rasiika

मझधार हूं । || 22 ||

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  • rasiika 1w

    ना सहा जायेगा मुझसे, और रहा भी जायेगा नहीं
    ऐ बेवफा याद कर तूने कहा था तू जायेगा नहीं

    ऐ खुदा कुछ कर कमाल, कह दे के वो जायेगा नहीं
    नहीं नहीं ये बेचैनी, तू भी समझ पायेगा नहीं

    डर ये भी है मुझको के तू अब लौट कर आयेगा नहीं
    डर है आ भी गया तो तू, मुझकॊ मिलने बुलायेगा नहीं

    सिहर उठती है रूह मेरी पर आंसू पलकों पर आयेगा नहीं
    अफसोस के इस कदर तू कभी मुझे चाहेगा नहीं

    काश तेरा भी दिल हो के गले लगा ले तू मुझको
    एक तरफ दिल जानता है तू हाथ से हाथ भी मिलायेगा नहीं

    रात मेरी बीतनी है यही इसी सडक पर
    है अंदर मेरे कुछ ऐसा जो घर तक चल पायेगा नहीं

    याद आया वादा तेरा मै जानती थी तू निभायेगा नहीं
    याद है तूने कहा था कि तू मुझे कभी रुलायेगा नहीं

    देख ले मुड़कर एक बार, तेरा कुछ जायेगा नहीं
    हाल मेरा फिर आज के बाद कोई आकर तुझे बतायेगा नहीं

    अरे ये क्या मुड़कर देख लिया, पर क्यूं ये वो बताएगा नहीं
    वो चला भी जाए शायद लेकिन, ये पल मेरे ज़हन से जायेगा नहीं

    अब अगर वो रुक भी जाये, मुझको संभाल पायेगा नहीं
    हाथ थरथराते है मेरे, मुझसे और लिखा जायेगा नहीं
    ©rasiika

  • rasiika 15w

    जी कहीए आपने बुलाया हमको
    क्या हुआ फिर कोई तकरार है क्या

    वैसे ये तहज़ीब ठीक नहीं बुला लेने की
    मकान है ये आपका कोई नवाबों का दरबार है क्या

    हुआ क्या है पढा आपने कोई आज अखबार है क्या
    तकलीफ़ आपको दे रहे फिर मेरे अशऺआर है क्या

    क्या कहा मै छोड़ दू ये शायरी की लत मेरी
    या अल्लाह! तुम ही बताओ अब ये भी कोई तकरार है क्या

    मेरी बडी तमन्ना है कत्ल करने की यार तुम्हारा
    बताओ कलम से भी बेहतर और कोई तलवार है क्या

    जिंदा रहने के तरीके तुम्हारे अलावा और भी है
    तुमको क्या लगा तुम्हारा होना मेरे लिए दरकार है क्या

    सौ नज्में लिख दी मैंने नाम तुम्हारा आया नहीं
    बोलो कही देखा तुमने मुझसा कोई दिलदार है क्या

    मै हूं फरेब, दवा भी हूं ; ज़हर हूं मै, दुआ भी हूं
    तुम होते कौन हो पुछनेवाले की मेरा किरदार है क्या

    और भी आयेगी ग़ज़लें अभी तुम देखो तो जरा ओ जान-ए -जॉं
    हमे नहीं समझता कुछ ये बेवजह इनकार है क्या

    आज जरा खामोश सा तुम्हारा जुबान-ए-हथियार है क्या
    क्यू मुझसे मुकाबला इतना भी दुशवार है क्या

    क्या लगता है तुझे तू इतना भी हक़दार है क्या
    तू कहे और मै मान लू, क्यू तू कोई सरकार है क्या
    ©rasiika

  • rasiika 37w

    सुनो इजाज़त हो तुम्हारी तो कुछ कहने आये है तुमसे
    वैसे कही जा सके ऐसी वो बात नहीं है |

    बहाना ही समझ लो आने का हमारे
    काटी जा सके हमसे ये वो रात नही है |

    क्या कहा क्यूं ठीक मेरे हालात नहीं है?
    खाओ कसम के इसमें तुम्हारा कोई हाथ नहीं है |

    देखो तो कितनी फिक़र हो रही हमारी
    हम तो यूं ही समझ बैठे के तुममे जज्ब़ात नहीं है |

    पुछा तो अब बता दे रहे है सुन लो
    ग़म छुपाने में वरना मेरी कोई मात नहीं है |

    है एक शख्स ; कम्बख्त पास नहीं है
    सामने है मेरे पर सोचो साथ नहीं है |

    नाम में क्या रखा है अब जाने भी दो
    नाम सुनना वो तुम्हारे बस की बात नहीं है |

    एक और बार पुछो तो बता भी दूं शायद
    पर अब पुछने की तुम्हारी औकात नही है |

    मंजूर नही हमको यूं हमारे ग़म का बटना
    ग़म है ये दर्द है ; कोई खैरात नही है |

    हा तो क्या कह रहे थे हम.. हाँ! कोई बात
    खैर जाने दो.. मुझको अब वो याद नहीं है |
    ©rasiika

  • rasiika 37w

    अभी भी शायद किस्मत मे मेरी होना कुछ कमाल लिखा है
    यूं ही नहीं उपरवाले ने जिंदा मुझे हर हाल रखा है |

    तेरे हर सितम को मेरी जान, मोहब्बत के सांचे मे ढाल रखा है
    एक तुझे सोचने की खातिर मत पुछ; क्या क्या दिल से निकाल रखा है |

    मुजरीमों का क्या है मुज़रीम बहुत है मेरे
    लिखते वक्त फक़त तेरा नाम लेकिन, रंग स्याही का लाल रखा है |

    एक अरसे से बस देखती आयी हूं तुम को
    देखने में जो ईश्क है, मिलने मे क्या खा़क रखा है |

    लोग कहते हैं मुझ से के ईश्क ऐसे नहीं होता
    लोगों ने भी ना जाने क्या क्या वहम पाल रखा है |

    तेरे हुस्न का क्या कहना, कर बुरा हाल रखा है
    इधर हुस्न ने ही है बिगाड़ा इधर आंखों ने संभाल रखा है |

    मिल जाये तो पुछू उससे के ऐ देनेवाले
    क्या ही सोचकर तूने बता मेरे सामने ये जमाल रखा है |

    आसान थोड़ी ही है तुझ तक पहुँच पाना मेरा
    मेरी खिदमत मे कदम कदम पर कोई ना कोई सवाल रखा है |

    इंतज़ार है मुझे बस तेरे एक इशारे का
    एक इशारे तक मैने हर सवाल को टाल रखा है |
    ©rasiika

  • rasiika 38w

    This is not a post. It's a prayer.
    A universal prayer.
    I want you to affirm.
    I am faith.
    I am faith.
    I am faith.

    I claim we all will get through this.
    Pray.

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    Dear,
    Almighty

    I am scared. My hands tremble and my lips shake. I need you. I know you read the words I don't write. I know you saw me joining hands and looking up when I knew it was you. I know you have seen me weeping in the corridors. I know you have seen me kneeling down on the floor when my legs couldn't bear the weight of your mercy. I have felt your vibrations right through my skin when my muscles were too swollen to breathe. I have laughed with you. I have prayed with you. You have seen things I have not shown. You were with me; within me when I was not myself. I have made countless leaps of faith and never for once, you did not catch me.

    Yet, I am scared. My hands tremble and my lips shake.

    But believe me when I say I know I am your child.
    Believe me when I say that I believe in the warrior you have turned me into. I want you to believe in the warrior whose sword smells like faith.
    I am faith. I am power. I am peace. I am pure.
    I lean onto you for one more time. I surrender to the divine. I offer you all of 'me'. I have in my heart all of 'you'. I rest my head in your feet and close my eyes and breathe until you set your miracle in motion. For I know I need you like I always have and you will show up when I need you the most like you always have.
    I surrender. I breathe. I bow down. I shiver. I breathe. I kneel.
    I believe. I believe. I believe.
    I am faith. I am power. I am peace. I am pure.

    Truly,
    Your child.
    ©rasiika

  • rasiika 48w

    बचा है क्या अंदर मेरे मरने को कुछ और
    तूने मेरी कसम खाई ; जा मैंने यकीन किया |
    ©rasiika

  • rasiika 48w

    अर्ज़ है के कोई बचा ले अब मुझको
    कुछ ऐसा मै आज काम कर आयी हूं |

    ऐलान-ए-ईश्क मै सरेआम कर आयी हूं
    माशूक़ बताकर मेरा उसे, मै उसको बदनाम कर आयी हूं |

    बीच सड़क में गले लगाकर उसको
    हैरान मैं सारी आवाम कर आयी हूं |

    कोई दुआ करे उसके लिए खुदा उसका हाफ़िज़ अब
    मै छूकर उसे उसका मजहब हराम कर आयी हूं |

    शक था उसको मुझपर के बे लिहाज़ हूं मै
    शक की गुंजाईश को ही मै तमाम कर आयी हूं |
    ©rasiika

  • rasiika 53w

    तुम नहीं होते तो शायद हम हम नहीं होते
    रवैये नम नही होते, इतने ग़म नहीं होते |

    हो ना हो इतना तो जान गए हम ज़रूर
    उल्फ़त से बेहतर और कोई सितम नहीं होते |

    सहकर भी और कहकर भी ये दर्द कम नहीं होते
    सच ही कहते है ; हर जख्म के मरहम नहीं होते |

    तुम ठहरे मसरूफ़ और फुरसती हम नहीं होते
    कभी कभी हो शायद ; हरदम नहीं होते |

    चलो मान लिए तुम्हारे सारे लंबी मुलाकातों के वादे
    पर हमारी मानों तो चंद लम्हे भी कुछ कम नहीं होते |
    ©rasiika

  • rasiika 56w

    दहलीज पर हमारी देखो तो आकर खडा है कौन
    आइये ना मेहेरबा मेरा अदब भरा आदाब दू |

    अक्स है, क़मर है, कायनात है या इलाही !
    शेर चीज़ क्या है तुमपर तो लिख कोई किताब दू |

    सुना है तुमको आई है तलब फिर बेहोशी की
    देर ना करो बताने मे अब शराब दू या शबाब दू |

    यूं तो मेरी कई राते उधार रही तुमपर
    बैठो जरा आराम से तुम्हे एक एक का हिसाब दू |

    नशा, ज़हर, फरेब, खता ; हम तो है उलझन मे
    बताईये ना हुजूर आपको कौनसा खिताब दू |

    इनकार जो कर दिया तुमने गले लगाने से मुझको
    बेकाबू सी धड़कनों को बोलो क्या जवाब दू |

    रास नहीं आता मेरे मकान को आना किसी फरामोश का
    तुम बताओ नकाब तुम्हारा काफ़ी है या हिजाब दू ?

    ©rasiika

  • rasiika 65w

    विसरू कशी सांग मला मी,होती एक रात्र अशीही
    एकाच ज्या रात्रीत माझा, जन्म जणू साकार होता ..

    आर्ततेला तुझ्या माझ्या, चांदणे आधार होता
    ओठ तुझे कपाळी माझ्या, इतकाच काय तो श्रुंगार होता..

    निषाद मी 'काफी' चा, तू ही कुणी गंधार होता
    हलकाच वार तो पण वार आरपार होता..

    बोचरा तो श्वास तुझा,विस्तवात गार होता
    ह्रदयात तुझ्याही माजला,वेगळाच हाहाकार होता..

    घायाळ तो जीव माझा,तुझ्या नजरेचा मार होता
    सुटलाच जो त्यातूनही,तो हुंदक्याने ठार होता..

    थकलेली रात्र ती,तिजवर सुखाचा भार होता
    तेवण्याची माझ्या जाणीव मला,करून देत अंधार होता....
    ©rasiika