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  • rudramm 7h

    चाँद हैं जुगनूँ हैं सूरज हैं सितारा हम हैं
    बेकसों आओ कि तुम सबका सहारा हम हैं

    देख कर जिसको पलट जाता है दरिया अक़्सर
    हम वही रेत हैं सूखी वो किनारा हम हैं

    फ़िर भी तन्हाई ने कर ही लिया घर पर कब्ज़ा
    बारहा हमनें ये घबराकर पुकारा हम हैं

    उसके लहज़े में झलकती है जो नरमी वो है
    उसकी आँखों में जो दिखता है वो शरारा हम हैं

  • rudramm 1d

    तुझे हमारी दोस्ती का वास्ता दोस्ती न तोड़

    मैंने  वो  दिल  की  बात मज़ाक में कही थी

    ©rudramm

  • rudramm 3d

    गैरों को अब गले लगाओ, जाओ तुमको छोड़ दिया
    सबको मेरे ऐब गिनाओ, जाओ तुमको छोड़ दिया

    किससे मिलने की ख़्वाहिश आँखों में भर कर आई हो
    जाओ जाओ जल्दी जाओ , जाओ तुमको छोड़ दिया

    चाहा था कि नाम तुम्हारा साथ हमारे आएगा
    अब चाहे जिसकी कहलाओ जाओ, तुमको छोड़ दिया

    हम ही कितने पागल थे जो तुम पर गज़लें कहते थे
    अब मत कहना शेर सुनाओ, जाओ तुमको छोड़ दिया

  • rudramm 3d

    न दौलत न शोहरत माँगे
    न कोई बल माँगे
    दिल का मंगता उस दाता से
    इतना केवल माँगे
    मंगल को मैं बजरंगी से
    तेरा शुक्र मनाऊँ
    और शुक्र को तू अल्लाह से
    मेरा मंगल माँगे
    ©प्रभुत्व सौरभ

  • rudramm 3d

    एक आह संभाली न गई और दिल बेचने चले आये
    लानत है तुम पे पराई आग पे रोटी सेंकने चले आये
    ©rudramm

  • rudramm 5d

    आओ  मेरा  दिल  दुखाओ और दफ़ा हो जाओ
    तन्हाई की मुझे शक़्ल दे जाओ, दफ़ा हो जाओ

    हमें आसमाँ का ख़्वाब दिखाने वाले जरा ठहरो
    अपने ख़्वाब अपने पास रखो और दफ़ा हो जाओ

    जिनके तबस्सुम के लिए मैंने बागबां सजाया था
    वो कितने प्यार से कह रहे हैं अब दफ़ा हो जाओ

    उन शामों का करूँ क्या हिसाब जो तेरी यादों में क़ैद है
    यादों के गलियारों से आवाज़ आती है दफ़ा हो जाओ
    ©rudramm

  • rudramm 1w

    मरीज़ -ए- इश्क़ से न पूँछ रवायतें इश्क़ की
    इश्क़ हो जाये क़ामिल तो फ़िर मजा क्या है
    ©rudramm

  • rudramm 1w

    आज तुम्हारे गालों को हाँथ लगाया
    हैरत है 'चाँद' में आग मालूम होती है
    ©rudramm

  • rudramm 1w

    ये तुम्हारी अपनी मर्ज़ी है लेकिन एक बात कहूँगा मैं
    खुली हुई ज़ुल्फ़ों के बीच 'चाँद' हसीन नज़र आता है
    ©rudramm

  • rudramm 1w

    मिज़ाज़-ए-इश्क़ बेहतरी का सिला ढूँढता है
    सफ़र में कहाँ तू हमसफ़र के निशां ढूँढता है

    तोड़ दे सारी बंदिशों को मंज़िल पे नज़र रख
    वीरानियों में किसके वास्ते तू मकां ढूँढता है

    हैरत होती है देखकर मुफ़्लिसी की पनाह में भी
    मुफ़्लिस ग़म की चादर ओढ़ कहकशाँ ढूँढता है
    ©rudramm