saurabh_tiwari_vindhyanchal

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  • saurabh_tiwari_vindhyanchal 61w

    तन्हा तन्हा छोड़ा सबने......
    एक ग़ज़ल आप सभी के समकक्ष कृपया अपना प्यार और सुझाव दे������

    Fb��:- Saurabh Tiwari "vindhyanchal'
    Insta��:- tiwari_saurabh8982

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    ग़ज़ल

    तन्हा तन्हा छोड़ा सबने
    राह में मुंह मोड़ा सबने

    एक हसीं, राहों के सपने
    देकर हमको तोड़ा सबने

    प्रेम जगत अब लगे छलावा
    कह कर अपना छोड़ा सबने

    एक जुर्म का झूठा किस्सा
    गढ़ कर हममें, तोड़ा सबने

    ✍ सौरभ तिवारी "विंध्यांचल
    ©saurabh_tiwari_vindhyanchal

  • saurabh_tiwari_vindhyanchal 65w

    जीवन में संघर्ष है और नित नई चुनौतिया भी..लड़ते रहना अपना धर्म डटे रहे ...लड़ते रहे ��

    ��Fb: saurabh tiwari"शनि"
    ��Insta: tiwari_saurabh8982

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    अर्जुन होंगे

    उम्मीदें गोते खाती मन के भवसागर में
    मंजिल अपनी कब होगी जीवन के अंगारो में

    दौर जवानी में ताने खाए संघर्षों के साये में
    चुप्पी साधे, मौन पड़े, जीवन के अंगारों में

    सपनों के भी अपने सपने ,दौर जवानी रंगो में
    मन को साधे लक्ष्य अग्रसर जीवन के अंगारों में

    सपने अपने सच होंगे इस जगत जात कि मिथ्या में
    हम भी रण के अर्जुन होंगे,जीवन के अंगारों में



    सौरभ तिवारी "विंध्याचल"
    ©saurabh_tiwari_vindhyanchal

  • saurabh_tiwari_vindhyanchal 66w

    मुक्तक

    शीतल शाम में मायूसी का न हो कोई पर्दा
    सूरत से नहीं सीरत से सुंदर हो कोई अपना

    जो द्वंद के भीतर कोलाहल पीर को समझे
    समझे दर्द ग़ज़लों का ऐसा हो कोई अपना

    सौरभ तिवारी "विंध्यांचल"

    सीरत - गुण, सभाव
    कोलाहल- शोर
    ©saurabh_tiwari_vindhyanchal

  • saurabh_tiwari_vindhyanchal 68w

    बुजुर्ग

    बुजुर्ग न हो घर में, परंपराएं कौन याद रखेगा
    घर बेटे हो गए परदेशी, गांव कौन याद रखेगा

    बरगद के पेड़ के नीचे वो जो चौपाल होती थी
    नहीं होंगे बड़े बूढ़े वो शाम कौन गुलज़ार रखेगा

    सौरभ तिवारी "विंध्यांचल"

    ©saurabh_tiwari_vindhyanchal

  • saurabh_tiwari_vindhyanchal 90w

    पालघर की घटना निश्चित रूप से बेहद क्रूरतम घटना है ,इस वेदना को की तरह से व्यक्त करु ये नहीं समझ पा रहा ,परंतु लिखने का प्रयास किया है ,ये घटना भारत बोए जा जहर का प्रतिबिंब है ,ये सनातन धर्म पर सीधा आक्रमण है , मन इसलिए भी व्यथित है क्योंकि इस घटना को महज एक अफवाह मात्र बता कर धूल झोंकी गई ��

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    पालघर

    हे नाथ अवतार धरो अब
    दुष्टों का संहार करो अब
    मानवता पथ त्याग चुकी है
    दानवता के प्राण हरो अब

    धर्म कर्म से रूठ रहे सब
    संतो पर सब टूट रहे अब
    अट्टहास से दंभ भर रहे
    दानव का संहार करो अब

    हे नाथ अवतार धरो अब
    दुष्टों का संहार करो अब

    भय में जीवन काट रहे सब
    मानव का संत्रास हरो अब
    हर पथ पर है एक रावण
    रावण का संहार करो अब

    हे नाथ अवतार धरो अब
    दुष्टों का संहार करो अब

    ✍️ सौरभ तिवारी "विंध्यांचल"

    ©saurabh_tiwari_vindhyanchal

  • saurabh_tiwari_vindhyanchal 94w

    अपने ही मन के मध्य उपजे दद्वं की कहानी का एक मुक्तक ����
    अगर आपको अच्छा लगा तो अपना आशीर्वाद और समर्थन����

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    जीवन युद्ध

    फिर रहे है हम यहां मोक्ष की तलाश पर
    पर डर रहे हम यहां कर्म धर्म की राह पर

    कुरूक्षेत्र में है हम खड़े युद्ध की राह पर
    श्रीकृष्ण हमसे कह रहे अड़े रहो धर्म राह पर

    ✍️ सौरभ तिवारी "विंध्याचल"
    ©saurabh_tiwari_vindhyanchal

  • saurabh_tiwari_vindhyanchal 94w

    Stay home
    संकट कि इस घड़ी में घर में रहे ,लोग बॉर्डर में है ,हॉस्पिटल में है ,आप घरों में रहे ,यही सच्चा राष्ट्रवाद है और यही सच्ची राष्ट्रभक्ति ����

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    कोरोना

    मत समझो आसान इसे
    ये मौतों का सौदागर है

    बंद पड़े संस्थान सभी
    ये खतरे कि परिभाषा है

    प्रधान करे विनती सबसे
    सहयोग की तुमसे आशा है

    पड़े रहो तुम घरों में अपने
    यही देशप्रेम की गाथा है

    ✍️सौरभ तिवारी "विंध्याचल"
    ©saurabh_tiwari_vindhyanchal

  • saurabh_tiwari_vindhyanchal 97w

    दिल्ली के दंगो ने एक बार फिर सिद्ध किया कि मानवता धार्मिक उन्माद के आगे बेबस और लाचार है ,और एक ओर दिल्ली हिंसा एक उन्मादी विचाधारा की सोच का नतीजा और महज कुछ नहीं,अगर सविधान की बात करते हो तो उसका पालन भी करो����

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    दंगा (हिंसा)

    दंगे जला देते है घर बार साहब
    सियासत करती है बबाल साहब

    जेहादी उन्मादी सोच के साहब
    पिता की मेहनत जला देते है साहब

    बेटा जो निकला वतन के खातिर
    आंतों में छूरा घोंप देते है साहब

    मंदिर मस्जिद सब ने मिल के बचाई
    फिर क्यों आपस में सब लड़ते है साहब

    जलती है दिल्ली तो दिल भी जलता है
    क्यों लोगो ने घर में आग लगाई साहब

    @सौरभ तिवारी "विंध्याचल"
    ©saurabh_tiwari_vindhyanchal

  • saurabh_tiwari_vindhyanchal 105w

    देश की मौजूदा स्थिति और जेएनयू में हो रहे छात्र गुट की हिंसा पर विचार रखे है ,सच का गला घोंटने में माहिर लेफ्ट आज सच्चाई का चोला ले के फिर रहे है ,बहुत हास्यप्रद है परंतु उससे जायदा चिंताजनक क्युकी ये तो आमादा हो उठे।

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    राजनीति और देश

    देखा है भला भी ,बुरा भी हमने
    हर वक़्त सच ही खड़ा मिला कचहरी में

    हुकूमतों का विरोध भी देखा हमने
    मगर मानो सच मर रहा हो जैसे हर गली में

    विरोध की अग्नि में जल रहा देश भी देखा
    मानो छूरा घोंप दिया गया हो जैसे मां के सीने में

    ये कैसी बेबसी ,लाचारी है तुम्हारे खेमे में
    मर रही इंसानियत मां की गोदो में

    हो चाहे सियासत से लाख फासले तुम्हारे
    मगर मत झोंको देश को हिंसा के मुहाने में

    विनती करता है विंध्याचल तुमसे और हुक्मरानों से
    है फासले गर तो, ख़त्म करो बात के मुहाने में

    ✍️ सौरभ तिवारी "विंध्याचल"
    ©saurabh_tiwari_vindhyanchal

  • saurabh_tiwari_vindhyanchal 106w

    कोठे में फेंके जाने वाली धनराशि को सिक्कों की खनक कहा जाता है
    आज कल प्रेम की परिभाषा इसी के इर्द गिर्द आ गई है ,प्रेम अब निस्वार्थ नहीं स्वार्थ से भरपूर है ,इसलिए जाते जाते 2019 का ये व्यंग आप लोगो का साथ और आशीर्वाद मिले ��

    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी को ����

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    सिक्कों की खनक

    सिक्कों की खनक में उसने
    इश्क़ को नीलाम कर दिया

    इश्क़ था लाजबाव हमको
    उसने दरकिनार कर दिया

    ✍️सौरभ तिवारी "विंध्याचल"
    ©saurabh_tiwari_vindhyanchal