ravindra_upadhyay_gunjan

hindi-lekhani

Grid View
List View
Reposts
  • ravindra_upadhyay_gunjan 6w

    इश्क में जंग

    दिल में रंजिश की खुमारी रखिए
    लब पे मुस्कान भी प्यारी रखिए 
    कोई तारिख बनाना है अगर
    इश्क में जंग को जारी रखिए

    ©गुंजन

  • ravindra_upadhyay_gunjan 30w

    मातृ-वंदन

    दिल में ममता की लहर
    आँख में पानी दे दे
    माँ मुझे कोई तो
    अपनी सी निशानी दे दे

    तेरे चेहरे की झलक
    जिंदगी चलाती रही
    तेरी लोरी, मेरे गीतों में
    गीत गाती रही

    सुन के बचपन सो सके
    ऐसी कहानी दे दे
    माँ मुझे कोई तो
    अपनी सी निशानी दे दे
    ©गुँजन

  • ravindra_upadhyay_gunjan 30w

    ग़ज़ल- कहाँ जाएँ

    खुद से भागें भी तो कहाँ जाएँ 
    हर तरफ दर्द है कहाँ जाएँ 

    खुद को पाएँ सदा वीरानों में 
    संग हम चाहे कारवाँ जाएँ 

    चाँद जिसके बसा हो सीने में 
    क्या करे जब वो कहकशाँ पाये 

    कोशिशें जब करूँ मैं हँसने की 
    सिसकियाँ बीच में समा जाएँ 

    कत्ल होके भी हम जिंदा रहे 
    मर गए वो जो हादसा पाए

    कहती 'गुंजन' ये दिल परिंदे की 

  • ravindra_upadhyay_gunjan 31w

    मुझको लाके यहाँ, तुम कहाँ खो गये,
    मंजिलों के निशाँ, तुम कहाँ खो गये।
    तेरे बिन राहें, काटों भरी दर्द सी,
    मेरे दिल की जुबाँ, तुम कहाँ खो गये।।
    ©गुँजन

  • ravindra_upadhyay_gunjan 31w

    साँस बाकी है

    दर्दे-दिल में, तेरे दर की तलाश बाकी है 
    महकते अंजुमन की,कोई आस बाकी है 

    जिंदगी की झलक, अब तक दबी है सीने में 
    लिखी है नाम तेरे, कोई साँस बाकी है 

    नजर से कोई, पिला दे शराब के कतरे 
    लबों से पी थी, तो थोड़ी सी प्यास बाकी है 

    जश्न की रात है,और लोग बहुत आए हैं
    मेरा दिल है उदास, कोई खास बाकी है 

    वक़्त ने मेट दिए,घाव के निशाँ 'गुँजन' 
    तेरे खंजर से मिली, इक खराश बाकी है 
    ©गुँजन

  • ravindra_upadhyay_gunjan 31w

    गीत गुंजन

    गीतों के बाजार में,
    जिस दिन, खड़ा हो जाऊँगा।
    तब मैं नहीं लिख पाउँगा,
    हाँ, मैं नहीं लिख पाऊँगा।।

    कविताएँ, मेरी जिंदगी, 
    गजलें, मेरी तकदीर हैं।
    लिखता हूँ, जीवन की व्यथा 
    सीने में जिंदा पीर है।। 

    चंद सिक्कों के लिए, 
    जब दर्द को झुठलाऊँगा।
    तब मैं नहीं लिख पाऊँगा, 
    हाँ, मैं नहीं लिख पाऊँगा ।।

    गर्दिशों में, पल-बढा हूँ,
    दीनता से होड़ है।
    विजय मेरे हाथ होगी, 
    जीत की यह दौड़ है ।।

    वक्त कॆ कर, हार कर, 
    लाचार जब हो जाऊँगा।
    तब मैं नहीं लिख पाऊँगा, 
    हाँ, मैं नहीं लिख पाऊँगा।।

    ह्रदय मेरा अनखता है,
    फूलों की मुस्कान को। 
    बच्चों की तुतली बोलियों, 
    'गुँजन' की मीठी तान को।। 

    सहजता से दूर जब,
    पाषाण मैं कहलाऊँगा। 
    तब मैं नहीं लिख पाऊँगा,
    हाँ, मैं नहीं लिख पाऊँगा।।

    ©गुँजन

  • ravindra_upadhyay_gunjan 31w

    ज़िंदगी में समस्या देने वाले की
    हस्ती कितनी भी बड़ी क्यों न हो,
    पर भगवान की "कृपादृष्टि" से
    बड़ी नहीं हो सकती!!

    राह काली है, कुछ उजाले रख...
    अपनी तहज़ीब को संभालें रख...
    ये राहें ले जाएंगी,
    मंजिल तक...
    हौसला रख
    ऐ मुसाफिर,
    कभी सुना है क्या?
    अंधेरे ने
    सवेरा होने ना दिया...

    ��������������
    ख़ुश रहें..!! स्वस्थ रहें..!! मस्त रहें..!! सुरक्षित रहें....।।

    #Hindinama #mirakee #mirakeeworld #mirakeewriters # hindiwriters #hindishayari #hindi

    Read More

    कोविड महामारी

    यद्यपि कठिन हालात है।
    बस कुछ दिनों की तो बात है।।

    है त्राहि त्राहि मचा हुआ,
    चहुओर विश्व में शोर है।
    कोई नहीं बच पायेगा,
    ऐसी ख़बर का जोर है।।
    ख़तरे में मानव जाति है,
    बस कुछ दिनों की तो बात है।।

    यद्यपि कठिन हालात है,
    बस कुछ दिनों की तो बात है।।

    मंत्र सुन लो जीत का,
    कुछ रोज़ घर में ही रहो।
    नित्य के व्यवहार सारे,
    त्याग, गृहबन्दी बनो।।
    गृहवास इक सौगात है,
    बस कुछ दिनों की तो बात है।।

    यद्यपि कठिन हालात है,
    बस कुछ दिनों की तो बात है।।

    सुख के दिवस जब कट गये,
    दुख भी नहीं रह पायेगा।
    "कोविड" महामारी का इक दिन,
    खात्मा हो जाएगा।।
    सारा जहाँ अब साथ है,
    बस कुछ दिनों की तो बात है।।

    यद्यपि कठिन हालात है,
    बस कुछ दिनों की तो बात है।।

    ©गुँजन

  • ravindra_upadhyay_gunjan 34w

    माँ

    बच्चों की दुनिया होती है।
    माँ तो केवल माँ होती है।।

    ईश्वर का, तू रूप सलोना;
    बाहें तेरी, नर्म बिछौना;
    तेरी अद्भुत-नवल, कोख़ में;
    जीवन की रचना होती है।

    माँ तो केवल माँ होती है।।

    ©गुँजन

  • ravindra_upadhyay_gunjan 34w

    गलियों में चक्कर

    गलियों में चक्कर लगाना मना है,
    बिना काम सड़कों पे जाना मना है।।१

    महामारी कैसी ये फैली कोरोना?
    बड़ी मुश्किलें खूब लायी कोरोना,
    अमरिका औ' इटली सभी फँस चुके हैं,
    कोई तो बचालो, जगत का है रोना;

    दूर रहो यारों, सबसे छोड़ो याराना,
    किसी को गले से लगाना मना है।
    गलियों में चक्कर लगाना मना है,
    बिना काम सड़कों पे जाना मना है।।२

    ऐ नादान बंदे, मास्क से है सुरक्षा, 
    घर में करो, कुछ दिनों की व्यवस्था 
    सभी कोशिशों को न चूना लगाओ,
    सभी हैं परेशां, ना पूछो अवस्था;

    घरों में ही अपनी, करो सारी खिदमत,
    होटल - थियेटर में जाना मना है।
    गलियों में चक्कर लगाना मना है,
    बिना काम सड़कों पे जाना मना है।।३

    लड़ी जा रही हर तरफ़ ये लड़ाई,
    वो नर्सें, ये डॉक्टर, सफाईवाले भाई,
    सभी ओर जानों की बाज़ी लगाके,
    "कोरोना का योद्धा" बना हर सिपाही;

    "कोरोना के योद्धा" के सेहत की ख़ातिर,
    यहाँ वहाँ थूकना, खैनी-खाना मना है।
    गलियों में चक्कर लगाना मना है,
    बिना काम सड़कों पे जाना मना है।।४

    हैं उनके भी नन्हें, हैं उनके भी अपने,
    संजोये हैं रंगीन, जीने के सपने,
    तेरी और मेरी, सुरक्षा की ख़ातिर,
    हैं मुस्तैद सारे, भुला घाव अपने,

    योद्धा सभी, शत-नमन है वतन का,
    शहीदों को सदियों भुलाना मना है।
    गलियों में चक्कर लगाना मना है,
    बिना काम सड़कों पे जाना मना है।।५

    ©गुँजन

  • ravindra_upadhyay_gunjan 35w

    "कोरोना" करता फिरे घातक मृत्यु प्रहार।
    ऐसी विश्व विभीषिका, चीन करे व्यापार।।

    'मृत्योर्मा अमृतं गमय', जीवन का संचार।
    भाग कोरोना सृष्टि से, मुश्किल में संसार।।

    आस्तीन के साँप का, मत पूछो व्यवहार।
    छेद करें निज नाव में, जिसमें बसे गँवार।।

    कह 'गुँजन' कैसे टरे, कोरोना की मार।
    ज़ाहिल बसते देश में, दुखड़े कई प्रकार।।
    ©गुँजन