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  • simplepoetry 217w

    वो नशा दुनिया के तमाम मयखानो में भी नहीं,

    जो नशा तेरी एक झलक में है






    आलोक

  • simplepoetry 218w

    दिल तू है नादान संभलता क्यों नहीं बावरे
    सदिया बीती है तेरे इंतजार में
    आ अब देर ना कर गले से लगा लें ना सांवरे


    Alok

  • simplepoetry 218w

    अजनबी नहीं यार अब,दोस्त तुम अजीज हो
    आशियाना तुम्हारा बहुत दूर ही सही
    पर दिल के तो बहुत करीब हो

    Alok

  • simplepoetry 218w

    देश तो आजाद हो गया है ,पर मुझे लगता है ,कहीं ना कहीं "इंसान" अपनी ही सोच का गुलाम आज भी है



    ©simplepoetry
    Alok

  • simplepoetry 218w

    बनाने वाले ने क्या खूब बनाया है तुमको,
    सारे अल्फ़ाज़ खत्म हो गए मेरे,
    पर तेरी तारीफ खत्म ना हुई

    Alok

  • simplepoetry 219w

    क्या है कोई ऐसा क्षितिज जहां मुझसे तू मिल जाए ,जैसे फलक से जमीन मिल जाती है

    क्या है कोई ऐसी राह जहां मुझसे तू मिल जाए, जैसे समंदर से सरिता मिल जाती है

    क्या है कोई ऐसा वक्त जहां मुझसे तू मिल जाए, जैसे सुबह से सांझ मिल जाती है

    क्या है कोई ऐसा संगीत जहां मुझसे तू मिल जाए ,जैसे कोई धुन हरिदास को खुदा से मिलाती है

    क्या है कोई ऐसी खुशबू जहां मुझसे तू मिल जाए, जैसे फूलों की महक भंवरो को बुलाती है
    Alok

  • simplepoetry 219w

    नजर

    मेरी नजरों से देखो तुम कभी अपने आप को, कुछ तो है जो मुझे नजर आता है ,
    सच कहता हूं तुम्हें भी अपने आप से प्यार हो जाएगा


    #Alok

  • simplepoetry 220w

    Tu dur Hai phir bhi lagta Hai K aas pass Hai
    Tum se bhi pyara tumhara ehsaas hai.....



    ©simple poetry

  • simplepoetry 220w

    Tum chupke se aahista-aahista aaya Karo
    Kyuki Teri har ada par bar-bar fida Ho jata hu me


    ©simple poetry

  • simplepoetry 220w

    Khwab

    Kitni rangeen nazar aati Hai ye duniya tujhse Milne K baad
    Sach me Ye Hai haqiqat ya dekh raha hu koi khwab


    ©simple poetry
    Alok