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Reposts
  • shalinivarshney 96w

    अंदर-बाहर

    मेरे अंदर कुछ जमता,
    और बाहर कुछ पिघलता है।
    ये आँखों के कोरो पर,
    जमावड़ा कैसा है।
    मेरे अंदर ये शिथिलता,
    और बाहर उठता सैलाब है।
    ये मेरे हृदय पर,
    भार कैसा है।
    मेरे अंदर शून्य सा जीवन,
    और बाहर सैकड़ो लिये हुए है।
    ये मेरे अस्तित्व पर,
    अधिकार कैसा है।
    ©shalinivarshney

  • shalinivarshney 97w



    हे सुनो,
    आज तुम्हारे सीने से लगकर,
    अपने सारे राज बयां करने का दिल कर रहा है,
    तुम अपने सीने से मुझे लगओगे ना,
    आज तुम्हारी बाँहों में ठहर कर,
    खुद को तुम्हारी बाँहों में पिघलने का दिल कर रहा है,
    तुम मुझे अपनी बाँहों में मुझको भरोगे ना,
    तुम्हारे कंधे पर अपना सिर रखकर,
    अपने कुछ आसुँ से तुम्हारा कंधा भिगोना है,
    तुम मुझे अपना कंधा दोगे ना,
    तुमको अपने सामने बैठाकर,
    तुमको अपनी आँखों में समेटना है,
    तुम मेरे सामने कुछ पल के लिए बैठोगे ना ।
    ©shalinivarshney

  • shalinivarshney 101w



    सो तो जाती हैं, मुझसे रुठ कर भी वो...
    मगर ओढ़ती है, मेरी बाहों का लिआफ ही वो...
    ©shalinivarshney

  • shalinivarshney 108w

    पन्ने

    अतीत के कुछ पन्ने,
    जो ना जाने क्यों लिख गए थे,
    जो ना जाने किन एहसास में सिमट गए थे,
    जो ना जाने बिन चाहत के ही भर गए थे,
    जो ना जाने क्यों लिख गए थे,
    जिन पन्नो को मैंने खुद अधूरा छोर दिया था,
    जिन पन्नो पर मैं खुद कोई इबारत नही लिखना चाहती थी,
    जिन पन्नो को में खुद कहीं दबाकर भूल आई थी,
    ना जाने आज फिर क्यों,
    इन सर्द हवाओ ने उन पन्नो को पलट दिया,
    ना जाने आज फिर क्यों,
    मैं उन पन्नो की तरफ बढ़ चली,
    ना जाने आज फिर क्यों,
    मैं उन पन्नो का दर्द महसूस करने लगी,
    ना जाने आज फिर क्यों,
    मैं उन पन्नो को पढ़ने लगी,
    जो ना जाने क्यों लिख गए थे,
    अतीत के कुछ पन्ने।
    ©shalinivarshney

  • shalinivarshney 109w



    खत में कुछ शब्द और कुछ शब्दों में सिमटा एक खत
    कहने की शायद उसके लिये कुछ पन्ने होंगे वो
    मगर मेरे लिये एहसास से लिपटी मेरी साँसे थी
    जो मुझसे छीन ले गया वो,
    कहने को शायद उसके लिये वो कुछ शब्द होंगे जो उसने लिखे थे कभी मेरे लिये
    मगर मेरे लिये मेरी रूह पर उकेरे उसकी उंगलियों से लिखे अल्फ़ाज़ थे
    जो मुझसे छीन कर ले गया वो,
    कहने को शायद उसके लिए उन पन्नों पर लिखी कुछ बातें होंगी जो कभी मुझे की होंगी उसने
    मगर मेरे लिये मेरे दिल में धड़कते उसके लफ्ज़ थे जो उसने सिर्फ मुझसे कहे थे
    जो मुझसे छीन कर ले गया वो,
    कहने को तो उसके लिए महज़ वो सिर्फ कागज़ ही थे जो उसने दिए थे मुझे
    मगर मेरे लिए मेरी ज़िन्दगी का अनमोल हिस्सा थे जो मैने सिर्फ जिया था उसके साथ
    जो मुझसे छीन कर ले गया वो।
    ©shalinivarshney

  • shalinivarshney 118w



    रिवायत रही है इश्क़ की हमेशा से
    यादों के धागों से ख्वाबो को बुना गया है।
    ©shalinivarshney

  • shalinivarshney 118w

    ....

    हर किसी के अल्फाज़ो में सजती हैं वो....
    लेकिन खुद को किसी और के ही लफ़्ज़ों में समेटना चाहती है वो.…
    ©shalini

  • shalinivarshney 119w



    ना ही खुली है, ना ही बंधी है,
    बस खुद में ही सुलझी उलझी खड़ी है।
    ©shalini

  • shalinivarshney 122w

    बेहद

    हदों में रहकर भी, बेहद प्यार कर रही हूँ मैं
    ये किस क़दर, अपनी ज़िन्दगी आबाद कर रही हूँ मैं
    ©shalini

  • shalinivarshney 122w

    तुम

    क्या हो तुम,
    किसी के लिये सुबह की शुरुआत हो,
    मेरे लिये सुबह और रात के मिलन वाली शाम हो तुम।
    किसी के लिये शुन्य से शुरू हो रही हो,
    मेरे लिए मुझमें अनन्त हो तुम।
    किसी के लिये नया जाम हो,
    मेरे लिये पुरानी होती मय हो तुम।
    किसी के लिये नदी हो,
    मेरे लिये मुझमे खामोश समुंदर सी हो तुम।
    किसी के लिये नई ज़िन्दगी की शुरुआत हो,
    मेरे लिये मेरी ज़िन्दगी का अंत हो तुम।
    ©shalini