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Reposts
  • silence_seeker 1w

    लोग कहते हैं कि वक़्त के साथ सब ठीक हो जाता है...,
    लेकिन जब तक वक़्त आता है, तब तक ठीक होने लायक कुछ बचता ही नहीं है...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 1w

    हम देहाती लोग हैं...,
    पैसा बैंक में नहीं रखते...
    सीधा माँ को दे देते हैं...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 1w

    ख्वाहिशें ही तो हैं...,
    कर लेंगे समझौता...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 1w

    रफ़्तार चाहे तेज़ हो या धीरे, पर असर एक जैसा होता है,
    जैसे तेज़ गुस्से में सारा काम खराब हो जाता है,
    उसी तरह, प्यार धीरे धीरे होता है, पर आख़िर में काम उसमे भी खराब ही होता है,
    सब कुछ अपने अंदर समेट लेता है, सारा हिसाब बराबर कर देता है,
    और शायद इसमे नुकसान ज़्यादा होता है |
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 2w

    लोग बोलते हैं की लड़के रोते नहीं है...,
    ना रोना ही उन्हें कमज़ोर बनाता है...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 3w

    क्या हमेशा अच्छा होना ही ठीक है...,
    या जो जैसा है, उसके साथ वैसे ही बर्ताव करना चाहिए...?
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 4w

    अधूरे ही सही...,
    रिश्ते निभाने ही पड़ते हैं...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 5w

    अच्छा होना ही आज-कल सबसे बड़ी बुराई है...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 6w

    सोचा था बहन की शादी के वक़्त ही सही, पापा से गले मिलने का मौका तो मिलेगा...,
    वो ख़्वाब भी बस ख़्वाब बन कर ही रह गया...|
    ©silence_seeker

  • silence_seeker 7w

    scarred outside
    wounded inside