sagarkmr7777

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  • sagarkmr7777 4d

    खुद को तबाह करता हुआ लड़का8
    घर वालों ने इसकी कुंडली भी दिखी ।
    सब कुछ सही था,लौंडा तरक्की करेगा और जियेगा इतना जितना इसे जीना है।
    इसने जब कुंडली पढ़ी तो ये भी हंस पड़ा।
    और कहता है बाकी का तो मुझे पता नहीं लेकिन कुंडली में एक चीज़ ये सही लिखी है जितना ये जीना चाहे तो मेरी मर्ज़ी मैं चाहूँ जितना जियूं।
    दुःख जाने कितना ही है इसे लेकिन अपने चेहरे और हाव बहाव पे ये जाहिर नही होने देता की कितने दुःख ने इसे घेर रखा है।
    ख़ैर छोड़ो सारी बातें एक बात तो सुनों इसकी अरे सुनों क्या हर लौंडा इसे देख जल रहा है क्योंकि इसने जो अपनी एक अलग ही छवि बनायी है।इसकी ऐसी छवि देख कई लड़कियों में चर्चित चल रहा है ये।
    हाय सब के सब भगवान बन्ने की सोच रहे हैं एक ऐसा भगवान जो इसे ज़िन्दगी की वात लगाने से बचा लें।

    खुद को तबाह करता हुआ लड़का9
    लेकिन ये अब नास्तिक हो चला है।
    अरे जो लड़का रट लगाये बैठा है।यमराज़ को अपना फ़ेवरिट ब्रांड वाली सिगरेट पिलाने का अब सोच लो की लौंडा किस तरह से नास्तिकता का जीना एक के बाद एक चढ़ रहा है ।सिगरेट फूंकते हुए।
    इतनी चिलचिलाती हुई गर्मी में भी इसे चैन नहीं।अरे इतनी चिलचिलती हुई गर्मी में कौन पागल अपने फेफड़ों की वाट लगाएगा।
    पर ये लगा है यहाँ बड़े मज़े से कोई दिक्क़त नही इसे।
    खैर दिक्क़त है भी तो इसे ये बताने वाला थोड़ा ही है।
    क्योंकि अब ये दिक्क़त देने को बना है ।।अब इसके साथ जो भी होता है रोता जरूर है ।
    लेकिन ये हँसता है बड़े जोरो से।।।
    इसकी हँसी में कोई भी मिलावट दिखावा नहीं है।
    ये मुस्कुराहट सीधे ईश्वर को समर्पित होती है।
    इस मुस्कुराहट में भय का एक छीटे भर का भी अंश नहीं है।
    मौत को एक सोची समझी साजिस के तहत गले लगाना।
    ©sagarkmr7777

  • sagarkmr7777 4d

    खुद को तबाह करता हुआ लड़का 7
    बातों बातों में अब वो कह देता है अपने दोस्तों से की ।बेटों तुम्हारी याद बहुत आएगी।
    लेकिन इतनी सारी बातों में उसकी आँखो में एक भी डर अफ़सोस नज़र नहीं आता।
    अब सिगरेट पीने में उसने थोड़ा और बत्तमीज़ी कर दी है।
    दिन की कभी कभी तो 10 सिगरेट पी जाता है ये 5 ढलान में 5 चढ़ाई में।
    एक दो बार डॉक्टर के पास भी जा आया है।घर वालों के कहने पर और डॉक्टर ने भी इसको पागल कहने लगे हैं एक ऐसा पागल जो हाथ धो कर पीछे पड़ा बैठा है अपनी ज़िन्दगी के ।
    अब घर वाले भी इसे आगरा भेजने की बातें करते हैं।
    लेकिन
    कुछ कुछ चीज़ों में इसने बचा कर रखा है अपना पागलपन।
    हाँ तो क़भी लोग इसे टेंशन फ्री लौंडा भी कहते हैं।
    एक ऐसा लौंडा जिसने ले रखी है,ज़िन्दगी की भी बड़े प्यार से ।
    ©sagarkmr7777

  • sagarkmr7777 3w

    2

    .मैंने अपने होठों को धक्का देकर हँसने की बहुत सी नाकाम कोशिशे की हैं।
    लेकिन हर बार असफल रहा हूँ ।ख़ैर इतनी अटपटी रात के बाद भी ये किताबें इस सुनसान भयानक काली रात को मुझ पर बिल्कुल हावी नहीँ होने देती हैं।आधी रात उठ अमृता प्रीतम जी को पढ़ना मतलब ये सुनसान भयानक काली रात को एक प्यार भरी रात में बदलना।अमृता प्रीतम जी को पढ़ पढ़ मैं उनींद के उस छोर पर पहुँच जाता हूँ जहाँ नींद मेरा हाथ पकड़ मुझे अपने साथ सपनों के संसार में ले जाती है।
    अब इसमें लोग मुझसे कहेंगे की तू रातों को पढाई करता है क्या?
    मेरा जवाब नहीँ है
    मैं रातों को पढाई नहीँ
    रात को पढता हूँ
    इसमें दूसरी लाइन में बहुत बड़ा तर्क है
    शायद इसे कुछ ऐसे समझाया जाए=
    "हमने कई रात रात के काले पन को पढ़ने में गुजारी है
    मग़र हम फिर भी रात में रात के काले पन को कभी पढ़ ना सके"
    @Sagarkmr7777

  • sagarkmr7777 3w

    1

    दिन तो जैसे तैसे कट ही जाता है।
    मग़र ये सुनसान भयानक काली रातें कटने का नाम ही नहीँ लेती हैं।
    इन भयानक रातों के चलते हुए मैंने कई रातें अपने कमरे की उल्टी छत को घूर घूर कर काटी हैं।
    इस उल्टी छत को अपलक घूरने के सिलसिले में कई दफ़ा मेरी आँखो से आँसुओ के नाज़ुक से कतरे बूँद बूँद कर मेरे गालों से लुढ़क, कभी मेरे कानों में घुस कर अपना रोना रोते हैं, तो कभी मेरे होंठो से मेरे मुँह में घुस कर अपने नमकीन से दर्दो का स्वाद मुझे चखाते हैं।
    अपने ही अनजान से दर्द को सुनना और अपने ही दर्द का नमकीन स्वाद चखना बहुत अज़ीब है।
    मैं बाहरी रूप से एक दम झक्कास हूँ।
    सिर्फ दिन तक हां। रात में मैं कुछ और ही हूँ।।वैसे रात में मेरे लिए हँसना बेहद कठिन है।
    @Sagarkmr7777

  • sagarkmr7777 5w

    थक गया हूँ यार सच में बहुत
    ज़िम्मेदारी समय से पहले अगर कन्धों में पड़ जाए तो
    कन्धों के साथ साथ पूरे शरीर और पूरी लाइफ की वाट लग जाती है।
    अब हाल ऐसा है की कुछ इस टाइप की लाइफ जी रहा हूँ मैं की इस लाइफ को शायद ये कहा जायेगा।एक नीरस सी लाइफ बिल्कुल नीरस
    कभी कभी लगता है साला इससे भी बुरा कुछ हो सकता है क्या।
    आज शायद 8 साल हो गए हैं मुझे पर सच में आज मुझे मुझ पर गुस्सा आ रहा है।
    कि किन लोगों के लिए मैंने अपनी ज़िन्दगी की वाट लगा दी यार्
    सारे जीवन के लम्हें तो मैंने एक बेकार सा सभ्य ज़िम्मेदार लड़का बनने में लगा दी।
    क्या मिला ऐसा बनकर।
    अब मेरे इस लंबे से बखान पर कुछ महानुभाव लोग टिप्पणी करेंगे कि
    अरे ये तो फ़र्ज़ है तेरा
    हाँ हाँ मेरा फ़र्ज़ मेरा फ़र्ज़ और दूसरों का क्या
    कुछ नहीँ
    चलो छोड़ो गलती मेरी ही थी
    मुझे लड़ना चाहिए था उस वक़्त जब मेरे पास वक़्त था अब क्या है एक ठेंगा।
    यार मैं क्या लिख रहा हूँ मेरे समझ से बहार है
    बस इतना कहूँगा की कुछ लोगों को उनके हिसाब से थोड़ा बहुत तो जीने दिया जाए।
    इसलिए की वे हालात को कुछ अच्छा कर सके।
    वैसे भी ये साली ज़िन्दगी बार बार कहाँ मिलती है।

    "खुद से हारा हुआ लड़का"
    ©sagarkmr7777

  • sagarkmr7777 11w

    तुम् आयीं भी तो तब
    जब मैं हो गया किसी और का
    ©sagarkmr7777

  • sagarkmr7777 11w

    मुझे अब किसी से एतिबार नहीँ रहा
    प्यार प्यार करने वाले मुझे अब प्यार ना रहा
    ©sagarkmr7777

  • sagarkmr7777 11w

    मिरी आँखो को तिरे ही ख़्वाब रास हो
    तू दूर हो कर भी मेरे हमेसा पास हो
    ©sagarkmr7777

  • sagarkmr7777 11w

    उसे रास आ गया किसी और का साथ
    ग्रह नक्षत्रों को बदलते हमने भी देखा है
    ©sagarkmr7777

  • sagarkmr7777 11w

    रो रो कर आँसू सुख चले हैं हमारे
    तुम्हें क्यों तरस नहीँ आता हमपर
    ©sagarkmr7777