saloniiiii

It's just matter of time...✍

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  • saloniiiii 21h

    तेरा नाम लिख दूँ


    चलों फिर एक नया साज़ लिख दूँ
    या फिर वहीं एहसास लिख दूँ
    वो याद, वो बात या फिर
    वो मुलाकात लिख दूँ
    सुबह से शाम का मिज़ाज लिख दूँ
    या तुझसे जुड़े जज़्बात लिख दूँ
    तेरी चूप्पी, तेरी आवाज़ लिख दूँ
    या फिर तेरा हर एक ख्याल लिख दूँ
    तेरे होठों की हंसी, वो मुस्कान लिख दूँ
    या फिर तेरी आँखों की चमक का राज़ लिख दूँ
    तू गर इजाज़त दे तो बस तेरा नाम लिख दूँ

    ©saloniiiii



    Lots of emotions + few words = your crazy girl

    @hindiwriters @hindinama

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    तेरा नाम लिख दूँ

    ©saloniiiii

  • saloniiiii 2d

    रातें कल भी इतनी सूनी थी
    और आज भी देखों तन्हा है
    तुम कल भी कुछ बेपरवाह थे
    और आज तो सब बेगाना है

    ©saloniiiii

  • saloniiiii 5d

    तो क्या सब झूठ था
    वो बातें, वो वादें
    तुम आम नहीं, खास हो
    और वो तेरे इरादे

    ©saloniiiii

  • saloniiiii 5w

    मेरी चूप्पी उन्हें पसंद है,
    मेरा ख्याल भी नागवार है
    ये कैसी बेरुख़ी है उनकी
    ना कोई खबर, ना कोई मलाल है
    यहाँ दिन भी काला हो गया है
    और उनकी रातें भी गुलज़ार है

    ©saloniiiii

  • saloniiiii 7w

    यूँ ठंडक देती है उनकी बातें
    जैसे हो वो दिसम्बर का महीना
    और गर्मी दे जाती है उनकी बांहें
    जैसे हो वो शाल पश्मीना

    ©saloniiiii

  • saloniiiii 8w

    मैं तेरी अर्धांगिनी,
    तेरे हर काम में साझा हूँ ॥
    बात समझलो प्राणप्रिय
    मैं गृहमंत्री, मैं ही स्वामी हूँ ॥


    @hindiwriters @hindinama

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    अर्धांगिनी

    पहली किरण संग पायल छम-छम
    उसकी चमक से आंगन चम-चम
    हाथों में मधुर चाय की प्याली
    "उठिए ना" होठों से ध्वनि निराली
    शांत सरल मुख पर मुस्कान
    सर्वस्व अपना कर देती कुर्बान
    काम-काजी या हो वो घरेलू नारी
    गृहलक्ष्मी है हर हाल में सब पे भारी
    तन कोमल, मन दृढ़़ बड़ा है
    पराया घर अब अपना बना है
    वो खड़ी हर हाल में संग-संग
    सुख हो दुःख हो या संघर्ष बड़ा है
    रखती है सबका वो ध्यान
    सहनशीलता की है वो प्रमाण
    वो पत्नी है, वो भार्या है
    वो प्राणप्रिया, वधु, वामा है
    तुम मानों चाहे बात ना मानों
    वो आधा अंग तुम्हारा है
    वो पतिव्रता पावन नारी
    तुम्हारे हर काम में साझा है

    ©saloniiiii

  • saloniiiii 9w

    धरी रह गई समझ मेरी
    जब बात चयन की आयी है
    सही-गलत का ज्ञान मिला
    फिर क्यों सुध-बुध गवायी है
    ©saloniiiii

  • saloniiiii 10w

    @hindiwriters @hindinama

    It's just a random thought.. I know it's not as good as my earlier posts were... But sometimes it's makes me feel good when I write those simple lines with few not so difficult words.. Bcz with those lines I can relate eternally.. ❤

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    अज़नबी

    एक अज़नबी से यूँ मुलाकात हुई
    जैसे छू कर ठंडी हवा चली
    जान - पहचान होते - होते
    उनसे थोड़ी तकरार हुई
    आम से खास बनते - बनते
    कई कही - अनकही बात हुई
    बातों का सिलसिला आम हुआ अब
    सपनों में कुछ यूँ मुलाकात हुई
    क्या दिन और क्या रातें
    अब पहर भी अपनी गुलाम हुई
    हाँ जी, जी हाँ करते - करते
    "कहाँ थे आप ?"
    ये पुछने की हकदार हुई
    प्यार कहूँ या पागलपन
    उन बिन यूँ ही निराधार हुई

    ©saloniiiii

  • saloniiiii 14w

    तन्हाई में मशरूफ हूँ अब भी
    पर जिस्म मेरा तन्हा तो नहीं है
    गुफ्तगू होती है अब भी
    पर महफ़िलें कबूल तो नहीं है
    ©saloniiiii

  • saloniiiii 20w

    बहुत दिनों से

    बहुत दिनों से आयी ना तुम
    वो चंचल नैन दिखाई ना तुम
    वो चेहरा मेरे दिल में बसता
    क्यूँ अब तक झलक दिखाई ना तुम

    बहुत दिनों से आयी ना तुम
    वो खिलखिलाती हंसी सुनाई ना तुम
    वो कोमल सा स्पर्श तुम्हारा
    क्यूँ अब तक हाथ मिलायी ना तुम

    बहुत दिनों से आयी ना तुम
    वो सौंधी खुशबू लायीं ना तुम
    उन गुलाबी होठों से हाँ
    क्यूँ अब तक कुछ कह पायी ना तुम

    बहुत दिनों से आयी ना तुम
    प्रेमी को अपने रिझाई ना तुम
    वो जो बैठा है तेरी गलियों में
    क्यूँ अब तक मिलने आयी ना तुम

    ©saloniiiii