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  • ravibhushanbhardwaj 3w

    तुम ढूंढ किसे रहे हो मैं यहाँ हूँ,
    इन हवाओं में इन फिजाओं में बस्ता मैं ही हूँ !
    पंछी हूँ साकी मैं मोहब्बत का,
    तुम ढूंढ़ किसे रहे हो मिसाल बने मैं यहाँ हूँ !
    ©रवि भूषण भारद्वाज 'इंद्रा'

  • ravibhushanbhardwaj 3w

    खुदा ने ताराशा जिसे उस पत्थर पर वोह भी मोम का लगता है,
    आंखें खूबसूरत है इस कदर जाम का हर नशा फीका लगता है,
    अब यारों क्या कहुं मै उसकी तारीफ में कुछ और भला ?
    वोह मोहब्बत कि मूरत और मेरा खुदा लगता है !
    ©रवि भूषण भारद्वाज 'इंद्रा'

  • ravibhushanbhardwaj 3w

    एक ख्वाब थी तुम मेरा ! बेशक भीड़ में थाम लेती हो हाथ उसका,
    पर मुड़ कर देख जरूर लेती हो तुम,'वहां कहीं मैं तो नहीं'!
    ये मोहब्बत नहीं तो और क्या है तुम्हारे दिल में ?
    कितने सबूत मांगोगी तुम खुद से अब भला ?
    ©रवि भूषण भारद्वाज 'इंद्रा'

  • ravibhushanbhardwaj 4w

    बात सिर्फ एक रात कि थी तेरे साथ वोह भी बीत गई,
    तुझसे मोहब्बत हो जायेगी ये हमें भी कहा पता था ?
    ©रवि भूषण भारद्वाज 'इंद्रा'

  • ravibhushanbhardwaj 4w

    शाम डलते ही ये क्या हो जाता है मुझे,
    याद तुम्हें करता हूँ या मेरी जरूरत को पता नहीं ,
    ढुंढता हूँ मैं सुकून को जिस रास्ते पर बैठ,
    तुम गुजरती हो !... या ये मुझे खबर नहीं !

    घंटो तो इसी रास्ते पर हाथ थामें बीताया करते थे,
    जिन फूलों को तुम अक्सर तोड़ लिया करती थी,
    वो याद तुम्हें करते हैं मेरी तरह !.. या मुझे पता नहीं ,
    जो भी हो अब ये हवाएं भी शायद तुमसे खफा हैं,
    किसी और के जुल्फों से शरारत अब ये करती ही नहीं ।

    धूल सी पड़ गई है पन्नों पर और स्याहि बस निकलती है कलम से,
    तुम नहीं हो जो लिखने का अब मन करता ही नहीं,
    ये दिल भी खफा तुमसे है शायद मेरा , अब ये धड़कता ही नहीं !
    खुश तो दिखती हो साथ मे तुम उसके,
    पर मौहब्ब्त है या जरुरत, शायद तुम्हें ये खुद पता नहीं ।

    शाम डलते ही ये क्या हो जाता है मुझे,
    याद तुम्हें करता हूँ या मेरी जरूरत को पता नहीं ।

    ©रवि भूषण भारद्वाज 'इंद्रा'

  • ravibhushanbhardwaj 4w

    ये आँखे तुम्हारी ये होंठ तुम्हारे,
    छू लूं जो इन्हें घबरा ना जाना,
    ये मौसम है इश्क़ का जो कर दूँ शरारत,
    मुझे माफ़ करना माफ़ करना !
    ©रवि भूषण भारद्वाज 'इंद्रा'

  • ravibhushanbhardwaj 4w

    रहूँ खोया मैं खुद में ये बेहतर है ,
    ये नाव मुझे ले जाये भी तो कहा? ,
    इस नगर में मतलबी बहुत हैं !
    © रवि भूषण भारद्वाज 'इंद्रा'

  • ravibhushanbhardwaj 5w

    तुम्हें ना पाऊ ये बात अलग है,
    तुम चाँद और मैं जमीं ये बात अलग है ।
    मोहब्बत में कमी रह जाए तो फिर कहना ,
    दिल और खंजर निकाल रख दूँ सामने तुम्हारे,
    सुना है सजा देने का तरीका भी तुम्हारा अलग है ।
    तुम्हें ना पाऊ ये बात अलग है !
    ©रवि भूषण भारद्वाज 'इंद्रा'

  • ravibhushanbhardwaj 13w

    ये दिल जब तक धड़का मुझसे बगावत कर बैठा,
    की खुद को छोड़ वोह तुझसे मोहब्बत कर बैठा ।
    ©रवि भूषण भारद्वाज

  • ravibhushanbhardwaj 30w

    ये इश्क़ ये मोहब्बत सब के बस की बात नहीं,
    हक्कीकत परे है किताबों के पन्नों से !
    ©रवि भूषण भारद्वाज