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  • silence_seeker 9w

    ख्वाहिशें ही तो हैं...,
    कर लेंगे समझौता...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 9w

    रफ़्तार चाहे तेज़ हो या धीरे, पर असर एक जैसा होता है,
    जैसे तेज़ गुस्से में सारा काम खराब हो जाता है,
    उसी तरह, प्यार धीरे धीरे होता है, पर आख़िर में काम उसमे भी खराब ही होता है,
    सब कुछ अपने अंदर समेट लेता है, सारा हिसाब बराबर कर देता है,
    और शायद इसमे नुकसान ज़्यादा होता है |
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 9w

    लोग बोलते हैं की लड़के रोते नहीं है...,
    ना रोना ही उन्हें कमज़ोर बनाता है...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 11w

    क्या हमेशा अच्छा होना ही ठीक है...,
    या जो जैसा है, उसके साथ वैसे ही बर्ताव करना चाहिए...?
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 11w

    अधूरे ही सही...,
    रिश्ते निभाने ही पड़ते हैं...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 13w

    अच्छा होना ही आज-कल सबसे बड़ी बुराई है...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 13w

    सोचा था बहन की शादी के वक़्त ही सही, पापा से गले मिलने का मौका तो मिलेगा...,
    वो ख़्वाब भी बस ख़्वाब बन कर ही रह गया...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 14w

    scarred outside
    wounded inside

  • silence_seeker 14w

    नौ दिन उन्हीं में देवी ढूंढते हैं...,
    पूरे साल पुकारते हैं जिन्हें भिखारी कह कर...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 16w

    हर साल मनाया जाने वाला हफ़्ता, जिसमे बताया जाता है कि किसी भी इंसान से किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए,
    लेकिन सवाल ये है कि सिर्फ़ एक हफ़्ता ही क्यूँ,
    लोग महान बनने के लिए अलग-अलग भाषण देते हैं,
    आज़ादी के इतने सालों बाद शिक्षा की वजह से इस विषय में काफी सुधार भी हुआ है, लेकिन अभी बहुत काम बाकी है,
    मैं भी एक दलित परिवार से हूं, लेकिन शिक्षित और आर्थिक स्तिथि ठीक होने की वजह से पिताजी ने कभी भी आरक्षण का सहारा नहीं लिया, क्योंकि उनका मानना था कि जिन्हें ज़्यादा ज़रूरत है आरक्षण उनके लिए बना है,
    मेरे दोस्त जो सामान्य वर्ग से हैं, हम एक साथ कई सालों से इकट्ठे हैं,
    लेकिन फिर भी जो समाज में होता है उसे देखकर लगता है कि नहीं हम आज भी हज़ारों साल पहले जैसे ही हैं,
    पर वक़्त बदलेगा, जो देश हमारा था, हमारा ही रहेगा जिसमे हम सर उठा कर जी सकेंगे |

    @hindiwriters
    #hind
    #antiuntouchabilityweek

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    Anti Untouchability week
    2 oct. - 8 oct.