raaj_kalam_ka

tagg #osr/photography/music forms invented #sbd_khel ��

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  • raaj_kalam_ka 2w

    #osr������(१७/११/२१)✍️

    आजकल की व्यस्त जिंदगी
    और रिश्तो से बढ़ती दूरी

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    बिखरते रिश्ते

    जलाई नहीं रिश्तो की किताब,
    उसे ताक पे सजाया है
    जमी हुई धूल को ना कभी हटाया है।

    इंतजार उस हवा के झोंके का,
    जो पन्ने बिखेर जाए
    समेटते पन्नों में भूले से ही सही
    कोई अपना याद आ जाए
    दिल कर जाए पूछने का कि
    बता ए मेरे रिश्ते
    तुम जिंदा हो, के मर गए।।
    ©raaj_kalam_ka

  • raaj_kalam_ka 4w

    #osr❣️#2lines (१/११/२१)✍️
    agar smajh m aaye toh mujhe bhi smjha dena ��

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    कह दियो

    नासमझ है रे तू जो अपनों से डरता रहा
    बेगाने हो रहे थे हावी तू अपनों से बचता रहा।
    ©raaj_kalam_ka

  • raaj_kalam_ka 5w

    #osr��@writersnetwork @miraquill
    ���� सुप्रभात मित्रों
    आपका दिन शुभ हो��

    भूल जाओ वह हर पल जो याद रखने लायक ना हो
    याद रखो वह हर पल जो याद रखने लायक हो ।।

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    MORNING SMILE

    FORGET every moment
    that is NOT WORTH REMEMBERING

    REMEMBER every moment
    that is WORTH REMEMBERING .
    ©raaj_kalam_ka

  • raaj_kalam_ka 5w

    #osr����(२२/१०/२१)✍️

    ख़ता माफ़ हो
    हमने तो इश्क़ कर लिया.. जनाब का पता नहीं
    काश कुछ ऐसा हो जाए कि उन्हें हमारे इश्क़ से इश्क़ हो जाएं
    ������❣️❣️

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    मोहब्ब्त हो गई

    ख़्वाबों में !! कंधे का वो तिल चुम लेती
    पेशानी पर पड़ी सुनहरी जुल्फ़ें संवार देती
    पर मोहब्ब्त हो उन्हें भी ... नहीं जानती!

    आँखों की चिलमन में रोज़ क़ैद कर लेती
    खट्टी-मीठी गुफ्तगू के कसीदे काढ लेती
    पर मोहब्ब्त हो उन्हें भी... नहीं जानती !

    ज़बरदस्ती का सौदा नहीं यह इश्क़, जो खरीदा जाए
    दिल में रह जाता है वह, जो धड़कनों में बस जाए
    दीवानी बन गई मैं बस वे मेरे सरताज बन जाए !

    रब्बा इश्क़ मिरा पहचाना जाए जुबां पे करार आए
    मोहब्ब्त हो गई उन्हें भी ..एक बार वे भी फरमाएं!
    ©raaj_kalam_ka

  • raaj_kalam_ka 6w

    #osr������ (17/10/21)

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    वो

    हमसफ़र.. हम-सफ़र ना रहा, रोई मैें जार-जार
    तड़पाती उसकी यादें, नां लिखती मिटाती बार-बार !
    ©raaj_kalam_ka

  • raaj_kalam_ka 7w

    #osr @jigna_a pls ek Nazar����

    उनके ख़्यालों को बताने का प्रयास जो उलझ गए, नरक भरी ज़िंदगी में❣️����गुणीजन कृपया त्रुटियों से अवगत कराएं����


    ����������������������������������
    आज फिर मैंने अपना घर सजा लिया
    देखो मैंने *यादों का दस्तरख्वान बिछा लिया
    कुछ यादें भीगी *बारिश के जैसी
    कुछ यादें बरसते *बादलों के जैसी
    कुछ यादें *चाय की चुस्की के जैसी
    मीठी और सुकून से भरी
    और कुछ यादें ....बस यादें ही हैं !!

    बात उन दिनों की जब इश्क़ हमारा
    बादल और सूरज की तरह
    दुनिया की नज़रों से बेजार था
    इश्क़ परवान चढ़ा कब खो गए हम
    हमें भी पता न चला था
    घर छोड़ा लाज शर्म भी छोड़ी
    दामन उसका थाम ज़वानी की दहलीज भी तोड़ी !!

    पर वह बेदर्दी बालमा हमारा न निकला
    बेच दिया मुझे गुमनाम गलियों में
    मेरे जिस्म का वह क़ातिल निकला
    आज भी जब मैं रौंदी जाती
    बादलों के जैसे फटती
    बारिश की तरह लहू बहाती !!
    जब किसी के होंठ मेरे होंठों को चीरते
    चाय की प्याली की तरह अपना जिस्म जलाती

    हांँ... आज मैं फिर यादों का दस्तरख्वान बिछाए बैठी
    बीते लम्हों की दास्तां तुम्हें सुनाती
    इश्क़ क्या है मेरे लिए तुम्हें आज बताती !!

    @raaj_kalam_ka( 9/10/21)
    ����������������������������������

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    जिस्मफरोशी

    चाय की मीठी चुस्की थी ज़िंदगी मिरी
    काले अँधियारे बादलों से जा घिरी
    खूनी बारिश में रोज़ जिस्म भिगाती
    हाँ...आज मैं तुम्हें अपनी वो यादें सुनाती !!
    ©raaj_kalam_ka

  • raaj_kalam_ka 8w

    ������

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    क़र्ज़-ए-इश्क़

    मुफलिसी के दौर में, ग़म भी अमीर हो गया
    ख़ून बेच के भी चुका न सके क़र्ज़-ए-इश्क़ ।


    बदस्तूर बातें होती रही हमारी बेवफाई की
    नाकाबिल थे हम मिटा न सके मर्ज-ए-इश्क़ ।

    ©raaj_kalam_ka

  • raaj_kalam_ka 9w

    #osr ����एक ख्याल ��

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    दीदार

    रफ्ता-रफ्ता चाँद बादलों से यूँ निकला
    बागबाहरा शन हो गया तेरे इश्क़ में ,
    जुगनू चमक उठे यादों के
    चमकते सितारे में तिरा दीदार हो गया ।
    ©raaj_kalam_ka

  • raaj_kalam_ka 9w

    #osr यह पंक्तियाँ हमारी प्यारी दोस्त कलम को समर्पित✍️
    जो हमारे विचारों को व्यक्त करते करते कब खास दोस्त बन जाती पता न चलता ����

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    सखी अलबेली

    चलती रहे कलम,कभी ना रुकना जाने
    चढ़ते सूरज से लढलती शाम तलक
    जीवन में बस रंग भरना जाने ।
    मुस्कुराए तू, तो मुस्कुराए ये कलम
    रोए तू, तो रोए ये कलम
    यह कलम नहीं सखी-सहेली है
    बड़ी ही निराली-अलबेली है ।



    सुन..इस सखी को पा,हमें ना भूल जाना
    जब भी कुछ लिखें,हमें ज़रूर बताना ।
    ©raaj_kalam_ka

  • raaj_kalam_ka 9w

    #osr����
    प्यार हुआ चुपके से ����
    आपको यह गीत याद है ना����

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    ☺️

    मैं वही ,दर्पण वही
    फिर क्यों लागे रूप नया नया ?
    दिल वही ,धड़कन वहीं
    फिर क्यों लागे जग नया नया ?
    तन वही ,मन वही
    फिर क्यों लागे‌ बदन नया नया ?
    फूल वही ,खुशबू वही
    फिर क्यों लागे चमन नया नया ?

    शायद ...वही हुआ
    जो होना न था !
    यह दिल चोरी हुआ
    जो होना न था !
    मन बेचैन हुआ
    जो होना न था !
    हाँ... मुझे इश्क़ हुआ
    जो होना न था !
    ©raaj_kalam_ka