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  • raj_shivay_ 3h

    पढ़ो मत..

    जानता हूं मैं अकेला हूं पर सही हूं
    और मुझे अकेला ही ये सफर तय करने दो
    लगता है,कुछ मतलब हैं तुमसे मेरी लिखावट का
    आप वस इतना करो मोहतरमा मुझे पढ़ना छोड़ दो
    ©raj_shivay_

  • raj_shivay_ 1d

    दर्द..

    दर्द अब रहा नहीं
    जब उसको ही कुछ दिखता नहीं
    और मैंने छोड़ दिया बयां करना दर्द को
    इसलिए मैं अब लिखता हूं..
    ©raj_shivay_

  • raj_shivay_ 5d

    भूलता मैं..

    क्या लिखू क्या न लिखू
    इस कश्मकश में उलझा हूँ मैं
    और जेहन में आता नहीं तुझे लेकर कोई सवाल अब
    लगता तुझे भूलता जा रहा हूँ मैं
    ©raj_shivay_

  • raj_shivay_ 1w

    जाता ही नही तेरा ख्याल इस दिल से..

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    तू..

    जी भर करलू तुमसे बात में
    मुझे ख्वाहिश नहीं किसी और की
    और मेरा वक़्त तो तुझसे है
    मुझे जरूरत नहीं किसी दौर की।।
    ©raj_shivay_

  • raj_shivay_ 1w

    ठीक से करलू बात एक दफा तुमसे
    ©raj_shivay_

  • raj_shivay_ 1w

    नजदीकीया..

    रास्तो से पूछता हूँ पता उनका
    और कहने को नजदीकिया होकर,दूरियां है
    करते हो दिखावा नजदीक होने का क्यूं तुम
    कहने को उनके लिए,काफी मजबूरिया है..
    ©raj_shivay_

  • raj_shivay_ 1w



    Aaj se badalte hai
    Uuse uske haal pr chorte hai aur hm bhi aage badhte hai..
    ©raj_shivay_

  • raj_shivay_ 2w

    क्यूं..

    शब्दों को इस कदर घुमाया जा रहा है
    मुझे तो उसके साथ,ये जमाना भी सताए जा रहा है
    और अब है नहीं कोई नाता मेरा उससे,तुम्हें बता दूं
    फिर क्यूं उसे देखकर मेरा बताया जा रहा है
    ©raj_shivay_

  • raj_shivay_ 2w

    चाहते है आपको दिलों दिमाग़ से
    पर तुम उन्हें चाहती हो जो चाहते है तुम्हे केवल दिमाग से...
    ©raj_shivay_

  • raj_shivay_ 2w



    मर जाऊंगा एक दिन ऐसे ही चाहते-२
    उम्मीद में कि तुम भी मुझे चाहोगी...
    ©raj_shivay_