ..
    यूँ ही गर सूख जाए , सोचना क्या है ।

    बहुत नख़रे हैं ज़ालिम ज़िंदगी तेरे ..
    दुआ भी काम ना आई , दवा क्या है ।

    लहू अश्को का दरिया बन के निकला है ..
    बता मेरे खुदा तेरी रज़ा क्या है ।

    @succhiiI

  • succhiii 22w

    मीटर 122 122 122.

    दर्द बढ़ कर फ़ुग़ाँ न हो जाए
    ये जमी आसमाँ न हो जाए

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    ग़ज़ल

    यूँ रस्ता भी देखे न कोई
    कि टूटे यूँ , बिखरे न कोई ।

    बहे जाये आँखों से काजल ..
    रुलाए यूँ …….रूठे न कोई ।

    बिछड़ जा ! बिछड़ना अगर है ..
    यूँ मुड़ -मुड़ के देखे न कोई ।

    जो है आज में है , अभी है ..
    सो कल की ख़बर ले न कोई।

    है अब संग यादो का बस्ता ..
    सहारा ये छीने न कोई ।


    ©succhiii

  • succhiii 25w

    बच्चे कितने भी बड़े हो जायें , पर माँ के लिए वो सदा बच्चे ही होते हैं ..मेरे मन के बच्चे ने अपनी माँ की याद में कुछ लिखने की कोशिश की है …जो आज इस दुनिया में नहीं …विश्वास नहीं होता कल तक जो हमारे आँखो के सामने थीं वो अचानक कहाँ चली गई 🥺इस महामारी ने उसे हमसे छीन लिया , 😭माँ तुम जहाँ हो ख़ुश रहना उस परम पिता परमात्मा के गोद में अब कोई दूख़ कोई कष्ट नहीं , न कोई महामारी है …तेरी बेटी तेरे बिन बहुत उदास है , सपने में आना , बहुत सी बातें करनी हैं 🥺

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    माँ

    माँ ! तेरी याद बहुत आती है
    हमें बहुत …..रुलाती है ।

    देखने को वो प्यारी सूरत
    आँखे अब तरस जाती हैं ।

    आँचल वो ममता वाली
    तेरी बेटी अब कहाँ पाती है ।

    बातें कुछ अधूरी- अनसुनी
    माँ ! वो आज भी बाक़ी है ।

    ज़फ़्फ़ी वो दुआओं वाली
    कहाँ अब मिल पाती है ।

    वहाँ दूर गगन में तारा बन
    तू ही तो झिलमिलाती है ।

    आंख़ो के कोरों से दिल तक
    तेरी तस्वीर उभर आती है ।

    माँ ! तेरी याद बहुत आती है
    तेरी याद …बहुत आती है ।
    @succhiii

  • succhiii 33w

    मुझे ये बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी पहली किताब साँझा संकलन “लेखनी मिहिका” @lekhni_ परिवार के सौज़न्य से प्रकाशित हो चुकी है । @lekhni_ परिवार को तहे दिल से शुक्रिया मुझे यह सुनहरा मौक़ा देने के लिए 😊🙏🏻
    Link- 👉🏻 https://www.amazon.in/dp/B08ZSLZ6GH/ref=cm_sw_r_cp_apa_glt_i_12KSX2Z1DRT7873CFBGP

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    ..

  • succhiii 33w

    यूँ ही कुछ चलते फिरते
    मीटर 1222 1222 1222
    इब्तिदा - शुरुआत
    @mirakeeworld

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    यही है इम्तिहाँ तो इब्तिदा क्या है
    तुम्हीं बतलाओ अब ये माजरा क्या है ?

    दिलों में जब नहीं है कोई भी दूरी ..
    तो बतलाओ मियाँ ! ये फ़ासला क्या है ?
    @succhiii

  • succhiii 35w

    @mirakeeworld @hindinama @hindiwriters @rekhta_
    मरासिम -रिश्ता
    मह -चाँद
    मुसलसल -लगातार
    मीटर - 1222 1222 1222

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    ग़ज़ल -अक्स

    कोई तस्वीर हर्फ़ों में उभरती है ।
    महक यादों की पन्नो में उतरती है ।

    चमकते हैं कई जुगनू इन आँखो में..
    शबे-ग़म यूँ ही अश्क़ो से सँवरती है |

    उतरता है ज़मीं पर अक्स जब मह का ..
    नमी पलकों की कोई ख़्वाब बुनती है |

    मुसलसल रूठ जाना हो शग़ल जिनका ..
    वो क्या जाने दिलों पे क्या गुजरती है |

    कोई ख़ामोश है कुछ इस तरह लोगो ..
    पहेली और भी दिल की उलझती है |

    तुझी को ढूँढते हैं तुझ में गुम होकर ..
    शमा हर पल यूँ सुब्हो -शाम जलती है |

    कोई सदियों का बाबस्ता था तुझसे..जो..
    मेरी राहें तेरे दर से गुजरती है ।

    ©succhiii