shivi_18

Shivisha soni self lover ����

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  • shivi_18 7w

    चाय ☕

    जिससे शुरू होती है हर इंसान की सुबह,
    और जिसपे खत्म होती है हर इंसान की शाम,
    मेरी ये रचना चाय की मीठी चुस्कियों के नाम.....

    बस एक प्याली चाय से ही,
    चुटकियों में दूर होती दिन भर की थकान.....
    कुछ लोग होते हैं इसके इतने दीवाने,
    कि बिना इसके नहीं शुरू कर पाते कोई काम.....
    रात में कोई विद्यार्थी जब लड़ता है अपनी नींद से,
    तब चाय ही लगाती है : उसकी नींद पे पूर्णविराम.......
    गले में हो खराश या फिर हो तेज जुकाम,
    चाय पीने से मिल जाता है, पल-भर में आराम....
    समाए हुए हैं इतने गुण इसमें, आती है ये इतने काम,
    तभी तो हर भारतीय की जुबां पर,
    रहता है बस चाय का नाम......
    ©shivi_18

  • shivi_18 13w

    Written by my favorite teacher- Dr. gitendra singh
    ������

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    कुछ सरहदें मन की भी हैं,
    कुछ मजबूरियां हालात की भी हैं,
    कुछ बेड़ियां समय की भी हैं.......
    दूर क्षितिज की और कुछ रोशनी भी है,
    सपनों की उड़ान बाकी अभी भी है.......
    तोड़ दे उन बेड़ियों को,
    जो तेरे कदमों को रोकती है....
    छोड़ दे उन बेबसियों को,
    जो तुझे सोचने से रोकती हैं......
    उड़ चल, आगे बढ़ लगातार,
    इस बार चल, चलें शिखर के पार......

  • shivi_18 13w

    उम्र चाहे कितनी ही ज्यादा क्यों ना हो,
    बीमार और परेशान होने पर सुकून तो मां की गोदी में ही मिलता है.........
    ©shivi_18

  • shivi_18 13w

    महादेव

    दुखी जनों के कष्टों का करते महादेव अंत,
    वो ही सबके भाग्य विधाता, वो ही आदि अनंत
    ©shivi_18

  • shivi_18 14w

    मेरी ख्वाहिश

    मेरी ये ख्वाहिश नहीं कि
    तुम्हारे साथ बड़े-बड़े शहरों में घूमने जाऊं....
    मेरी ये ख्वाहिश नहीं कि
    तुम्हारे साथ खड़े होकर आइसक्रीम खाऊऺ...
    मेरी ये ख्वाहिश नहीं कि
    हर हफ्ते तुम्हारे साथ सिनेमा हाल जाऊं.....
    बल्कि, इस उन्नीसवीं सदी की लडकी की बस यही ख्वाहिश है कि.....
    जब भी कभी मैं परेशान हो जाऊं ....
    तो तेरा ही साथ पाऊं.......
    मैं हूं ना तुम्हारे साथ......
    तुम्हारे कहे हुए लफ्जों में,
    बस यही अल्फ़ाज़ पाऊं..........
    ©shivi_18

  • shivi_18 14w

    जितनी कम उम्मीद रखोगे दूसरों से,
    उतना ही कम दर्द होगा दिल टूटने से।
    ©aka_ra_143


    जब कोई उम्मीद ही नहीं होगी किसी से,
    तो इस दिल का टूटना कैसा...........
    ©shivi_18

  • shivi_18 14w

    ज्यादा मत सोचो शिवी,
    अपने हालातों से लड़ना सीखो....
    हर वक़्त नहीं होगा कोई तुम्हारा दर्द बांटने के लिए,,
    बेहतर यही है की तुम खुद से ही संभलना सीखो........
    ©shivi_18

  • shivi_18 14w

    अपनी परेशानी अपना दर्द
    सब अपनी तनहाईयों से बयां किया,
    शायद वो बहुत busy होगा किसी जरूरी काम में,
    हर बार बस यही कहकर मैंने अपने दिल को समझा दिया.......
    ©shivi_18

  • shivi_18 14w

    कभी लिखे प्यार के नगमे,
    तो कभी गम भी बयां किया,
    पर आज वक़्त ने किए कुछ ऐसे सितम,
    की खामोशियों को ही अपनी आवाज बना लिया.......



    @hindiwriters, @hindinama

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    समझ नहीं आ रहा... क्या लिखूं मैं आज
    खामोशियों के साए में दब गए मेरे अल्फ़ाज़।
    ©shivi_18

  • shivi_18 14w

    दण्ड

    सजा उसे मिलती है जिसने कोई अपराध किया होता है,
    जी हां.... जहां तक मुझे पता है,
    सजा तो उन्हें मिलती है ना.... जिनका कोई कुसूर होता है,
    पर मैं स्तब्ध रह जाती हूं ये सोचकर...........
    कि....उस बेचारी हथिनी का क्या दोष था,
    जिसे तुमने पटाखों से भरा फल खिला दिया.....
    आखिर उसने क्या अपराध किया था,
    जो तुमने उसे दण्ड का भागी बना दिया........
    अरे, ओ निर्मम इंसान! अपने इस कुकृत्य के लिए,
    सबसे बड़े दण्ड का भागी तो..... तू है.........
    जिसने इंसान होने की गरिमा को कलंक लगा दिया......
    अरे, तू तो इंसान कहलाने के लायक ही नहीं है.......
    जिसने उस मूक जानवर के साथ - साथ ही,
    उसके अजन्मे बच्चे को भी मिटा दिया..........


    अरे तू किसी पे दया नहीं कर सकता ना.......
    तो मत कर........
    पर भगवान के लिए किसी भी असहाय पर ऐसे जुल्म मत कर.........

    तेरे बढ़ते हुए इन अत्याचारों ने बना दिया है तुझे निडर,
    किसी से ना सही....... पर उस खुदा से तो डर........
    ©shivi_18