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  • riyashukla242 5w

    इस शांति की लहर में , बहुत रोग है छिपे
    कुछ चीख में , कुछ पीड़ा में
    कुछ होते है , नित दिन के घाव में


    ©riyashukla242

  • riyashukla242 23w

    चिड़िया

    कितना कुछ कह जाती है चिड़िया चहक-चहक कर हम से

    शायद वो रोती हो या हस कर कुछ कहती हो

    क्या पता कहीं घूमने को जाती हो या कहीं घूम कर वापस आती हो

    शायद अपनी चहचहाहट से सब को मोह रही हो या चीख-चीख कर कुछ कहती हो

    क्या पता अपने बच्चों को डांट लगाती हो या उन्हें प्यार से कुछ समझाती हो

    शायद वो कुछ खाने को ढूंढती हो या कुछ खा कर वापस आती हो

    क्या पता अपने घरों को खोजती हो या उन्हें हम से बचा कर रखती हो

    शायद वो हम सब की मिल कर हंसी उडा़ती हो या हम सी बनना चाहती हो

    शायद वो ये सब कर हमें जताती हो की वो हम सी नहीं।




    ©riyashukla242

  • riyashukla242 26w

    पृथ्वी

    हवा कहती मुझसे हैं, खुशियाँ सबकी
    पानी कहता मुझसे हैं, जीवन सबका
    आकाश कहता मुझसे हैं, रक्षण सबका
    धरती कहती मुझपर हैं, बोझ सबका
    पेड़-पौधे कहते हमसे हैं, श्रृंगार सबका
    फिर
    पृथ्वी बोली मुझपर हैं, जीवन सबका


    ©riyashukla242

  • riyashukla242 28w

    DAR

    Dar kya hai koi nahi janta shayad
    Dar se Jo dar gya wo hi dar jata h shayad
    Dar aaj ,hum sab ki nazar me har cheez hai shayad
    Dar nakamyabi hai shayad
    Dar andhera hai shayad
    Dar akela pan hai shayad
    Dar kisi ko khona hai shayad
    Ya dar khud insan hi hai shayad...


    ©riyashukla242

  • riyashukla242 28w

    बारिश

    एक हवा का झोका आया
    काली घटा साथ लाया।

    ऊपर काले बादल छा रहे
    नीचे हरियाली झूम रही।

    बूंदें टिप-टिप गिर रही
    पानी कल-कल बह रहा।

    बिजली कड़-कड़ बोल रही
    संकट मानो बुला रही।

    हवाएँ अपना मुख बदल रही
    पत्ते उन के पीछे भाग रहे।

    मिट्टी अपना रंग बदल रही
    खुशबू चारों ओर बेखेर रही।

    इन सब को देख मैं ,
    सोच रही क्या है ,ये मौसम।


    ©riyashukla242

  • riyashukla242 28w

    बरसात

    ऊपर काली घटा छा रही
    अँधियारा चारों ओर फैला रही,
    खुले आसमान को जैसे छूप जाने को बोल रही।

    हवाएँ अपना रुख बदल रही
    पूर्व से पश्चिम की ओर चल पड़ी,
    मानो सब को अपने पीछे भागने को बोल रही।

    हर तरफ हरियाली झूम रही
    फूलों की खुशबू मन को मोह रही,
    देख इन को एक अलग प्रसन्नता सी हो रही।

    काले गगन में चमकती बिजली
    गरजते काले बादल,
    संकट को जैसे बुला रहे।

    बारिश की बूंदें टिप-टिप गिर रही
    मेंढक खुश होकर नाच रहे,
    बूंदों के मधुर संगीत में जैसे सब खो से जा रहे।

    मिट्टी अपनी खुशबू चारों ओर बिखेर रही
    खेतों,घरों में अपनी छाप छोड़ रही,
    चारों दिशाओं में जैसे अपनी खुशियाँ मिल कर बाँट रही।

    पर कहीं ये मौसम, मन को भा रहा
    तो कहीं ये मौसम, संकत को बुला रहा
    इसी सोच में मन खुश और दुख, दोनों हो जा रहा।


    ©riyashukla242

  • riyashukla242 30w

    Word Prompt:

    Write a 10 word short write-up on Relief

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    There is certain relief in changes

  • riyashukla242 30w

    भीड़

    एक भीड़ का खेल है ये सब
    इस भीड़ से दूर रहे।

    ये भीड़ खौफ है, मचा रही
    इस भीड़-भाड़ से दूर रहे।

    इस भीड़ को रोग लगा है,
    इस भीड़ से दूर रहे।

    ये भीड़ बुरी है, बन चुकी
    इस भीड़-भाड़ से दूर रहे।

    इस भीड़ को घमंड लगा है,
    इस भीड़ से दूर रहे।

    ये भीड़ कभी अच्छी, थी पहले
    इस भीड़-भाड़ से दूर रहे।

    यही वजह है, यही सजा है
    इस भीड़ से दूर रहे।


    ©riyashukla242

  • riyashukla242 30w

    Baat

    Baat kuch un dinon ki hai , jab hum phone se jyada sab se milna pasand karte the....

    Baat kuch aisi hai , jab hum akele rehne se jyada doston ke sath khule aasman me khelna pasand karte the...

    Baat kuch aisi hai , jab hum choti si cheezon me khush hua karte the....

    Baat kuch aisi ho gyi hai ab , jahan hum apne aram ke liye , prathvi ko ast vyast kar de rhe haii...

    Baat kuch aisi ho gyi hai ab , jahan insan ke paas sab kuch hai par fir bhi wo adhura haii.....

    Baat kuch aisi hai ab , jahan insan viksit to hai par dimag se nhi sirf bhautik vastu se , jis ne insan ko andha kar dia haii....

    Baat kuch yun ho gyi hai ab , jis ko hum Maa mante the ushi ko nasht kar rhe haii...

    Shayad ab whi saza hum logon ko mil rhi haii

    Baat kuch aisi ho gyi ab.....


    ©riyashukla242

  • riyashukla242 30w

    Fight!!

    As the world is fighting with corona...

    As nature changes nothing...
    The earth still revolve on its axis
    The sun still dawn and dusk
    The moon and stars still shine
    The flowers still grew their petals
    As the fight has began...

    And nature change everything,
    As nature knows everything....

    The only change is, in human population
    As nature knows everything...

    We fight for freedom
    We fight for religion
    We fight for oxygen
    As the fight has began for everything...

    Last but not the least ...
    We will fight for water too
    We will fight for food too
    We will fight for land too
    And the fight will carry on!!

    The world is getting ill!!
    But the fight is on, still!!...


    ©riyashukla242