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  • shivambhallasb 8w

    वफा की आरज़ू करने वाले,
    बेवफ़ाओं से जा मिले.
    जल जल के थक चुके थे दीपक,
    हवाओं से जा मिले.
    खिले कुछ फूल बाघ मे ऐसे भी,
    खिलते ही सहराओं से जा मिले.
    तू पीछे मुड़कर देखता है तो देखता क्या है शिवम?
    जो भी अपने थे सारे अंजान राहों से जा मिले.
    हाल मेरा अब मेरे बस के बाहर है,
    चाहता हूँ कभी तो मुझे भी किसी दरख्त की छाँव मिले.
    ©shivambhallasb

  • shivambhallasb 9w

    जिस तरह

    आज वो मुझे मुद्दतों बाद मिला है इस तरह,
    किसी डूबते को किनारा मिला हो जिस तरह.
    उसे देख कर आंखों को सूकून आजाये,
    लोग देखते है डूबता हुआ सूरज जिस तरह.
    किस तरह से कम होगी ये दिल की बेचैनी?
    वो किसी और को वैसे ही देखता है,
    मैं उसे देखता हूँ जिस तरह.
    हम तो तेरे हिज्र मे ही मर जाएंगे,
    तू घर से निकलते हुए आईना देखता है जिस तरह.
    है मेरी दुआ ये तुझे,
    वो भी तुझे वैसे ही नसीब हो
    तू मुझे नसीब हुआ था जिस तरह.
    ज़िंदगी कब किसी के बस मे है,
    गुज़री वैसे हमने कभी सोचा ना था जिस तरह.
    एक शख़्स के हाथ मे था सब कुछ,
    मेरा हँसना, रोना, सुख और दुख.
    वो मुझे रखता था वैसे वो चाहता था जिस तरह.
    ©shivambhallasb

  • shivambhallasb 18w

    कर सकते हैं

    रात गहरी है हम डर भी सकते हैं,
    जो हम कहते हैं वो कर भी सकते हैं.
    तेरे इश्क़ ने किया हमको पागल,
    हम हद से गुज़र भी सकते हैं.
    जो बचपन से रहे पिंजरे मे कैद,
    उन्हें कौन बताए की परिंदे उड़ भी सकते हैं.
    हमने दरियाओं से दोस्ती कर ली है जाना,
    हम वो तैराक है जो डूब के उभर भी सकते हैं.
    वादा तो था उसका हमारे साथ ताउम्र रहने का,
    हम भूल गए थे इंसान वादों से मुकर भी सकते हैं
    तोड़ कर चले गए वो दिल हमरा,
    कुछ टूटे हुए रिश्ते जुड़ भी सकते है.
    ज़ख्मों की फ़ितरत है घड़े जैसी,
    इन्हें वक़्त के साथ भर भी सकते है.
    ज़िंदगी अपने आज मे जीने का नाम है,
    कल का क्या भरोसा हम मर भी सकते हैं.
    ©shivambhallasb

  • shivambhallasb 18w

    वो अक्सर दिखाई दे जाता है मुझे ,
    मेरे घर के रास्ते मे उसका घर पड़ता है.
    उसके आँगन मे तितलियों का आना जाना है,
    उसके घर के बाजू मे फ़ूलों का बाघ पड़ता है,
    उससे नाराज़गी है भी और नही भी,
    वो मेरे ख़त नही पढ़ता ग़ज़लें पढ़ता है.
    महक उठती है मिट्टी उसके चलने से,
    जब वो पायल बंधा पाँव ज़मीन पे पड़ता है.
    बात मुझे ये सताती है कि हम प्रेमी नहीं है,
    लेकिन जब भी उदास हो तो मुझसे लिपट पड़ता है.
    मेरी तरह उसे भी है शायरी से मोहब्बत,
    मैं जौनं को सुनता हूँ, वो फराज़ को पढ़ता है.
    रकीब मुझसे उसके घर का पता पूछते है,
    मैं भी बता देता हूं कि मेरे घर से दो घर पहले उसका घर पड़ता है.
    हाँ मैं उसे चाहता हूँ लेकिन चुप रहता हूँ,
    मेरे चाहने ना चाहने से क्या फर्क पड़ता है?
    मेरे नाम पे रखा है उसने अपने लड़के का नाम,
    और अब वो लड़का मुझसे ट्यूशन पढ़ता है.
    ©shivambhallasb

  • shivambhallasb 19w

    हिज्र

    ये लोग मेरा दर्द समझ सकते ही नहीं,
    मैं अपने सारे ज़ख्म तुझे दिखाऊंगा.
    अपनी धुन मे चलते रहे कारवां हर रास्ते पर,
    मुझे डर लगता है मैं पीछे रह जाऊँगा.
    उसने बना ली है दूरी मुझसे कुछ इस कदर,
    मैं ये सोच के रोता हूँ मैं अकेला रह जाऊँगा.
    अब मुझ पे फल नही लगते, ना ही किसी को छाँव दे पाता हूं
    लगता है इस पतझड़ मै काटा जाऊँगा.
    जाते जाते घर वापिस मैं अक्सर ये सोचता हूँ,
    इतनी शराब पीकर भला मैं घर कैसे जाऊँगा
    ©shivambhallasb

  • shivambhallasb 19w

    चलने लगे हवा के साथ,
    हम चारों दिशाओं के हो गए.
    पसंद आया हमे बहना दरिया का,
    बहने की चाह मे हम भी दरियांओं के हो गए.
    किसी की जुल्फें, किसी की आँखें तो किसी के गाल पसंद आए,
    बदलते वक़्त के साथ बदलती अदाओं के हो गए.
    जिस तरह खिलता है गुलाब काटों के साथ,
    हमने देखा वफा करने वाले बेवफ़ाओं के हो गए.
    किसी ने अछा किसी ने बुरा बोला हमे,
    हम भी लोगों की वासनाओं के हो गए.
    ज़िंदगी कब किसी के बस मे है?
    हम भी बेबसी की राहों के हो गए.
    सुना था इश्क़ करने वाले दुआएं मांगते है,
    हम उसके तो ना हुए उसकी दुआओं के हो गए.
    ज़िंदगी और वक़्त दोनों रहे मेरे खिलाफ़,
    ना जाने कितने ही गुनाहों के हो गए
    ©shivambhallasb

  • shivambhallasb 20w

    बेवफ़ा

    मजबूरी के किस्से नहीं बताऊँगा मैं,
    ना ही अपनी दास्तान सुनाऊँगा.
    अपनी गवाही मे कुछ पेश नहीं करना मुझको,
    उसके खिलाफ़ कोई दलीलें नहीं सुनाऊँगा.
    क्या कुछ नहीं हो सका ये नहीं बताना मुझको,
    क्या कुछ हो सकता था ये भी नहीं सुनाऊँगा.
    आज इस महफ़िल मे अपना दर्द नहीं सुनाना मुझको,
    और ना ही कोई ग़ज़ल मैं आज सुनाऊँगा.
    थक के लौट आया हूँ अपने घर,
    और खुद से ही ख़फ़ा हूँ.
    मैं मानता हूँ, मैं बेवफ़ा हूँ.
    ©shivambhallasb

  • shivambhallasb 21w

    हम

    आदत हो चुकी थी तेरी यादों मे रहने की,
    पता नहीं जी रहे थे या मर रहे थे हम.
    जिंदगी फन भी रही और ग़मों का सिलसिला भी,
    तेरी तस्वीरों से बाते कर रहे थे हम.
    कुछ इस तरह से हुई ज़िंदगी बसर,
    पूरी ज़िंदगी तेरी याद बसर कर रहे थे हम.
    थी तमन्ना खुद को बरबाद करने की,
    उसकी जुल्फों को छुआ और तूफानों मे सफर कर रहे थे हम.
    ©shivambhallasb

  • shivambhallasb 21w

    Khayal

    तुझे याद करते हुए ऐसा मेहसूस होता है,
    जैसे सालों से पड़ी बंजर ज़मीन पे बारिश की पहली बूंद गिरे,
    जैसे वो मिट्टी फिर से खिल उठे उसके होने का उसे खुद एहसास हो जाए, खुशबू से पूरा गाँव महक जाये.
    किसी गरीब किसान को दो वक्त की रोटी फिर से नसीब हो जाये.
    तुझे याद करते हुए ऐसा मेहसूस होता है,
    जैसे सालों से खाली पड़े मकान मे कोई फिर से रहने आजाये, दीवारों का अकेलापन दूर हो जाए, कमरों में फिर से उजाला हो जाए, ज़मीन से धूल की चादर साफ़ हो जाए,
    अंगना बच्चों की किलकारियों से महक जाए.
    किसी बेघर बंजारे को जैसे सर पे छत मिल जाए.

    तुझे याद करते हुए ऐसा मेहसूस होता है जाना,
    जैसे दिसम्बर की सर्दी मे कदमों को गर्मी का साया मिल जाए
    राह भटके मुसाफिरों को मंज़िल मिल जाए,
    भरे रेगिस्तान मे किसी प्यासे को जैसे पानी मिल जाए,
    जैसे किसी माँ को अपना खोया हुआ बच्चा मिल जाए.

    तुझे याद करते हुए ऐसा मेहसूस होता है,
    जैसे किसी कवि को नयी कहानी मिल जाये..
    ©shivambhallasb

  • shivambhallasb 21w

    Fareb.

    थोड़ी सी खुशी थोड़ा सा इश्क़ और कुछ वक्त मांगते हैं,
    तू ही बता हम क्या ज्यादा मांगते हैं?
    हुआ इस तरह से मेरा नाम,
    रकीब मुझसे उसके घर का पता मांगते हैं.
    बेवफ़ाओं की महफिल थी सो हम भी जा पहुंचे,
    हैरत है कुछ लोग आज भी वफा मांगते है.
    किसी को उसकी आँखें तो किसी को उसके गाल पसंद आए,
    दुआओं मे हम आज भी उसे पूरा मांगते है.
    वो दिन ही कुछ और थे जो उसकी यादों में गुज़र गए,
    आज कल के बच्चे इश्क़ के नाम पर ना जाने क्या क्या मांगते है..
    ©shivambhallasb