singh_ankit_hunny

upsc aspirant. "main to wo likh deta hun jo mere dil me aaye agar aapke dil ko chu jaye to mahaj 'ittefak' smjhiye."

Grid View
List View
Reposts
  • singh_ankit_hunny 37w

    सुनो #ठकुराईन❤️
    दिल करता है की तेरे सीने से लिपट कर बताऊँ,
    तुझसे दूर रहकर यूं तन्हा जीने में कितना दर्द होता है..

    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 37w

    बंगाल भारतीय नवजागरण का केंद्र रहा है जहाँ से उठने वाली चेतना की लहरों ने भारतीयों को सामाजिक सांस्कृतिक एवं धार्मिक रूढ़ियों से मुक्त करने का प्रयास किया था।नवता ,इहलौकिकता,मानवता और जनपक्षधरता को लेकर चलने वाला ये सांस्कृतिक नवजागरण अपनी प्रासंगिकता के कारण तमाम बौद्धिक विमर्शों का केंद्र रहा।आज के परिदृश्य में यही दृष्टिगोचर हो रहा है कि बंगाल अब भी अपने मूल उद्देश्य से भटका नही है और उसकी जड़ें राजा राममोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर , देवेंद्रनाथ ठाकुर और केशवचंद्र सेन जैसे चिंतकों से पोषित हैं।

    (मानवता की छाती पर क्रूरता के इस तांडवी नृत्य रूपी चुनाव को इतिहास याद रखेगा।)
    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 50w

    बस यूं ही...

    पता नही क्यों आपके साथ गुजारे हर एक वो लम्हा बहुत तड़पाता है मुझे, यूं तो कब का खो चुका हूँ खुद को खुद से ही , बस कुछ बचा है मेरे और आपके दरमियां जो आज भी जिंदा है, वरना सच कहूं तो आपके हिसाब से देखूं तो कब का मर गया हूँ मैं आपके लिए आपने ही बोला था ये तो, बस अगर कुछ बचा भी है तो आपके किये हुए वादे, ढेर सारी आपकी यादें....!!!
    पता नही आपको कुछ याद भी है या नही.. शायद नही होगा क्योंकि अब तो बहुत खुश रहती हो न सुना है महसूस भी करता हूँ आपकी खुशी को अब ये मत सोचना भला कैसे? तो बता दूं आपसे सिर्फ प्यार नही हुआ था मुझे मोहब्बत हुई थी, और बोला भी था आपसे जीवन मे बस आपकी खुशी चाहता हूँ और कुछ नही और देखो न आजतक भगवान ने मेरी एक न सुनी लेकिन ये सुन ली, और मैं खुश भी हूँ क्योंकि आप जो खुश हो, और ह आपको तो पता है न बहुत लम्हा जो साथ गुजारा था सच मे वो अब तक के मेरे सबसे हसीन लम्हो में से एक है, और हो भी क्यों न हर लम्हों में जो आप थी...!!!
    अपना ख्याल रखना हमेशा खुश रहना...
    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 57w

    प्रेम किसी शब्द का मोहताज नही होता।
    बहुत दिनों बाद एक सुंदर छवि प्राप्त हुआ।����
    # मासूमियत

    Read More

    .

  • singh_ankit_hunny 63w

    उस बुजुर्ग की उंगलियों में
    कोई ताकत तो न थी,
    जब झुका सर मेरा तो कापते हाथों ने
    जमाने भर की दौलत दे दी…।
    # धोती वाली हमारी # आखिरी_पीढ़ी और उनके निश्छल मन मे अन्न देवता का सम्मान

    Read More

    .

  • singh_ankit_hunny 68w

    बेटी बचाओ नारा नही , अपितु धमकी की तरह लगता है अब तो, मेरे पास शब्द नही की मैं कुछ लिख सकू मन बहुत व्यथित होता है कि हम महामारी से तो आज नही तो कल जंग जीत लेंगे मगर जो मानसिक महामारी से घिरे लोग हैं उनका क्या करेंगे? विचार करें और सुझाव दे।������
    # हाथरस # बलरामपुर

    Read More

    शव तक न मिलना यह सिद्ध करता कि अतीत में हमने दलितों के साथ क्या क्या किया होगा ।
    रामराज्य में शंबूक की हत्या होती रहेगी । पर शम्बूक की बेटी के साथ जो हुआ वह 21सदी के लोकतांत्रिक संवैधानिक भारत पर कलंक है । डूब मरने का दिन है ।
    नपुंसक खामोशियाँ बड़े-बड़े हस्तिनापुरों को लाशों के ढेर में तब्दील कर देती है!नेतागण बिहार में बिजी है,चौथा खम्भा राजविदूषकों के यहाँ चरस की पुड़िया ढूँढने में बिजी है ! सभ्यता के पतन का मार्ग इन दिनों जीडीपी की तरह ईज़ी है।
    पढ़ो और हया बाकी है तो सवाल पूछो????
    जो सरकारें बेटियों महिलाओं को सुरक्षा नही दे सकते बजाय दमन करते उन्हें सत्ता पर रहने का कोई अधिकार नही ।

  • singh_ankit_hunny 70w

    वजह ये है कि सरकारी नौकरी एक तिलिस्मी चाभी है जो एक निम्नवर्गीय व्यक्ति को भी समाज के इलीट क्लास में पहुँचने का रास्ता दिखाता है।
    सदियों से जो दबे कुचले वंचित गरीब रहे है, जिनके बाप बड़े व्यवसायी, किसान, प्रोपर्टी होल्डर नही है, जो बेटे को बड़ी विरासत दे जाएं, और कहें बेटा डर मत मैं हूं न तुम्हारा भविष्य सिक्योर है।
    सरकारी नौकरी उन लोगो की लाइफलाइन और जीवन को बेहतर बनाने का मौका है,, जो जानते है कि उनके पास इतनी पूंजी नही की बडा व्यवसाय खड़ा कर सके, 4 दुकान किराए पर लगाकर बिना मेहनत कमा खा सके,,और इज्जत के साथ जी सके।।
    वो आम आदमी ये जानता है, की अपना अतीत और माता पिता वो बदल नही सकता, पर उसकी मेहनत और सरकारी नौकरी उसकी किस्मत बदल सकती है,इसलिए वो हाड़तोड़ परिश्रम करता है।।
    जिस युवा दौर में उसके साथी, जोकि बड़े बाप की औलाद है ,महंगी बाइक कार में सड़क के चौराहों रेस्टोरेंट में घूम रहे होते है, वो दिल्ली भी नही जा सकता, इसलिए इलाहाबाद(प्रयागराज) के 600 से 1000 के कमरे में रात 2 बजे तक अपनी आँखें खराब कर रहा होता है, मैकडोनाल्ड डोमिनोज़ कौन कहे, सड़क के ढाबे पर खाने के पहले भी दो बार सोचता है कि उसके पिता कैसे ये सब खर्च मैनेज कर रहे होंगे,
    वो जिंदगी का सबसे बड़ा दाव खेलता है, जो बड़े बड़े दिग्गजों के बस की नही होती, 18 साल से 30 साल की गोल्डन age बन्द कमरों की किताबों पर कुर्बान कर देता है, बिना यह सोचे कि जॉब नही मिली तो वो क्या करेगा,, साहब जिंदगी के 18 20 साल सिर्फ एक उम्मीद पर झोंक देना मज़ाक नही होता।
    साहब,अमीरों को फर्क नही पड़ता, उनकी लाइफ को बेहतर बनाने के 100 रास्ते वो खुद बना सकते है, या सरकार या जुगाड़ बना देती है, पर गरीब का क्या वो तो ले देकर सरकारी नौकरी को ही अपनी सबसे बड़ी सीढी समझता है।
    निजीकरण अच्छा हो सकता है,, पर क्या वो गरीब को ये सम्मान दे पाएगा.?
    क्या निजीकरण के बाद एक गरीब का बच्चा महंगे कॉलेज से mba mbbs, md, इंजीनियर अफसर बन पाएगा?
    जवाब अपने आप मिल जाएगा कि सरकारी संस्थान क्यों जरूरी है।

    Read More

    निजीकरण की तमाम बहस के बावजूद सरकारी नौकरी का मोह जाता नही, क्यूं??
    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 75w

    मुझे पहला मैच वही याद है जब धोनी ने श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 183 रन की पारी खेली थी.....बड़ी बात ये थी कि उस मैच में धोनी ने 10 छक्के जड़े थे, जो मुझ जैसे 10 11 साल के लड़के के जेहन में याद रह जाने को काफी था.....!!!!!
    लेकिन धोनी होना भी इतना आसान कहाँ है !
    धोनी होने के लिये आपको लोगों की टूटती उम्मीदों को जोड़ना होता है, जमीन पर खड़े होकर हेलीकाप्टर उड़ाना होता है, टूटे अँगूंठे के साथ खेलना पड़ता है, बिना देखे गेंद को स्टंप्स में मारना पड़ता है, पलक झपकने से पहले गिल्लियाँ बिखेर देना होता है.....कोई कितना कुछ बोल ले लेकिन उस पर कोई प्रतिक्रिया न देना और मैदान में जवाब देना होता है धोनी होना.....धोनी होने के बाद भी सबसे मुश्किल काम ये है कि धोनी होकर भी धोनी बने रहना.....!!!!!
    मेरे लिए क्रिकेट तभी पूरा होता है ,जब तीन डण्डों के पीछे खड़ा धोनी आंखों से सुन और हाथों से बोल रहा हो.....जब सबके माथे पर पसीने की बूंदे हों उस वक्त में भी शान्त रह कर मैच को जीत कर ले आना होता है धोनी होना.....!!!!!
    क्रिकेट पहले भी खेला जाता था,
    क्रिकेट आगे भी खेला जायेगा.....लेकिन आँखों में जीत का भरोसा लिये एक इकलौता सा इंसान अब क्रिकेट को अलविदा कह दिया....तुम उसको कितना भी बोल लो पूरे देश के साथ वो बाइस गज की पट्टी और वो तीनों ड़डे भी रोयेंगे, जिसके पीछे वो 15 साल से खड़ा है.....
    धोनी सच कहूँ तो नाम ही काफी हैं। लाखों आलोचकों और करोड़ों फैन को अब शायद 7नंबर जर्सी पहने हुए धोनी न दिखे मैदान में, कहने के लिए तो धोनी ने सन्यास ले लिया हैं पर सच कहूं तो सन्यास ले लिया उस उम्मीद ने की हम कहते थे कि मैच देखेंगे अभी धोनी हैं।एक चमकता सितारा आज अपनी रोशनी को अपने आप में समेट कर अपने रोशनी का अंत कर दिया। खिलाड़ी आएंगे जाएंगे पर धोनी जैसा शायद ही कोई और आये।
    जब जब इस बाइस गज की पट्टी और विकेट के पीछे खड़े खिलाड़ियों की बात होगी, तब तब एक नाम सबसे पहले लिया जायेगा.....वो नाम है.....महेन्द्र सिंह 'धोनी'.....❤
    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 75w

    साधना का शेष रहना चाहिए , मैं भले मिट जाऊँ मेरा देश रहना चाहिए।
    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 77w

    सुनो #ठकुराईन❤️
    मैं कुछ बातें तो जान बूझकर नही लिखता,
    की कहीं मैं हाल-ए-दिल बयां करूँ और आप समझ ही न पाओ,
    तो फिर कभी लिखने की हिम्मत नही जुटा पाऊँगा, टूट जाऊँगा, बहुत दर्द होगा...!!
    तो जो हमारे आपके दरमियान खामोशी वाली बातें है उसे रहने देते है, आपको जो समझना है समझिए कम से कम मलाल तो नही रहेगा कि सब समझाया था और आप समझ ही नही पाई...!❤️
    ©singh_ankit_hunny