sirf_ehsas

Sirf Ehsas hun Ehsason Ke Shahar Se

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  • sirf_ehsas 4w

    तुम्हारी एक निगाह से कतल होते हैं लोग फ़राज़

    एक नज़र हम को भी देख लो

    के तुम बिन ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती

    अहमद फ़राज़

  • sirf_ehsas 4w

    वो बात बात पे देता है परिंदों की मिसाल

    साफ़ साफ़ नहीं कहता मेरा शहर ही छोड़ दो

    अहमद फ़राज़

  • sirf_ehsas 6w

    क्यूं

    क्यूं होता यही है
    पहले प्यार जताया जाता फिर
    आदत बन कर
    मजबूरियों की आड़ में बदलना
    और खाली कर के दर्द भर देना

    (अनु)

    ©sirf_ehsas

  • sirf_ehsas 6w

    अनकहा दर्द

    जो दर्द लफ्ज़ों में लिखना हो मुश्किल उस दर्द के क्या कहने

    के जब साथ हो कहने को कोई अपना मगर हम तन्हा और अकेले
    (अनु)

    ©sirf_ehsas

  • sirf_ehsas 7w

    सुन के भी अनसुनी करते हो,

    चुप हो जाऊँ तो फिर कहासुनी करते हो.

    (अज्ञात)

  • sirf_ehsas 7w

    मुझे तू यूँ चाहिए,

    जैसे लोगों को सुकूँ चाहिए

    (अज्ञात)

  • sirf_ehsas 7w

    ख़ामोश सा शहर और गुफ्तगू की आरजू,

    हम किससे करें बात.. कोई बोलता ही नहीं

    (अज्ञात)

  • sirf_ehsas 7w

    उसे कहना।।

    उन रास्तों पे बीते वो हसीन लम्हे...

    अक्सर मेरी शामें बर्बाद करते हैं

  • sirf_ehsas 7w

    दिल भी न जाने किस किस तरह ठगता चला गया ...

    कोई अच्छा लगा और बस लगता चला गया !!

    (अज्ञात)

  • sirf_ehsas 7w

    कुछ यूँ मिली नज़र उनसे

    बाकि सब नज़रअंदाज़ हो गये

    (अज्ञात)