sapnarawat

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मुझे समझने के लिए तुम्हें जगना होगा आधी रात में🦋

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Reposts
  • sapnarawat 64w

    अब एक ही दिन में कितना याद आओगे?
    क्या चाहते हो हमसे, जीना छोड़ दें क्या?

    ©sapnarawat

  • sapnarawat 67w

    लिखना अब ना के बराबर हो गया था
    हर दिन एक जैसा लगने लगा, रोज़ सुबह उठना ऑफ़िस के लिए तैयार होना, ऑटो वाले भैया से किराए के लिए चिक चिक शाम को देरी से घर लौटना और फिर रात भर मंदिर की रोशनी को देखते देखते सो जाना.
    धीरे धीरे इस ज़िंदगी से ऊबने लगी थी मैं.
    फिर एक दिन अचानक तुम्हारा फ़ोन आया;
    उस दिन पहली बार जाना फ़ोन की अहमियत.
    एक फ़ोन हमारी ज़िन्दगी बदल सकता है, महज़ फ़ोन पर तुम्हारा नाम देख कर मेरे होंठों पर हँसी आ गयी थी.

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    फ़ोन कॉल

  • sapnarawat 68w

    के दिल दुखेगा मेरा ये जान कर भी, उनसे मोहब्बत किए जा रहे हैं.
    के ऊब चुके हैं ज़िन्दगी से, इसलिए मौत के क़रीब जा रहे हैं.
    - Sapna ❤️

  • sapnarawat 72w

    मैंने आवाज़ लगाई तो बहुत थी.
    शायद वो नाम बदल चुका होगा
    ©sapnarawat

  • sapnarawat 73w

    मैं मुक़दमा दर्ज़ करूँगी
    इन हवाओं के ख़िलाफ़.
    सारी आग,
    इन्होंने ही तो लगाई है.
    तुम्हारे सामने आने पर,
    ना ये इतना इतराती...
    ना मेरी ज़ुल्फ़ें
    तुम्हारे अधरों से टकराती.
    ना हमारी आँखें मिलती,
    और ना हमें तुमसे इश्क़ होता.

    Sapna Rawat

  • sapnarawat 74w

    कल की फ़िक्र में मारे जाएँगें हम
    देखना कल बहुत याद आएँगें हम

    ©sapnarawat

  • sapnarawat 75w

    मैं भूल गई थी मुस्कुराना.
    फिर यूँ हुआ; हमारी ज़िंदगी में तुम आए❤️

    ~ Sapna Rawat

  • sapnarawat 81w

    मैंने देखा था कैसे
    तुम लड़ रहे थे मेरे साथ,
    थोड़ा वक़्त और बिताने को.

    तुम कर रहे थे बच्चों की तरह
    ज़िद मेरा हाथ पकड़ कर,
    सड़कों पर चलने की.

    और मेरी ज़ुल्फ़ों को
    पीछे करने के बहाने,
    कैसे तुम बार बार छू रहे थे,
    बड़ी चालाकी से मेरे गालों को.

    मैंने देखा था,
    आज रात एक बहुत हसीन ख़्वाब.

    जिसमें तुम कर रहे थे मुझसे
    अपने प्यार का इज़हार ❤️

    - Sapna Rawat

  • sapnarawat 82w

    कभी कभी तो मुझे लगता है,
    उन सारी शिकायतों को
    जो आज तक मुझे रही है तुमसे,
    उन्हें सुना देना चाहिए
    बीच चौराहे पर खड़े हो कर।
    फिर मैं सोचती हूँ,
    गर दुनियां जान गई तुम्हें
    तो कर बैठेगी तुमसे नफरत.
    और मैं नहीं चाहती कि,
    मेरे सिवा कोई और तुमसे नफरत करे.
    ठीक उसी प्रकार जैसे तुम नहीं चाहते कि,
    तुम्हारे अलावा कोई और मुझसे प्रेम करे।

    Sapna Rawat

  • sapnarawat 82w

    यूँ तो मरने के बहुत से रस्ते हो सकते थे,
    मैं मर सकती थी, पेड़ से लटक कर,
    या फिर मैं मर सकती थी, ज़हर खा कर,
    पर मैंने चुना मर जाना, तुम्हारे इश्क़ में डूब कर।