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  • sh12345 14w

    सुरूर

    साकी से तैश में आ बैठे थे वो,
    मैखाने में सुरूर ढूंढने निकले थे जो।
    मगर अक्सर, अक्सर भूल जाते हैं वो,
    नशा चौराहों पे नहीं, महबूब की आखों में मिलता है।
    जो नसों में नहीं, सर चढ़कर बोलता है,
    रातों को हसीन,सवेरों को जवां बताता है।
    कीमत में सितम, रंज ओ ग़म के सिवा भला क्या चाहता है,
    मगर याद रहे ये मोहब्बत का सुरूर दोस्तों ,दीवानों को दिवालिया भी बनाता है।



    - श्वेता

  • sh12345 24w

    अगर भर सको तो भर लो
    जेब, झोले, बैंक,भगोने सब भर लो,
    जी भर गया तो क्या गला भरने तक खाओ
    क्या पता तुम जी जाओ, सह जाओ, जीत जाओ ।
    कल का सूरज तुम्हें सलाम करेगा,
    आने वाला समय गुणगान करेगा।

    हां मगर..हजारों लोगों का हक मारकर, इंसानियत दफनाकर,
    जीती जिंदगियो को जलाकर, अगर सजा सको तुम अपना कल,
    बना सको अपना आशियां और नकार सको यथार्थ ।

    तो भर लेना वो अखरी कोना भी , जहां संवेदना बाकी है।




    श्वेता ।

  • sh12345 60w

    मेरे सीने को आराम है,तेरी यादों का मरहम जो साथ है
    किस्से,कहानियां, भी तैयार हैं बस तेरे आने का इंज़ार है।

  • sh12345 68w

    ये जो आंखें मेरी नम है,ये हकीकत है या वेहेंम है
    मैं तो जान हुआ करती थी,फिर ये किसके दिए ज़ख्म हैं।
    दर्द इतना गहरा है दिल में, मेरे लफ़्ज़ उलझ गए हैं
    मेरा सुकून कहां ढूंढूं मैं, मेरा आशियां बिखर गया है।






    श्वेता ।

  • sh12345 68w

    My soul is a tenant of the body
    My Skin is just a blanket to known
    Thoughts are immortal like my
    Imaginations the only place I consider my own.

  • sh12345 71w

    Raise your voice

    It's not all about men who do such things but also about women who don't say anything and then she could be both "the victim or the witness"
    Today I want to grab your concern towards "gender base violence". Where covid 19 is effecting the various dimension of health among people, women are feeling it twice first over their body and then on their mind, violence isn't the key of self relaxation but the report of National commission for women says it all that it doesn't matter whether you are educated, literate, illiterate, poor or rich. These so called powerful implicitly cowards will always there to cage you behind the patriarchal bars of superiority . Raise your voice otherwise it will too late to realize .

  • sh12345 73w

    कैसा दिल है तुम्हारा जो दहकता नहीं
    दो ज़िंदगियां तबाह की और माथे पर शिकन तक नहीं
    वो मासूम चीख रही थी उसकी कोख लहूलुहान पड़ी थी सांसे सिसक रही थी उसकी तुमको सच्चा समझ रही थी
    कोसो दूर खड़ी थी तुमसे पर खुद को दोषी देख रही थी ।


    - श्वेता ।

  • sh12345 74w

    चौदह दिन

    किसी मासूम ने शिकायत की होगी,
    खुद को जवां होता देख कोसती होगी।
    झोपडी अलग थी बर्तन भी, कपड़े अलग और चूल्हा भी
    ना कोई मिलने आता था ना मेरे हाथ का बना खाता था
    पांच दिन पांच साल सा लगता था जब कोई अपना दूर से देख सीधा निकल जाता था वहीं दर्द से सब कांप उठता था।

    वो माहवारी थी या थी महामारी, लोग अछूत बना देते थे
    ये खालीपन अब तुम्हारे हवाले 5 नहीं 14 दिन कोरोना वाले।




    - श्वेता

  • sh12345 74w

    रण में होकर चिरंजीवी घाट उतारे शत्रु परजीवी
    सव्यसाची के पुत्र विशेष अभिमन्यु तुम सबसे श्रेष्ठ


    श्वेता ।

  • sh12345 74w

    आज़ादी की चाह रखने वाली मैं, तुम्हे कैद करने लगी
    मुहब्बत नहीं हो सकती ये बस सिलसिला है चाहतों का ।



    श्वेता ।