shalonika

*suno* simple sudden thinker.. just beginner ��

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Reposts
  • shalonika 84w

    Happy birthday

    जब जब तू मेरे लिए बड़ा बनता है,
    हमेशा ही राखी का हक करता है

    ©shalonika

  • shalonika 84w



    खुद को पीछे रख आयी है वो, जी हां
    आज मायके से ससुराल आयी है वो


    ©shalonika

  • shalonika 85w

    राब्ता

    राब्ता टूट गया कलम से लेकिन
    तुझे पढ़ना आज भी पसंद है

    ©shalonika

  • shalonika 103w

    फूल की खूबसूरती डाली से जुड़े रहने में ही है

    ©shalonika

  • shalonika 103w

    इन दिनों

    हर रोज हस कर, मेरा दिल तोड कर
    किसी और का हो गया है वो इन दिनों
    किसी और की दुनिया में रंग भरते भरते
    मेरी तस्वीर धुंधली कर गया वो इन दिनों
    उसके कदमों की चाल से वाकिफ थी मैं
    खुद को रास्ते से हटा दिया मैंने इन दिनों

    ©shalonika

  • shalonika 115w

    मुलाकात...

    कुछ लेन देन रह गया है..लगता है
    एक मुलाकात होना अभी बाकी है

    ©shalonika

  • shalonika 124w

    वाह रे मन

    मानते हैं उन्हें दोस्ती से प्यार है
    हम भी कभी दोस्त हुआ करते थे
    अब कहते है उनकी भी जिंदगी है
    उनके भी अपने दोस्त है,आखिर
    कब तक तुम्हारे पीछे भागते रहेंगे
    मगर हम तो यही सोचकर बैठे है
    कि अब भी हम उनके दोस्त है

    ©shalonika

  • shalonika 128w

    कुछ....

    नए पन्नों पर,
    कुछ पुराना सा .....
    कुछ दर्द सा ....
    कुछ सुकून सा .....
    कुछ मुझ सा .....
    और कुछ तुम सा ......
    कुछ लिखा करती हूं
    लिख कर मिटाया करती हूं


    कुछ बात सा .......
    कुछ याद सा ....

    ©shalonika

  • shalonika 129w

    इश्क़

    इश्क़ के क्या अजीब दस्तूर है
    जिसने पहले इजहार किया
    इश्क़ उसी का हो गया

    ©shalonika

  • shalonika 130w

    @raaj_kalam_ka @trickypost @shalinivarshney @riyaswarnkar @ramaiyya @kusumsharma @deepajoshidhawan @kishor634 @rangkarmi_anuj @satender_tiwari_brokenwords

    Mirakians . Me khi gyi nhi hu yahi hu AJ kuch dosto ne kha ki me kho gyi hu mgr me busy hu ...kuch time bad continue aungi ...likhna shok h or mirakee pr likhna acha lgta h

    ..kuch likha tha phle ....purana h ...I hope u like it

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    जब जब ह्दय वेदना से भर जाता है
    तब तब कलम दराजों से झाँकती है
    और कहती है मुझसे जागो कवि
    क्यूँ मुहँ फेर तू चुपचाप बैठा है

    किस कदर फैली अातंकी नीचता है
    देश का ही बंधु, देश को घसीटता है
    जागो कवि! क्यूँ तू आँखे मीचता है
    दैत्य आतंक दुपट्टा माँ का खींचता है

    ये घाटियां,सालों से सुनती आयीं है
    अब तुमको भी प्रतिध्वनि सुनाती हैं
    कहती है जागो कवि, लिखो चीख
    नहीं ,,जन जन को दहाड़ लगानी हैं

    ©shalonika