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  • rajkssora 40w

    हम तुम्हारे है

    है सर्वज्ञ बिखरी यादें तुम्हारी
    गूंजती है हर पल बातें तुम्हारी
    मैं तुम्ही को सोचता हूँ हर पल
    मेरे आज में हो तुम्ही हो मेरे कल

    अनर्गल व्यथाओं से एकदम परे
    नींव संजोने में हम जरा भी ना डरे
    मिथ्या से परे होगा हर पल हमारा
    बहुत ही सुखद होगा आने वाला कल हमारा

    भौतिक सुखों में उतने लिप्त कहाँ है
    किस्सा हमारा इतना संक्षिप्त कहाँ है
    हमने सच को पूर्णतया स्वीकार कर
    प्रेम भाव को खुद में संचार कर
    हमने दोष अपने खुद ही स्वीकारे है
    फिर कहा-प्रिय आज से हम तुम्हारे है
    ©rajkssora

  • rajkssora 42w

    सबकुछ ब्लर रहेगा

    बस हम और तुम होंगे सोचो कितना खूबसूरत सफर रहेगा
    बस एक तुम ही रहोगी फोकस में बाकी सबकुछ ब्लर रहेगा
    © Raj Kishor Singh

  • rajkssora 51w

    ख़त

    नाम तुम्हारे एक ख़त लिख रहा हूँ
    मालूम है कि बेमतलब लिख रहा हूँ
    पर जब तुम इसे पढ़ रहे होंगे
    हर्फ़ दर हर्फ़ आगे बढ़ रहे होंगे
    नाम अपना पढ़कर तुम मुस्कुराओगे
    तुम बिना रुके बस पढ़ते ही जाओगे
    ना तुम्हे पराया और ना अपना लिखूंगा ,
    तुम्हे जागती आँखों का कोई हसीन सपना लिखूंगा
    ना आस लिखा मिलेगा तुम्हे पाने का
    ना प्यास लिखा मिलेगा तुम्हे अपना बनाने का
    मैं कुछ बाते जानकर अधूरा लिख जाऊंगा
    पर तुम्हारे हर सवाल का जवाब पूरा लिख जाऊंगा
    तुमसे जो है शिकायत सब लिखूंगा
    क्यूँ हो रही है तुमसे मुहब्बत अब लिखूंगा
    मैं भी इतना नहीं जानता स्वयं को
    तुम कैसे जानते हो इतना मेरे मन को
    तुम्ही कहो नीरस मेरे जज़्बात है क्या ?
    चाहना किसी को गलत बात है क्या ?
    मैं जाहिर नहीं अपने जज़्बात करूँगा
    जो पसन्द हो तुम्हे बस वही बात करूंगा
    जी करता है कुछ आदतें तुमसे चुरा कर रख लूँ
    अगले ख़त के लिए बाते कुछ बचा कर रख लूँ
    किये गए कुछ वादे तोड़ कर जा रहा हूँ
    मैं ये ख़त तुम्हारे सिरहाने छोड़ कर जा रहा हूँ
    मन की सारे बातें तुम लिफ़ाफ़े पर निकाल रखना
    अच्छा सुनो, चलता हूँ तुम अपना ख़्याल रखना

    © Raj Kishor Singh


    ©rajkssora

  • rajkssora 170w

    मैं

    एक अनंत ,असीमित जाल हुँ मैं ,
    खुद में ही कई सवाल हुँ मैं ।
    ©rajkssora

  • rajkssora 170w

    मेरा सुकुन

    एक अरसे से मैं अपने हालात लिख रहा हूँ।
    सिर्फ तालियों के लिए अपने जज्बात लिख रहा हूँ।
    किसी को तोहफे में दे दिया है दिन का सुकुन,
    और स्याही से अपनी हर रात लिख रहा हूँ ।
    ©rajkssora

  • rajkssora 170w

    अंधविश्वास

    जिस देश मे धर्म के नाम पे खून की नदियां बहाई जाती है ,
    उसी देश मे हर रोज "गीता" की भी झूठी कसम खाई जाती है।
    ©rajkssora

  • rajkssora 170w

    गुमां

    बनकर कली बाग़ में जिन्हें सँवरते देखा है ,
    उम्र के साथ उन्हें भी जमीं पे बिखरते देखा है।
    कौन है ये लोग गुमां में लबालब डूबे हुये ,
    हमने तो चाँद को भी ग्रहण लगते देखा है ।
    ©rajkssora