ritika_1999

"इश्क़ लिखती हूं" ❤

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Reposts
  • ritika_1999 53w

    Masoom hai mera pyar
    Issey khamosh rehne do
    Bey daag hai mera pyar
    Isey paak rehne do
    Rehne do inhe chhedo nahi
    Mukammal nahi mera pyar
    Bezubaan he rehne do❤

    ©ritika_1999

  • ritika_1999 63w

    PERIODS (MENSES)

    Kya kaha apavitra hun? Mandir na jana?
    Fir se kaho tum kuch khatta na khana?
    Accha ye kaha tumne ki daag se thoda bachana?
    Accha ab kehte ho kaam pe na jana?
    Accha dhyaan se chalu kahin sharminda na ho jana?
    Mujhe ye batao prakriti se kya sharmana?
    Mujhe aata hai dard sehna tum batein mujhe na sikhana?
    Apavitra hun agar toh ijaazat sirf mujhe kyun jiwan ko duniya me laana?
    Lachaar nhi mai in dino mujhe sympathy na he dikhana.
    Aata hai mujhe chezain na sikhana.
    Bs in dino apni soch ko shauchalay na banana.

    ©ritika_1999

  • ritika_1999 63w

    Tu ganga hai tu behti reh
    Tujhe milna sagar ko hai
    Tu shital hai tu thehri reh
    Tujhe parwat kya rok sake hai kabhi?
    ©ritika_1999

  • ritika_1999 63w

    Ihne rok le ankho me
    Abhi dariya banana hai
    Dariya jo banega
    Fir sailaab le aana hai

    ©ritika_1999

  • ritika_1999 70w

    नशा चढ़ा था जिनका बरसों पहले,
    अरसो पहले भुला चुके थे,
    हम यूं ही झूम रहे थे बस्ती में ,
    पर नजरें कुछ यूं घुमा चुके थे,
    के दिल में तरंग कुछ यूं उठी थी,
    आज उनसे नजरें मिला चुके थे,
    बरसों का नशा कुछ उतरा हुआ था,
    आज इश्क -ए- दरमियान चढ़ा चुके थे I

    ©ritika_1999

  • ritika_1999 92w

    शमा-ए-ज़र्द की आगोश मे ,
    दिल की किताब बयाॅ कीजे।।
    मुश्किल मे फसी हू बरसो से,
    आज की शाम हमे रिहा कीजे।।
    ©ritika_1999

  • ritika_1999 97w

    I'm in love with your flaws


    ©ritika_1999

  • ritika_1999 101w

    शमा परवाना

    गम-ए-शमा की दासतान सुनाती हू,
    शमा को खुश्क परवाना बावरा बताती हू,
    इक ठंड की रात थी,
    शमा की लौ उसके साथ थी,
    इठला रही थी , बलखा रही थी,
    पास खड़े परवाने को पिघला रही थी,
    परवाना हर शाम सोचता रहा,
    शमा से इश्क है खुद को कोसता रहा,
    सुना था शमा बेदर्दी हैं,
    उसमे बहुत गर्मी हैं,
    जो इश्क किया शमा से,
    ये उसकी आखरी मर्ज़ी हैं,
    वर्षो बीतें शमा बूढ़ी हो चली,
    उसकी चरचित लौ भी धीमी हो चली,
    परवाना कहा खुदा के पास जाना हैं,
    अब तो ये आखरी अफसाना हैं,
    आज इकरार करूंगा ,शमा से लिपट कर जान दे दूंगा,
    मनचला बावरा करीब गया शमा के,
    दिल के तराने का इज़हार किया शमा से,

    "ऐ बेदर्दी अज़ीज़-ए-शमा गुस्ताख़ी माफ किजीये,
    ताउम्र मुहब्बत की हैं आपसे, मेरे दर्द का हिसाब किजीये,
    आखरी साॅसे आपके नाम की हो,
    मेरी बाॅहो मे अपनी जान निसार किजीये,
    आखरी एक ही दफा हमसे प्यार किजीये।।"❤

    ©ritika_1999

  • ritika_1999 102w

    मेरी मुहब्बत तो सबसे जुदा हैं
    हम तो एक ही पर फिदा है
    हर पहर मेरा हाल पूछती है
    एक ही प्याले मे हज़ार दफा चूमती है
    कहती है कल फिर आऊंगी
    थोड़ी और कड़क और मीठी बन जाऊंगी
    तुम्हारी सारी थकान मिटा जाऊंगी
    कही भी रहो तुमको मिल ही जाऊंगी
    तुम्हारी मुहब्बत हू ना
    इसी तरह तुम्हे प्यार जताऊंगी।।
    ©ritika_1999

  • ritika_1999 102w

    Meri aadat me shamil hue , kusoor hai
    Meri kurbat me sangeen hue , fitoor hai

    ©ritika_1999