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  • saket28 69w

    संगम 2

    संगम की अविरल धारा देख अनायास उनकी याद आ गई
    जीवन के कशमकश की यादें ताजा हो आई
    गिरता उठता आखिर पहुंच ही पड़ा
    काश कि कुछ वक़्त ने उसकी मान ली होती
    अनायास आज संगम कि धारा ने करवट ली
    पुनः याद उनकी आ गई।।
    देख संगम की अविरल धारा याद उनकी आ गई।

  • saket28 74w

    संगम

    हर दिन सोता जागता चलता था वो
    जाने किस आस में जीता था वो
    हर उम्मीद को सींचता रहता था वो
    जाने किस आस में जीता था वो।
    सब में एक अजीब सी कशमकश थी
    हर किसी ने अपना प्रतिद्वंदी मान बैठा था
    फिर भी उसने उम्मीद ना छोरी थी
    हर वक़्त लरता और चलता रहता था
    जाने किस आस में जीता था।।
    उसने तो अलग ही दुनिया बनाई थी
    जहां आज भी वक़्त बृक्ष की परछाइयों से होती थी
    उसने तो मानो जैसे सब को अपना बनाने की कसम खाई थी
    उसने तो अपनों के लिए ही जीने की कसम जो खाई थी
    क्योंकि जब भी आंखे भरती तब तब आंसू नहीं ,संगम के निश्चल अविरल धारा उसे अनायास याद आ जाती।।।

  • saket28 88w

    जज्बा....

    रिश्ते और रास्ते तब खत्म हो जाते है।
    जब पांव नहीं दिल थक जाते हैं।।
    जवानी और मोहब्बत के बीच फासले तब आते है।
    जब प्यार नहीं,जज्बा खत्म हो जाते हैं।।
    जिंदगानी के उरान तब थम जाते है।
    जब हौसला नहीं कोई अपना छोर जाता है।।
    लोग अपना घोंसला तब छोर जाते हैं।
    जब कोई अपना पराया हो जाता है।।
    नदियां सागर के आगोश में तब समा जाती है।
    जब उसे उसकी लहरों का खवाईस हो जाता है।।

    @साकेत सिंह

  • saket28 88w

    एक आह....

    समंदर को दंभ था कि वो पूरी दुनिया को डूबा सकता है।
    इतने में तेल की एक बूंद आईं ओर मुस्कुराती निकलती है।।
    इसी तरह पथ को बहुत गुरूर था अपने लंबे होने का।
    एक मगरूर गरीब के हौसले ने उसे पैदल ही नाप दिया।।

  • saket28 88w

    अनकही

    हमें बेहोश कर शाकी।
    मिला भी कुछ नहीं हमको।।
    करम की कुछ नहीं हमको।
    सिला भी कुछ नहीं हमको।।
    मोहब्बत ने दिया है सब।
    मोहब्बत ने लिया है सब।।
    मिला भी कुछ नहीं हमको।
    गिला भी कुछ नहीं हमको।।

  • saket28 88w

    मोहब्बत

    दो ही गवाह थे मेरी मोहब्बत के..........

    वक़्त और वो.....
    एक गुजर गया और दूसरा मुकर गया।

  • saket28 90w

    चाह नहीं मैं सुरबाला के
    गहनों में गूंथा जाऊं,
    चाह नहीं, प्रेमी माला में
    बिंध प्यारी को ललचाऊं,
    चाह नहीं, सम्राटों के शव
    पर हे हरि डाला जाऊं,
    चाह नहीं देवों के सिर पर
    चढ़ूं भाग्य पर इठलाऊं।
    मुझे तोर लेना वन माली।
    उस पथ पर देना तुम फेंक,
    मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
    जिस पथ पर जाएं वीर अनेक।।।
    ###माखनलाल चतु्वेदी###

  • saket28 102w

    नई करवट

    भारतीय राजनीति एक नई करवट लेती दिखाई दी इस बार के दिल्ली चुनाव में वैसे यहां उल्लेखनीय है कि दिल्ली चुनाव के दौरान इस बार सारी पार्टियों ने अपने तरकश के सारे तीर आजमाए चाहे वो साम्प्रदायिकता हो, व्यक्तिगत हो , लठमार हो या मुफ्तखोरी हो। भाजपा अपनी सारी तंत्र लगाकर भी सब कुछ गवां बैठी और कांग्रेस तो मानो पहले से ही हर कर बैठी थी। इसके उलट ,आप इस चुनाव के सुरुआत से ही आत्मविशवास से सराबोर थी। शिक्षा और चिकित्सा किसी भी प्रदेश की मूलभूत संरचना होती है मेरा ऐसा मानना है कि यूरोपिय प्रांतों के तर्ज पर अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में चिकित्सा व शिक्षा की ओर एक नन्हे कदम उठाएं अब देखना यह है कि यह नन्हे कदम बरे एंड दूरगामी कदम में कब परिवर्तित होते हैं, की क्योंकि उनके नन्हे कदम पर जनता ने इतनी बड़ी मुहर लगा दी है। हालाकि चुनाव के आखरी पड़ाव पहुंचते पहुंचते श्री केजरीवाल भी चुनावी हथकंडा बीजली मुफ्त, पानी मुफ्त की चुनावी सौगात देने से गुरेज नहीं किए और ऐसे में मुझे याद आता है,अन्ना आंदोलन का इंडिया अगेंस्ट करप्शन जिसमें लरके ,लड़कियां,बुद्धिजीवी वर्ग आदी ने बदलाव की मुहिम से जुड़े थे और उसी मुहिम के उपज श्री केजरीवाल भी चुनावी समर में उस आंदोलन के सार ही भुल गए जिसके कारण प्रदेश ने उन्हें चुना था।
    अब भारत की राजनीती किस ओर करवट ले रही है यह समझने की जरूरत है यही जनता है जो दिल्ली की गद्दी पर रिमोट कंट्रोल सरकार 10 वर्षों तक रखती है यही जनता है कि बिहार में एक अनपढ़ महिला को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठती है और यही जनता है जो 2019 के लोकसभा चुनाव के दरम्यान ओरिसा में एक वोट दिल्ली की गद्दी के लिए भाजपा को ओर एक वोट बीजू जनता दल को प्रदेश के लिए देती है।।।जोर आजमाइश सत्ता के बीच भारतीय राजनीति एक नई करवट लेती दिखाई पर रही है।।।।।।।।।।। साकेत सिंह।।।।।।।,

  • saket28 105w

    एक एहसास

    ना मैं गिरा
    और
    ना मेरी उम्मीदों के मीनार गिरे....
    पर
    कुछ लोग मुझे गिराने में.....
    कई बार गिरे......

  • saket28 107w

    सोच

    कुछ दिनो पहले की ही बात थी
    अलग ही खास ख्याल की खुशी थी
    समय बीतता गया और कदम बढ़ते गए
    कुछ पराए साथ रह गए
    कुछ अपने सपने बन गए

    ©sakettagged