rahat_samrat

शब्दों की यात्रा ✍

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  • rahat_samrat 2d

    छोटे हैं लड्डूगोपाल,
    जिनके बिगड़े हैं सुर ताल,
    मटका मोटू नटवर लाल,
    अच्छी रचना काली दाल,
    बधाई देती दीदी प्यारी,
    मुबारक दिन ये मिट्ठूलाल।

    जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई गुणी बाबा।
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    ✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨
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    @gunjit_jain

    दुर्मिळ सवैया छंद

    चरण- 4 (समतुकांत)
    वर्ण- 24
    मात्रा- 32
    विधान- सगण×8

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    छंद

    जिनकी रचना बहती सरिता, धरिता रस छंद सुजान लिये
    वह रूप परस्पर प्रीत लिए, जिन गीत सदा रसगान जिये।
    रचते निज व्योम सुधा सृजना, जिमि भिन्न विधा सम मान दिये,
    वह पुल्कित प्रेम प्रभा प्रतिभा, प्रतिवेश पुनः परिधान हिये।

    गुण गुंजित गर्व गती गरिमा, अमिता नमिता रस सार स्वयं,
    अनुरूप अलौकिक अम्बर सा, रविओज विभा हियधार स्वयं।
    उपमा उपमेय अलंकृतिका, विभु व्यक्ति विनोदित हार स्वयं,
    सह शब्द शिखा सुषमा समिता, पुनिता रुचिता रुचिकार स्वयं।
    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 5d

    झूठ क्यों लिखते हो?
    लिखना है तो सत्य लिखो ना।

    1222 1222 1222 1222

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    ग़ज़ल

    कभी तारीफ़ में दिलबर कभी तो जान लिखतें हैं,
    ग़ुलों की शोख़ियाँ महबूब पर कुर्बान लिखते हैं।

    जताते इश्क़ तो आदाब से पर है नहीं उतना,
    सफ़ा तहरीर से काली, क़लम को शान लिखतें हैं।

    ख़ुदा अहबाब सारे है जवाँ जब तक गरेबाँ है,
    नहीं पलड़ा हुआ भारी, दगा इंसान लिखतें हैं।

    बिछा दो मुफ़्त में काँटें हमें हक़दार रहने दो,
    बड़े अल्फ़ाज़ लेकर के हमीं शैतान लिखतें हैं।

    यहाँ बातें बड़ी बेज़ार जाने लोग करतें क्यों,
    अभी मरना नहीं चाहें मगर शमशान लिखतें हैं।

    बड़े झूठे यहाँ इंसाँ कहें ये दिल हुआ पत्थर,
    तभी कुछ और लिक्खा था अभी सम्मान लिखतें हैं।

    हमारे हिंद में लिखते बड़ी खुशियाँ दिवाली में,
    हृदय से ख़ुश नहीं दो पल, मियाँ रमजान लिखतें हैं।

    अभी गुमराह पन्ने हैं क़लम दावा करे भी क्या,
    जहाँ हिंदी नहीं आजाद हिंदुस्तान लिखतें हैं।

    लिखे राहत फ़सानें, इश्क़, वादें वाह होती है,
    कभी साहित्य लिख दो तो, दिखे अपमान लिखतें हैं।
    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 1w

    गीत- मिथ्यारूपी प्रेम
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    गीत

    प्रेम में परिहास की ही वार्ता को, मनु बताता प्रेम की मूरत यही है,
    बाग में दो पुष्प कोमल हास्य करते, और कहते प्रेम की रंगत यही है।

    साज सज्जा नैन तिरछे सौम्य सुंदर, चाल बलखाती अधर मुस्कान भरते,
    एक से मिलना लुभाना दूसरे को, बारिशों के मेढ़कों सा बात करते,
    प्रज्ज्वलित अब दीप होते ही कहाँ हैं, है प्रतीक्षा का कहाँ परिवेश सुंदर,
    कौन अनुरागी यहाँ वैराग्य में है, कौन सहता पाँव में विश्वास कंकर।
    चेतना में वेदना निष्प्राण रहती, शोर करते पंछियों का खत यही है,
    बाग में दो पुष्प कोमल हास्य करते, और कहते प्रेम की रंगत यही है।

    झूमते गज मस्त होकर उपवनों में, है नही चीटी कहीं की रोक दे वो,
    सर्प गुम होकर गए किस देश को हैं, छिप कहीं फुफकार से ही टोक दे वो।
    आज मुरझाती हुई कलियाँ कहाँ हैं, हैं नही प्यासे नयन जो सूखते थे,
    रूठते तो आज सब कुछ टूट जाता, वो कहाँ जो प्रेम में ही रूठते थे।
    नाचते देखें शिखी, तो कह रहे हैं, आत्मा के प्रेम की सूरत यही है।
    बाग में दो पुष्प कोमल हास्य करते, और कहते प्रेम की रंगत यही है।

    तीन कोनें की हँसी चौकोर अनबन, पाँचवी उपहार लेकर डोलती है,
    पान मदिरा मादकों में झूम करके, मानसिकता छद्म होकर बोलती है।
    है कहाँ वो आज तड़पन दूरियों में, और ना टूटा शिथिल मन देख पाते,
    कोयलों की कूक सुनकर कौन खुश है, हैं कहाँ भँवरे विरह के गीत गाते।
    दीर्घ बातें सूक्ष्म प्रेमी मिश्रितों पर, सार देना प्रेम है लानत यही है,
    बाग में दो पुष्प कोमल हास्य करते, और कहते प्रेम की रंगत यही है।

    घुल रहा प्रतिकार में परिवेश सारा, स्वार्थवश हो मित्र हित पर ध्यान देते,
    धूल उड़ती हिय धरा से मान खोकर, आँधियों सा वृक्ष को अपमान देते।
    है नही वो मेघ जो बरसे नयन से, बारिशों में अश्रु का विस्तार है क्या,
    आहटों में है नही कोई कहानी, आज ख़ुद की ही विजय पर हार है क्या।
    दूरभाषी दूरदर्शन को बताते, प्रेम के परिणाम की संगत यही है,
    बाग में दो पुष्प कोमल हास्य करते, और कहते प्रेम की रंगत यही है।
    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 1w

    जय श्री कृष्ण ��

    छंद- पञ्चचामर
    चरण- 4( समतुकांत)
    वर्ण- 16
    मात्रा- 24
    जगण रगण जगण रगण जगण+S
    ISI SIS ISI SIS ISI S

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    छंद

    प्रभू किशोरचंद्र वृंद वन्दना करूँ हरे,
    नमामि राधिका नमामि नंदना करूँ हरे।
    सुवर्ण भाँवती समेत कल्पना करूँ हरे,
    शिरोमणी हरी प्रणाम अर्चना करूँ हरे।

    सुधा स्वरूप रूप श्याम वेणुधारि वृंद है,
    वही सुकाम नंदलाल व्योम प्रेम नंद है।
    सनेह माधुरी वही प्रभा शुभा प्रकंद है,
    वही विराट शैल, वो प्रवाह मंद मंद है।

    नमामि वल्लभं नमामि माधवं हरी नमो,
    नमामि नंदनं नमामि केशवं हरी नमो।
    नमामि कृष्णकांत रूप राघवं हरी नमो।
    नमामि प्रेमवृन्द श्याम अल्पवं हरी नमो।
    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 2w

    मेरी जान
    शैतान
    सब हैरान
    करती सबको परेशान
    जिसका चित्त महान
    मैं तो करती हूँ बार बार अपनी मटरू का व्याख्यान �� ( insects or mendhak ki बली देवी) ���� ����
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    जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई मेरी महादेवी जी।����

    मेरी चाहत की पंक्तियाँ-

    देख अंधेरे तेरा मुँह काला हो गया,
    मैंने केश हटाए जग में उजाला हो गया।
    ��������������
    इतना भयंकर झूठ कौन लिखता है बे������

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    ❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
    ��������������������������
    Birthday ������������ मनाओ रे आज
    मेरी गुलू गुलू का अवतरण दिवस है।
    ��������������������������
    ❤❤❤
    Sorry yrr bahut kaam h itna hi likh paai

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    मिरी चाहत तुम्हारे साथ हर आदाब प्यारा हो,
    जहाँ तुम हो वहाँ खुशियों भरा नायाब तारा हो।

    तुम्हारी कोशिशों के साथ मंजिल भी तुम्हारी हो,
    जहाँ जाओ वहाँ मुस्कान का परिवेश सारा हो।

    तिरे गालों भरी लाली मिरे गालों पड़े गड्ढे,
    तुम्हारे केश पर सजता हुआ रिश्ता हमारा हो।

    दिखा दो हर उचाईं को नही डरती मिरी जाना,
    तुम्हारी कामयाबी पर छुपा विश्वास न्यारा हो।

    सुनो तुम आज की नारी बड़ी चंचल हृदय वाली,
    सभी भावों भरे तुम लेख का उजला सितारा हो।

    सड़क पर दौड़ती गाड़ी कुतरकर दौड़ते चूहे,
    मिरी बिल्ली बड़ी नटखट चटकती दूब कारा हो।

    बहुत तीखी नही परिवार जैसी दोस्त दो पहलू,
    कभी बहती हुई गंगा कभी सरयू किनारा है।
    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 2w

    1222 1222 1222 122

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    जिन्हें भावों भरे हम दीर्घ गर परिवेश कह दे,
    शराफ़त मात देगी सूक्ष्म गर इक वेश कह दे।

    समाया सिंधु जिनमें व्याप्त सारी हर विधा है,
    हमारी भूल होगी पूर्ण को गर शेष कह दे।

    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 2w

    भाग-2
    श्री नव दुर्गा स्त्रोत ��

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    छंद
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    मातु कत्यायिनी केहरी वाहिनी, षष्ठरूपं च पिण्डेश्वरी माँ नमो,
    अर्चना अल्पना अर्घ आनंदिता, नंदिता विद्य विश्वेश्वरी माँ नमो।
    हेमरूपं भुजा शंख पुष्पं लहे, योगमातेषु योगेश्वरी माँ नमो,
    सर्व प्रादायनी योगमाया जयं,ईश्वरी स्रष्टि सर्वेश्वरी माँ नमो।

    कालरात्रिः नमो सप्तरूपा नमो,गर्दभः वाहिनी सिद्धया माँ नमो,
    मातु चामुण्डये मंगला कालिका, नेत्र ज्वालामयी अष्ट्या माँ नमो।
    रोष संघारिणी दूषणं मर्दिनी,भैरवी दानवं मर्दया माँ नमो,
    संकटा अद्विका मोक्षदा शारदे, कीर्तिका कर्णिका सुप्तया माँ नमो।

    गौरवी माँ महा गौरवर्णी नमो, अष्टरूपं त्व दुर्गेश्वरी माँ नमो,
    दक्ष कौमारिका चंचला अंचला, पार्वती दिव्य दक्षेश्वरी माँ नमो।
    शक्ति श्वेता सती बृह्मिणी सिंहिनी, वैष्णवी सिद्ध वृन्देश्वरी माँ नमो,
    आरुढ़ी आदवी अल्प आद्यायनी, नौमि नित्याय अम्बेश्वरी माँ नमो।

    सिद्धिदात्री नमो शिल्पदात्री नमो, मातु प्राकाम्य त्वं सिद्धिदा माँ नमो,
    पुण्डरीकं शशी अंकिता रिक्तिका, सर्वदा सुक्खदा मुक्तिदा माँ नमो।
    नौनिधिं धारिणिं मातु सिद्धेश्वरी, चंद्रवर्णी शशी सुप्तिदा माँ नमो,
    माँ जयंत्री विधा अम्ब कादम्बिनी, नौमि नारायणी बुद्धिदा माँ नमो।

    मातु यक्षेश्वरी मातु विंध्येश्वरी, वंशिका माँ नमामी नमामी नमो,
    माँ अपर्णा सुवर्णा यशी यक्षिनी, अम्बिका माँ नमामी नमामी नमो।
    मातु वागेश्वरी पूर्णकामी नमो, चंद्रिका माँ नमामी नमामी नमो।
    भद्रकाली भवानी शिवाणी नमो, कन्जिका माँ नमामी नमामी नमो।
    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 2w

    आप सभी को नवरात्रि की अनंत शुभकामनाएँ। ��
    श्री नव दुर्गा स्त्रोत ��
    ******************

    श्लोक-
    वर्ण- 15

    ऊँ सः दुर्गेश्वरी भवतारिणिं महामयः
    नौदुर्गे नारायणी नौमि नित्यं नमोऽस्तुते।

    छंद- गंगोदक सवैया
    चरण- 4 (समतुकांत)
    वर्ण- 24
    मात्रा- 40

    भाग-1
    ******

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    छंद

    शैलजा शाम्भवी माँ नमो रोहिणी, शैलमाता सुभद्रा जया माँ नमो,
    कंज पुष्पं प्रदा पल्लवी पुण्यदा, सः त्रिशूलं प्रभा आदया माँ नमो।
    साधना वन्दना अग्र आराधना, दिव्यज्योतिर्प्रभा सुभ्रया माँ नमो,
    लौ अखण्डं प्रवाहं प्रभुत्वं नमो, नौ नमामी नमः रुद्रया माँ नमो।

    ब्रह्मदेवी तपस्वी तुषा रूपिणी, सर्वकामी विभा प्रेमजा माँ नमो,
    हस्तमालं सुशोभं कृपादायनी, धैर्यदात्री सुधा रूपजा माँ नमो।
    ज्ञान वैरागिनी कीर्तिकामी क्रिया, योग माँ अंशिका अंबुजा माँ नमो,
    भक्ति भावोदया भक्तया भव्यता, बोधता दायनी त्वं अजा माँ नमो।

    चंद्रघंटेश्वरी अर्द्धचंद्रावली, सौम्यता सुभ्रता भावनी माँ नमो,
    दिव्यरूपा स्वरूपा गिरा वासिनी, शक्तिदेवी शिखा सावनी माँ नमो।
    शस्त्र सोहं दशः त्वं भुजं सर्वदा, पुण्यदा प्राणदा पावनी माँ नमो,
    आदिदेवी सुदेवी सती शास्त्रिणी, छत्र छाया छटा छावनी माँ नमो।

    माण्डवी स्रष्टि उद्गामिनी नंदिनी, भावरूपेण भूयः रमा माँ नमो,
    अष्टदेवी दनूजा महारूपिणी, गौरि दुर्गा दया रम्भमा माँ नमो।
    क्लेशनाशं सुखं संप्रदा दायनी, ओजमाता उमा दम्भमा माँ नमो,
    सिंह साहस्त्रिणी भूमिजा शीतला, माँ शिवानी शिवे ऊष्णमा माँ नमो।

    मातु पद्मासना कार्तिका वर्तिका, व्योमवर्णी विभुं वन्दिता माँ नमो,
    सुभ्रवर्णी सुमाता स्वरा भौमिनी, चंद्रवर्णी शुभा मण्डिता माँ नमो।
    चक्र त्रैशूल सोहं चतुर्बाहु माँ, अष्टधात्री शिवी नन्दिता माँ नमो,
    पंचदिव्येश्वरी चंद्रवी चंडिका, योग माँ अम्बिके रन्जिता माँ नमो।
    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 3w

    जय श्री कृष्ण��

    छंद- तोटक
    चरण- 4
    वर्ण- 12
    मात्रा- 16
    विधान- IIS×4 ( सगण×4)

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    छंद

    हरि वासुसुतं सुत नंद नमो,
    प्रभु वेणुधरीश्वर वृंद नमो।
    मुरलीधर केशव चंद नमो,
    प्रभु प्रेम सुधा मकरंद नमो।

    सुखधाम हरी शुभनाम हरी,
    प्रभु प्रेम प्रभाकर बाम हरी।
    अनुभा अजया अभिराम हरी,
    पद बारमबार प्रणाम हरी।

    प्रभु दीनदयाल दयानिधिनं,
    प्रभु आपहि प्रेम मयानिधिनं।
    करतार सुबुद्धि जयानिधिनं,
    भयमोचन श्री अभयानिधिनं।

    जय प्रेम परस्पर प्रीत हरे,
    जय श्याम सुकाम सभीत हरे।
    जय गोपिकवल्लभ मीत हरे,
    जय पावन प्रेम पुनीत हरे।

    जय माधव मोहन श्याम हरे,
    पट पीत पिता सुखधाम हरे।
    मृदुलोचन माखनचोर हरे,
    मधुसूदन नन्द किशोर हरे।

    अनया अचला ऋषिकेश नमो,
    प्रभुता वसुधैविक वेश नमो।
    अनिरुद्ध प्रवाह स्वकामि नमो,
    यदुनंद नमामि नमामि नमो।
    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 3w

    आपको जन्मदिवस की अनंत बधाई मैम ����������
    लेट पोस्ट कर रही मैं क्योंकि पहले आपको पढ़कर सुनाना था तब मैं पूरा पोस्ट करना चाहती थी।
    आपके आशीर्वाद के हम बहुत आभारी है मैम ����‍♀
    नमन आपको, भगवान जी आपको हमेशा स्वस्थ रखें यही कामना करते है, और आपका स्नेह यूँ ही हम बच्चों को मिलता रहे। ��
    बहुत बहुत बधाई मैम ������
    @anita_sudhir

    आ० अनिता सुधीर मैम ��

    दुर्मिळ सवैया छंद
    चरण- 4 (समतुकांत)
    वर्ण- 24
    मात्रा- 32
    विधान- सगण×8

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    छंद
    _____


    रस छंद अलौकिक है जिनके, जिनकी ममता करुणाकर है,
    लय कोकिल कंठ कहे हम क्यों, लय वो बहता पद्माकर है।
    जिनकी रचना अनुराग लिए, भरती कविता रस गागर है,
    शुचिता रुचिता सुषमा सरिता, वह शब्द समागम सागर है।

    ध्वज धैर्य धरे जिमि तीर चले, तिन्ह ओज विधा चहु ओर दिखे,
    अरु ना रमता इनकी समता, लय लेखन भाव विभोर दिखे।
    कलिका लतिका मिहिका रितिका, लिपि सर्व सुधारस शोर दिखे,
    छवि श्याम निशा स्व सुबद्ध रचे, तिन्ह काव्य घटा घनघोर दिखे।

    मधुमीत सुप्रीत सुजीत सदा, मृदुला कविरूपिणि हार लए,
    उनकी बहियाँ पकड़े चलना, जिनसे सुत भार सुधार भए।
    रचि राम कथा लघु रूप स्वयं, वह छंद मनोरम सार दए,
    सुनि कर्ण प्रसन्न भए कृति को, जिन्हके रुचि बोल अपार गए।


    अनिता प्रिय नाम सुधीर सखी, हिय कोमल पंकज प्रेम लिये,
    जिमि लेख प्रवाह प्रबुद्ध घनी, शुचि नेम सुलेख पुनीत दिये।
    अवनी अमिता तिनकी उपमा, जिनके रस छंद विधान जिये,
    कर जोर प्रणाम करूँ जननी, जिन लेख बसे प्रभु राम सिये।
    ©rahat_samrat