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  • shalinivarshney 42w

    इंतज़ार

    ऐसा भाव है, या कहे कि एक ऐसी क्रिया जो हम सभी ने अपने जीवन में की है और करते भी रहते हैं।
    इंतज़ार रहता है,एक सैनिक की बीवी को जंग से उसके घर लौटकर आने का....
    इंतज़ार रहता है, एक माँ को अपने बेटे को अपने सीने से लगाने का...
    इंतज़ार रहता है, एक प्रेमिका को अपने प्रेमी के इज़हार करने का...
    इंतज़ार रहता है, एक दोस्त को अपने दोस्त की वक़्त वे वक़्त दोस्ती निभाने का...
    इंतज़ार रहता है, एक पिता को अपनी बेटी के मायके आने का...
    इंतज़ार रहता है, एक बहन को अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने का....
    इंतज़ार रहता है, फूलों को बसन्त ऋतु में खिलकर अपनी खूबसूरती बिखरने का...
    इंतज़ार रहता है, बिना किसी के कहे उसका दिन के चारो पहर, घड़ी के हर टिक टिक पर दिल की तेज धड़कन होने का, उसकी एक हल्की सी मुस्कान देखने का,
    किसी की आवाज़ सुनकर दिल को सुकून आने का....
    ऐसे ही न जाने कितने कहे और अनकहे इंतज़ार होते हैं, जो हम करते है बिना किसी के ये कहे कि हमारा इंतज़ार मत करना...
    ©shalinivarshney

  • shalinivarshney 77w

    इश्क़

    इश्क़-ए-रंज में महज़ इतना ही सुकून मिला,
    उसकी एक छुअन से इस दिल को मरहम मिला..
    ©shalini

  • shalinivarshney 77w

    ...

    मेरे हर दर्द की दवा है, वो
    इस बात से महरूम नहीं है, वो
    फिर क्यूँ मेरे दर्द-ऐ-तपिश में ,
    मौजूद नही है, वो
    ©shalini

  • shalinivarshney 78w

    ख़्याल रखना अपना

    ख्याल रखना अपना....
    न रखूं तो,
    क्या आ पाओगी मेरे मन मे उठती टीस को अपने गर्म हथेलियों के स्पर्श से शांत करने,
    न रखूं तो,
    क्या आ पाओगी मेरे बालों को अपनी नरम उँगलियो से सहलाने,
    न रखूं तो,
    क्या आ पाओगी मेरी उलझी बातो को अपनी सुलझी बातों से सुलझाने,
    न रखूं तो,
    क्या आ पाओगी मेरी आँखों से भागती नींद को अपनी गोद का स्नेह भरा तकिया देने,
    न रखूं तो,
    क्या आ पाओगी मेरे हृदय पर पड़े छालो पर अपने प्रेम का आलिंगन देने,
    न रखूं तो,
    क्या आ पाओगी मेरी अंतिम सांसो के उन क्षणों पर जहाँ मेरी आँखें सिर्फ तुम्हें देखने भर को खुली होंगी और उनसे बहते नीर को बस तुम्हारे आँचल का एक छोर चाहिय होगा कि मैं उसमें समेट सकूँ अपनी जीवन भर की थकान और मूंद अपनी आँखें हो जाऊं अनन्त से शून्य
    न रखूं तो,
    अपना ख्याल ...
    बोलो क्या आ पाओगी...
    ©shalini

  • shalinivarshney 78w

    क्या कहूँ अब इन पंक्तियों के बारे में बस इतना ही कहूंगी आप सभी परिचित होंगे इन वाक्या से इस कविता में जो मैं कहना चाहती उससे भी ..बस थोड़ी कोशिश की है मैने मेरे मन उमड़ते एहसासों को व्यक्त करने की उम्मीद करती हूं आपको पसंद आये और आशा करती हूं कि आप भी अपने भाव मुझे बताये।�� #life #inspiration #diary #thoughts

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    एक लड़की साहसी सी...

    नन्ही थी सी वो , चहचाहती चिड़िया सी,
    अपनी माँ की प्यारी सी, पापा की दुलारी सी,
    घर के आँगन मे खिलखिलाती गुड़िया सी,
    दादा के साथ खेलती थी, दादी के साथ झगड़ती थी,
    बड़ी हो रही थी, ऐसे जैसे आँगन में बढ़ती है तुलसी सी,
    फिर उसके सपनो ने उड़ान भरी न्यारी सी,
    उसने अपने मन में ठानी दुनिया को कुछ अलग कर दिखाने की,
    अपनी सोच समझ अपने ढंग से आगे बढ़ने की,
    अपने सपनों को सच करने की राह में बढ़ रही थी,वो अनजान सी,
    नादान थी, समझती न थी ये दुनिया है बहुत बेरहम सी,
    लोगो को खटकने लगी थी, उसकी बेवाकी मासूमियत भरी सुंदरता भी,
    वो भूल गई थी, थी तो एक लड़की अभागी सी,
    इस पुरूष प्रधान देश में जी रही थी नादान सी,
    मगर लड़की थी, वो खुद्दार और हिम्मती भी,
    लोगो को रास ना आई उसकी ये बेवाकी सी,
    बहुत कोशिशे की उसको तोड़ने की,
    वो चीखी चिलाई झाँसी की रानी सी,
    उसने सोचा खत्म हुआ ये किस्सा भी,
    बढ़ने लगी अपनी राह पर फिर से अनजानी सी,
    रात के अँधेरे में बुन रही थी, अपनी खव्हबो की दूनिया सी,
    फर दंरिन्दों ने अपनी दरिंदगी का खेल खेला,
    उस लड़की के ऊपर कायरपन फेंका,
    सब सपने झुलस गये, सपनो के पंखों में लग गई जैसे आग सी,
    मगर लड़की थी, वो साहसी सी
    लड़ी हर पीड़ा से वो कई सालो तक,
    हिम्मत दिखाई इस पुरुष प्रधान देश ,अपने हक के लिए लड़ने की,
    उसने मांगी म्रत्यु क्योंकि थी, तो वो एक लड़की साहसी सी।
    ©shalini

  • shalinivarshney 78w

    ....

    सुनो
    आज फिर तुम्हारे अहसासों ने मुझे जगाया है...
    तुम्हे छू कर जो हवा थी गुज़री उसने आज मुझे फिर महसूस कराया है,
    चूम तो लिया था मैंने उस दिन तुम्हारा माथा लेकिन आज फिर मैंने अपनी धड़कनो को तेज पाया है,
    आज फिर तुम्हारे अहसासों ने मुझे जगाया है...
    बारिश तो नही हो रही थी उस वक़्त,
    तुम्हारे साथ बीते लम्हों ने आज मुझे फिर भिगाया है,
    वाहों में तो भर लिया था मैने उस दिन तुमको,
    मैंने अपनी साँस की महक में आज फिर तुमको पाया है,
    आज फिर तुम्हारे अहसासों ने मुझे जगाया है...
    सर्द रात तो नहीं थी उस वक़्त,
    मुझे उस वक़्त की गरमाहट ने आज फिर सताया है,
    चूम तो लिए थे मैंने उस दिन लब तुम्हारे,
    मैंने अपने लबों पर आज फिर उस गर्म मय का नशा पाया है,
    आज फिर तुम्हारे अहसासों ने मुझे जगाया है...
    ©shalinivarshney

  • shalinivarshney 79w

    बातें

    बातें ही सब कुछ नहीं होती,
    तो तुम ही कहो न,
    इस दूरी में तुम्हारी और मेरी ,
    तन्हाइयो को दूर करने का,
    तो तुम ही कहो न,
    कोई और हल है तुम्हारे पास।
    ©shalini

  • shalinivarshney 83w

    ....

    मेरी चीखे कहा सुनी होगी उसने ,
    उसे तो हर पल लगा कि मेरे साथ हर वक़्त कोई है।
    ©shalinivarshney

  • shalinivarshney 83w

    ....

    जिस्म को टटोला उसने रात भर,
    जब बारी रूह की आई तो थक कर सो गया वो।
    ©shalinivarshney

  • shalinivarshney 86w

    ❤️

    अच्छा हुआ जो हमारे बीच कुछ बाते अनकही रह गई ,
    क्योंकि कही हुई बाते भी कहाँ याद रखी तुमनें।
    ©shalinivarshney