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  • ramaiyya 16w

    ख़ला- vacuum
    रज़ा - will, wish

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    ग़ज़ल (बता मुझको)

    हुई मुझसे ख़ता क्या है बता मुझको,
    खताओं की सज़ा क्या है बता मुझको।

    हवा जिसमें घुली हो आग नफ़रत की,
    भला वो भी हवा क्या है बता मुझको।

    बिछी हैं लाश सड़कों पर किसानों की,
    शहंशाही रज़ा क्या है बता मुझको।

    मिलेगा जो दुखा कर दूसरे का दिल,
    मज़ा वो भी मज़ा क्या है बता मुझको।

    खफ़ा साया भी' हो जाता तमस में जब,
    सगा है तो सगा क्या है बता मुझको।

    जलाकर झोंपड़ी तक भी गरीबों की,
    सियासत का जला क्या है बता मुझको।

    'रमन' तेरा सनम जब साथ है तेरे,
    अजब सी ये ख़ला क्या है बता मुझको।

    रमन यादव
    ©ramaiyya

  • ramaiyya 17w

    विफल रहा मैं तुमको खुश रख पाने में,
    चला गया वक्त प्रेम का रूठे को मनाने में,
    सोच समझ कर बातें करना नहीं सीखा,
    इस कर के रंग प्रेम का पड़ गया फीका,
    हो सके तो जाना भूल जो बात कही,
    तुम खुश रहना, मेरे साथ नहीं तो बाद सही।

    अपनी सब भूलों को लेकर शर्मिंदा हूँ,
    न जाने किस हक से अब तक जिंदा हूँ,
    कोशिश में नाकाम रहा खुद को समझाने की,
    अब हिम्मत जुटा रहा हूँ इस दुनिया से जाने की,
    दुख दूर रहें और बची रहे खुशियों की बही,
    तुम खुश रहना मेरे साथ नहीं तो बाद सही।

    रमन यादव

    ©ramaiyya

  • ramaiyya 17w

    मेरे साथ नहीं तो बाद सही,
    तुम खुश रहना,
    हो जब हाथ में मेरा हाथ नहीं,
    तुम खुश रहना।

    रमन यादव

    ©ramaiyya

  • ramaiyya 17w

    क़मर- चंद्रमा

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    ग़ज़ल 'असर'

    बनें अनजान बेशक वो मगर उनको खबर तो है,
    कि चाहे वो रहे बचते मुहब्बत का असर तो है।।

    चलें तो पाँव फटते हों हवा में साँस घुटती हो,
    मनाना खैर तब तुम ये कि चलने को डगर तो है।।

    लुटाने को लुटा दूँ आज ही मैं जान भी उन पर,
    यकीं हो बस कि उनका बाद मेरे भी बसर तो है।।

    समंदर के बवंडर में फँसो तो याद रखना ये,
    लगाने को सफ़ीना पार दरिया में लहर तो है।।

    भले कितनी हसीं बाहर से हों' गलियां ये' सत्ता की,
    लगा दे जो अमन को आग इसमें वो शरर तो है।।

    'रमन' चलना सनम का हाथ जीवन में पकड़ कर तुम,
    ढले सूरज तो' भी क्या डर बगल में इक क़मर तो है।।

    रमन यादव
    ©ramaiyya

  • ramaiyya 32w

    टूट

    टुकड़ों में मैं बिखर रहा हूँ,
    टूट रहा हूँ धीरे-धीरे,
    लाख मिलाऊं तान दिलों की,
    चूक रहा हूँ धीरे-धीरे।

    ख़्वाब प्रेम का ख़्वाब हसीँ है,
    डगर प्रेम की मगर कठिन है,
    बेशक कुंड है प्रेम सुधा का,
    जलन प्रेम की मगर कठिन है।

    मुझ से जब जब वो रूठें,
    रोने का मन करता है,
    आँसू से कर तकिया गीला,
    सोने का मन करता है।

    मेरे हिस्से की सब खुशियाँ,
    नाम उन्हीं के हो जाएं,
    टकराते हैं जो जश्न में,
    जाम उन्हीं के हो जाएं।

    हाथ जोड़ कर विनती है कि,
    सम्मान ताक पर मत रखना,
    हर खता पर दंडित करना,
    मान ताक पर मत रखना।


    रमन यादव

  • ramaiyya 37w

    प्रेम

    प्रेम में जान न दे जान लगा जीने में,
    छोड़ परहेज सभी प्रेम सुरा पीने में,
    रूठ महबूब अगर आज जरा भी जाए,
    कल नहीं आज मना और बसा सीने में।

    प्यार का नाम न लें प्यार अगर झूठा हो,
    प्यार का नाम अगर प्यार ने' ही लूटा हो,
    वो सनम ख़ाक सनम हाथ से' जिसके पल में,
    हाथ माशूक का' बिन बात झगड़ छूटा हो।

    जानते प्रेम की क्यों आज बुरी हालत है,
    प्रेम अब स्वार्थ जनित जो की बुरी आफत है,
    काम की चाह को जब नाम दिया चाहत का,
    धारणा प्रेम की' यह प्रेम ही' पर लानत है।

    इश्क़ क्या इश्क़ भला इश्क़ अकेला तन का
    हाल बेहाल न हो इश्क़ में' डूबे मन का,
    तन ज़रा आज नहीं होगा' अगर, हो कल,
    बिन तड़प मन में' उठे इश्क़ दृश्य हो वन का।

    प्रेम कमजोर न हो साल महीने भर में,
    साथ मजबूत लगे नित, न विरह के डर में,
    जब लगे दूर चला साथ मिरा हर पल का,
    थाम लो हाथ सदा प्यार से' अपने कर में।

    रमन यादव
    ©ramaiyya

  • ramaiyya 58w

    समय

    वक़्त सभी कुछ देख रहा है,

    हंसना रोना, रो कर सोना,
    इश्क़ अश्क का एक ही होना,
    मिल कर तेरा हसीं ख्वाब से,
    ख्वाब का बोझा कांधे ढोना,

    वक़्त सभी कुछ देख रहा है।

    रात रात भर तेरा जगना,
    गले खुद ही के खुद ही लगना,
    कसमें वादे प्यार वफा के,
    नाम पर तेरा खुद को ठगना,

    वक़्त सभी कुछ देख रहा है।

    नाम पिया का रटते रहना,
    याद पिया को करते रहना,
    छोड़ गया जो बीच सफ़र में,
    उसी पिया पर मरते रहना,

    वक़्त सभी कुछ देख रहा है।

    भूतकाल से लड़ना तेरा,
    नए सफ़र पर बढ़ना तेरा,
    मन में हौसला ले कर के,
    नए शिखरों पर चढ़ना तेरा।,

    वक़्त सभी कुछ देख रहा है।

    क्षितिज पर तेरा नभ से मिलना,
    सभी डरों का धड से गिरना,
    और तेरे क़दमों की रव से,
    पतझड़ में किसलय का खिलना,

    वक़्त सभी कुछ देख रहा है।

    मिलन तेरा नए साथी से,
    ज्यों दिए का बाती से,
    Whatsapp के दौर में भी,
    इजहार इश्क़ का पाती से,

    वक़्त सभी कुछ देख रहा है।

    जीवन में उठने गिरने को,
    वक़्त का पहिया फिरने को,
    यादों में उलझी माला सुलझा,
    भावी कल के पिरने को,

    वक़्त सभी कुछ देख रहा है।

    रमन यादव

    ©ramaiyya

  • ramaiyya 60w

    मिलन

    जब से तुझ से गले मिला, मेरी,
    साँस साँस तेरा नाम पुकारे,
    महके महके दिन हैं मेरे,
    बहके बहके सांझ-सकारे।

    ऐसा लगता है मानो,
    भटके राही को आयाम मिला,
    शूल बिछे थे जिस पथ पर,
    वहाँ मखमल का मैदान मिला।

    जीवन सूना वीराँ था,
    नाउम्मीदी थी रग रग में,
    तेरी छुअन ने आशाओं का,
    दीप जलाया मग मग में।

    मीठी मीठी खुशबू फैली,
    बदन से ले कर मेरे मन तक,
    कमीज़ सुरक्षित रख दी है वो,
    पहुँच सकी जो तेरे तन तक।

    मरूथल दिल का प्यासा था,
    थे श्रांत सभी संवेग मेरे,
    अरुणाई फूट पड़ी साधों में,
    शांत सभी उद्वेग हुए।

    हुआ सुवासित अंग अंग मेरा,
    बोलूं कुछ तो गीत झरें,
    बरखा आयी बिन मौसम ही,
    मेरे गीतों में संगीत भरे।

    तेरे मिलन की झील से सिंचित,
    सौ फूल खिले करीलों में,
    सुकूँ से पल मे आन मिला मैं,
    जिससे दूरी कभी थी मीलों में।

    रमन यादव

    ©ramaiyya

  • ramaiyya 63w

    तुम मेरे

    मैं ज़िन्दगी काटना नहीं चाहता, तुम संग बिताना चाहता हूँ,
    इसलिए मैं तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।

    मैं तुम्हारी हंसी में खो जाऊँ,
    तुम्हारी बाहों में बातें करते करते सो जाऊँ,
    जब चाहूं तुम्हें सीने से लगा लूँ,
    मुझे नींद न आए तो तुम्हें सोते से जगा लूँ,
    मुस्कुराना छोड़ तुम संग ठहाके लगाना चाहता हूँ,
    इसलिए मैं तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।

    बारिश की बूंदों में अठखेलियां करना,
    भीगे बदन को बाहों में भरना,
    बादलों में तुम संग तस्वीरें ढूँढ़ कर,
    उन तस्वीरों के तसव्वुर में डूब कर,
    तुम संग वक्त बिताना चाहता हूँ,
    इसलिए मैं तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।

    मैं कोशिश करूंगा कि तुम्हारी आंखों से आँसू न गिरें,
    फूल से कोमल हमारे संबंध में काँटे न पिरें,
    फिर भी कभी अगर ऐसा हो, आप अकेले न पड़ें,
    हमारे प्यार के आगे हमारे ego न अड़ें,
    सब उलझनों से दूरी बनाना चाहता हूँ,
    इसलिए मैं तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।

    Couples में होने वाली खींचतान हो, पर यार झगड़े नहीं,
    मतभेद होते हैं तो हों, पर बातों से अकड़े नहीं,
    सम्मान की सीमा निरंतर बढ़ती चली जाए,
    हमारी मुहब्बत की किश्ती ज़िन्दगी का दरिया पार करती चली जाए,
    अड़चनों को तुम संग मिलकर दूर भगाना चाहता हूँ,
    इसलिए मैं तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।

    मेरी open mindedness बढ़े, विचार उदार हों,
    मेरी बुरी आदतों में कुछ तो सुधार हों,
    कमरा यूं न हमेशा बिखरा रहे,
    चेहरा मेरा खुशी से निखरा रहे,
    तुम्हारे कामों में मैं हाथ बटाऊँ,
    रोज अनगिनत बार तुम पर अपना प्यार लुटाऊँ,
    बोरियत का कोई पल न हो,
    ऐसी कोई मुश्किल न हो जो हल न हो,
    ऐसी कोई जरूरत न हो जो पूरी न हो सकें,
    हम ऐसे एक हो जाएं कि फिर दूर ही न हो सकें,
    ये सब ख्वाहिशें मैं तुमसे रोज़ जताना चाहता हूँ,
    इसलिए मैं तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ।

    रमन यादव

    ©ramaiyya

  • ramaiyya 63w

    ढूंढ लाओ

    मोबाइल में नींद खो गई,
    चिंताओं में चैन,
    बंद घरों में छाँव कैद है,
    प्रदूषण में रैन।

    दुलार पिता का, लोरी माँ की,
    खो गई है भागदौड़ में,
    मात-पिता दोनों नियोजित,
    समय बीत रहा जोड़-तोड़ में।

    अनिद्रा में ख्वाब खोए हैं,
    सेहत है बेहाल,
    बैंक भरा है पैसों से,
    दिल हुए कंगाल।

    दौड़ भाग का खेल चढ़ गया,
    मोबाइल की भेंट,
    घर छोड़ना निषेध हुआ है,
    बाहर जड़ गए गेट।

    अर्थ गुमे हैं गानों से,
    बढ़ गया है शोर,
    तोड़ मोड कर संगीत पुराना,
    गा रहे हैं चोर।

    हिंदी वाले अंग्रेजी में गुम हैं,
    अंग्रेज बने हैं सेठ,
    देसी बोली का उड़े मजाक तो,
    कैसे बोलें ठेठ।

    सच्चे प्रेम की बस बची किताबें,
    जिस्मानी हो गई प्रीत,
    साथी छोड़ो, साथी बदलो,
    बन गई है रीत।

    यही सब जो गुम गया है,
    ढूँढ रहे हैं हम,
    सारा नहीं तो न सही,
    मिल जाए थोड़ा कम।

    रमन यादव

    ©ramaiyya