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  • priyankaadubey 9w

    किसी शांत नदी सा बहता मन
    कैसे भांप लेता है
    बाहर का कम्पन
    स्पंदन
    मधुबन
    संभाल लेता है लहरें
    किसी आहट पे
    कैसे भाग पड़ता है बरबस
    किसी झोंके से
    पर आज मन रुकना चाहता है
    ऐसे
    जैसे पहले कभी रुका नहीं....
    ©priyankaadubey

  • priyankaadubey 16w

    कितने ही सावन देखे....किताबों के...फिल्मों के...गानों के...पर गांव का सावन इस साल देखा है। उन बाकी सावनो से ये अलग है....इसमें झमाझम घटा के बाद कि गर्मी भी है....सुबह की हवा की सिरहन भी....ये गांव का सावन है....इसमें धान की रोपाई सिर्फ फसल बोने नहीं बल्कि त्योहार है....जिसमे सारी माएं धान लगाती है....और बच्चे उम्मीद....की ये जो धान उनकी मां ने लगाए है....वो उन्हें मिलेंगे....बच्चे मासूम है....नहीं जानते समाज कैसे काम करता है... ..धान की बुआई करते समय पांव में जोंक चिपकते है....प्रकृति आसानी से नहीं देती....हममें से बहुत लोग है....जिसने ज़िन्दगी का ये रूप नहीं देखा होगा....पर ज़रूरत है कि हम समझे....अपनी प्रकृति को....देखें गावों का ये सावन....और अपनी इकोनॉमी के building block का सम्मान करें
    ©priyankaadubey

  • priyankaadubey 16w

    ये जो कुछ है
    बादल ही तो है
    दिखते कुछ और है
    होते कुछ और
    गरजते कहीं
    बरसते कहीं
    कि जो दुनिया यहां है
    बादल के पार का जहां ऐसा ही तो नहीं
    गर है
    तो हम सब कहीं खुदा तो नहीं
    ©priyankaadubey

  • priyankaadubey 19w

    जो मौसम सरगम सा है.... भीगे चांद सा...बादलों
    संग चल पड़ा है....तारों की गली से गुजरकर.... मारवा की भोर लाने....
    ©priyankaadubey

  • priyankaadubey 21w

    चीज़ें वैसी नहीं होती जैसी दिखती हैं.....वो वैसी होती है जैसे उनको दिखना होता है....जैसे दिल समझता है किसी चीज़ को ....और दिमाग समझाता है..कि क्यूं कुछ बातें सिर्फ सुननी चाहिए....चुप्पी को परखना क्यूं ज़रूरी है....ताकि इल्म हो सके.... आहट कैसी है....दस्तक तूफान की है..या बयार की....पर जब ऐसी कश्मकश का हल ना मिले...तो क्या करें....
    ©priyankaadubey

  • priyankaadubey 22w

    बारिश मन.... बादल संग...चले वहां....जहां वो हो जो हम चाहें....बिजली सा जला दे....बुरा ख्वाब....
    ©priyankaadubey

  • priyankaadubey 23w

    कैसे कहें कि कितने एहसासों से बने हो तुम
    वो हल्की ठंडी हवा ..ठंडी शाम..मीठी खुशबू..भीनी सुबह..
    हरसिंगार वाली बयार
    कि इतने साज़ों का सरगम है
    कि गर कुछ छूट जाए
    समझना तुममें ही गुम गया....
    ©priyankaadubey

  • priyankaadubey 24w

    ये भी ठीक है
    कि मन को मलाल ना रहे
    शिकायतें चलो कहीं दफन कर आएं
    सारी गिरहें....उलझन
    कहीं सुलझती हो अगर
    चलें वहीं
    मर कर
    फिर कहीं से नए मुकम्मल ख्वाब सा
    बन आते हैं
    अपनी पुरानी दुनिया में
    नए हम
    ©priyankaadubey

  • priyankaadubey 24w

    Kabhi koi aisi cheez....
    Jo apne sath tamam yaadein Le aati hai...
    Wo waqt Kyu nahi laati....
    ©priyankaadubey

  • priyankaadubey 26w

    Aaj zamane baad bachpan ki galiyon me aana hua....fir se....aisa lagta hai....ki har naye Safar ki shuruat shayad yahi se hogi....yahan ki har cheez me apnapan hai....ye talaab.....playground....neem ke ped....hari ghaas....sab waisa hi hai....jaisa saalon pehle tha....badle to bas ham hai....hamare na badalne se shayad Zindagi bemaza ho Jaye....
    ©priyankaadubey