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Reposts
  • saroj_gupta 1d

    आप सभी को हिंदू नववर्ष एवं नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ ����������

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    माँ की स्तुति

    जगदम्बिका माँ अम्बिका
    उद्धार कर माँ कालिका ।
    भक्तों की रक्षा माँ करो
    हर त्रास माँ संसार का ।।
    ये जो विकट संताप है
    माना हमारे पाप हैं
    अब तार दो माँ अवनि को
    मुख मोड़ दो माँ काल का ।
    जगदम्बिका माँ अम्बिका
    उद्धार कर माँ कालिका ।।
    ये क्षत विक्षत जो शव पड़े
    माता तेरे संतान के
    ये रक्तबीज जो बन गया
    कोरोना की तू संहारिका ।
    जगदम्बिका माँ अम्बिका
    उद्धार कर माँ कालिका ।।
    जो कर्म मानव ने किया
    महि को तेरे अश्रु दिया
    है क्लेश में मानव खड़ा
    कर दे जतन चित्कार का ।
    जगदम्बिका माँ अम्बिका
    उद्धार कर माँ कालिका ।।
    ©saroj_gupta

  • saroj_gupta 1d

    थोड़ी ही सही तेरी बातें हैं मुझे अज़ीज़ ऐ जानेमन
    भूल जाने का एहसास दिला जाती है चुप्पी तेरी....

    ©saroj_gupta

  • saroj_gupta 1w

    खामोशियाँ छुपी हैं अब भी मेरी कहकहों में
    गर तुझे इश्क़ है तो ढूंढ ले मुझको
    तेरी खुशी ही मेरे जिंदगी का मक़सद थी
    नहीं मालूम कब इश्क़ हुआ है मुझको
    ©saroj_gupta

  • saroj_gupta 1w

    वजह नहीं मालूम तेरे रूठ जाने की
    क्या सारा कसूर सिर्फ मेरा ही था
    मैंने तो बस तेरी बात को तवज्जो दी
    बात न करने का फैसला तेरा ही था
    ©saroj_gupta

  • saroj_gupta 3w

    @naushadtm सर की यादों को समर्पित भावभीनी श्रद्धांजलि ��������������

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    ऐसे कैसे चल दिए ये आशियाना छोड़ के ।
    मिलने खुदा से चल दिए क्यूँ ऐसे मुंह को मोड़ के ।।
    कुछ नहीं कह कर बताए जल्दबाज़ी की वज़ह
    क्यूँ गये नौशाद जी इतने दिलों को तोड़ के ।।
    ©saroj_gupta

  • saroj_gupta 4w

    जुस्तजू

    बात उनसे जो रूबरू कर लें ।
    रिसते ज़ख्मों को हम रफू कर लें ।।

    उम्र कट जायेगी खयालों में ।
    दो घड़ी उनसे गुफ्तगू कर लें ।।

    मांगू हर रोज जो दुआओं में ।
    आज बस उनकी आरज़ू कर लें ।।

    नाम उनका दीवानगी से भरा ।
    जाम से कैसे हम वज़ू कर लें ।।

    भूल जाये सितम जमाने के ।
    जो कभी उनकी जुस्तजू कर लें ।।
    ©saroj_gupta

  • saroj_gupta 4w

    @malay_28 की रचना से प्रेरित

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    कुछ लिखूँ

    फिर हथेली पे तेरा नाम लिखूँ
    तेरे ग़ुरब़त को ये पयाम लिखूँ ।
    तेरी चाहत की कसम ओ हमदम
    दिल से अपने तुझे सलाम लिखूँ ।।

    थोड़ी चुप्पी भी लिखूँ
    थोड़ी आवाज़ लिखूँ ।
    बीते लम्हों से जुड़ी
    थोड़ी सी आज लिखूँ ।।

    कुछ तेरी सुब्ह लिखूँ
    कुछ मेरी शाम लिखूँ ।
    फुरकते दर्द सही
    थोड़ा आराम लिखूँ ।।

    थोड़ी शिकवा भी लिखूँ
    कुछ शिकायत भी लिखूँ ।
    थोड़ी नाराज़गी से
    कुछ मुहब्बत भी लिखूँ ।।

    तुझमें खुद को भी लिखूँ
    मुझमें तुझको भी लिखूँ ।
    दिल मेरा चाहे सनम
    आज बस तुझको लिखूँ ।।
    ©saroj_gupta

  • saroj_gupta 5w

    Happy Women's Day to all of you ����������

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    औरत

    ताउम्र ही औरत को क्यूँ अखबार होना पड़ता है ।
    हर एक की ऑंखों से क्यूँ दो चार होना पड़ता है ।।

    दस्तूर इस संसार के हर हाल ढोने होते हैं ।
    फिर भला खामोश क्यूँ हर बार होना पड़ता है ।।

    माँ कभी बेटी कभी बहना कभी पत्नी कभी ।
    एक चेहरे में कई किरदार होना पड़ता है ।।

    अपने हिस्से का सुकूँ थोड़ा सा पाने के लिए ।
    उसको पहले आप ही बीमार होना पड़ता है ।।

    घर की खुशियों में कमी हरगिज़ न होने देती वो ।।
    फिर उसे ही दर्द में ग़मख्वार होना पड़ता है ।।

    अपने वजूद, ख्वाब, ख्वाहिश दफ्न करने के लिए ।
    क्यूँ भला उसको ही जिम्मेदार होना पड़ता है ।।
    ©saroj_gupta

  • saroj_gupta 6w

    तुम्हारी यादें

    तुम्हारे यादों के चंद टुकड़े, यहाँ पड़े हैं वहाँ पड़े हैं ।
    जहाँ भी जाती नजर हमारी, वहीं पे मंज़र हसीं खड़े हैं ।।

    तुम्हारी यादें हैं मेरी बरकत, इसी से खुश है ये ज़िंदगानी ।
    तुम्हारी यादों के दायरे तो, हमारी हद से बहुत बड़े हैं ।।

    न जाने कैसा है इश्क़ तुमसे, हमी से हम हो गये पराये ।
    कोई तो पूछे ये हाल मेरा, के खुद से कैसे खुदी लड़े हैं ।।

    खरीद सकते बज़ार में जो, ये इश्क़ ऐसी खुशी नहीं है ।
    तुम्हारे बोसे के कुछ नगीने, हमारे लब पे अभी जड़े हैं ।।

    तेरी निगाहों में मेरी उल्फ़त, जमाने भर का बना फ़साना ।
    हमारी दस्तूरे इश्क़ ज़ाना, सनम सभी के ज़ुबाँ चढ़े हैं ।।

    तमाम गुज़रे हसीन लम्हें, तुम्हारी बाहों के दरमियाँ जो ।
    हसीन यादों के वो ही मंज़र, निगाह में आज भी अड़े हैं ।।
    ©saroj_gupta

  • saroj_gupta 7w

    Collaboration with @parle_g

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    न जाने कैसा है इश्क तुमसे
    हमी से हम हो गये पराये
    कोई तो पूछे ये हाल मेरा
    के खुद से कैसे खुदी लड़े हैं
    ©saroj_gupta