radhika_1234569

sapna singh listen to the simple wisdom inside you

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  • radhika_1234569 1w

    वो पहली फुर्सत में निकल लिए
    जैसे इंतज़ार उन्हें जाने का था !
    खैर छोड़ो इश्क़ की बातें ग़ालिब
    उन्हें आदत फिसल जाने का था !







    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 2w

    कभी कितने मासूम हुआ करते थे आज पत्थर हो गए

    मौन और मुस्कान लिए यारब हम खुद बेखबर हो गए!








    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 6w

    ना जाने कौन सी गुस्ताख़ मोहब्बत है ,
    प्यासे को पानी जैसे तेरी ही जरूरत है !









    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 6w

    कल की यादे कल की आस
    जितनी दूरी उतने पास
    हाँथ लगी है बेचैनी बस
    जिसने प्रीत लगाई है l

    वो भी कोई अपना ही था
    वो भी कोई ग़ैर नहीं था
    जिसने नींद चुराई थी
    जी जिसने नींद उड़ाई है l


    सच, सच्चा ,सच्चाई
    सबको रास ना आयी
    सारा जीवन घुटन-जलालत
    हिस्से में रुस्वाई है l

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    प्यार को आखिर समझे कौन
    मन बावरा समझाये कौन
    तन्हा तन्हा एक अकेला
    मन का मौजी दोनों मौन !



    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 6w

    ना जमीं तेरी खुदकी ना आस्माँ तेरा अपना है
    फिर किस बात का हुज़ूर गुरुर तुममे इतना है !

    कब्र भी मिल जाये तो शुकराना उस रब का है
    मिट्टी,हवा,पानी इत्यादि क़र्ज़ कितना दुगना है !

    कितने अलग,कितने जुदा, क्या रौब दिखाते है
    अजी इंसान होकर इंसानियत को भूल जाते है !

    लाखों की बाते करते पर चंद शब्दो से गरीब है
    दर्द की दवा दो मीठे शब्द जो खुद ही हक़ीम है !
    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 7w

    फूलों से इत्र ,
    आंसुओ से स्याही बनते है !
    कागज़ो पर उकेर,
    हर दर्द की ज़ुबानी कहते है !
    रिसते थे मोम सा,
    जो कतरा-कतरा होकर कभी !
    क्यों पत्थर सा लिए,
    अक्सर वो दिल ही मरते है !

    समझ की आग में ,
    क्यों हर ख्वाब स्वाहा होते है !
    न आस न कोई पास है,
    क्यों खुद को सताया करते है !
    दो चार दिन की ज़िंदगी में
    क्यों अहंकार जगाया करते है !
    तुम वही हम भी वही,
    क्यों वहम को अहम बनाया करते है!

  • radhika_1234569 10w

    निगाह जब से तेरी
    तलबगार हो गयी
    बचती है ज़माने से
    समझदार हो गयी l

    अटक के रह गया दिल
    किसी की निगाह में
    उफ़ निगाह उनकी
    दिल के पार हो गयी l

    कहता है ये दिल
    कू-ए- यार को चल
    दिल की बेतुकी-सी
    रफ़्तार हो गयी l

    रुकता है धड़कता है
    थम-थम के बहकता है
    ना जाने कैसे मन
    हाय गिरफ्तार हो गयी l

    देखो तो ये नसीब
    कितने है वो करीब
    वो सामने तो है यारब
    पर दीवार हो गयी l

    कहते है यूं तो वो भी
    तुम सा नहीं कोई
    हम मुन्तजिर है उनके
    राह हमवार हो गयी l

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    निगाह जब से तेरी
    तलबगार हो गयी
    बचती है ज़माने से
    समझदार हो गयी l







    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 13w

    ना वादों ने तुझे रोका , ना शब्दो ने तुझे टोका
    पत्थर के आगे हाय,मेरा दिल क्यों भला रोता l

    कभी पल में चहकते, कभी बेवक़्त बरसते थे
    कोई खिलौना नहीं हूँ जी ,खेल के सिरकते थे l

    कभी लफ्ज़ो कभी नैनों से, क्या नहीं बताते थे
    एक बहरे के आगे क्यों ,भला हम गुनगुनाते थे l

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    बड़ी मग़रूर सी लगती थी तेरी चाहत तेरी हस्ती
    मेरी ख़ामोशी के आलम से हिल गयी तेरी कश्ती!








    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 14w

    किसी की ज़िन्दगी उजाड़ के
    क्या पाएगा ए दोस्त
    जब फुर्सत मिले तो सोचना
    क्या लुटायेगा एक रोज़ !




    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 14w

    इस विरान पड़ी ज़िंदगी में
    जरा आहट तो करो I
    मैं घूँट बन जाऊ प्यास की
    ओजी चाह तो करो I
    अजी छोड़िए न शिकायत
    मिलके बात तो करो I
    कुछ खट्टी मीठी यादों को
    इक बार याद तो करो I





    ©radhika_1234569