prince_kmr

Welcome to my Profile �� Check out my latest blog post �� Don’t care what you say about me I like the way I am..

Grid View
List View
Reposts
  • prince_kmr 25w

    यह तय है कि वह मारा जाएगा
    पर, उसकी हत्या में
    हथियार शामिल नहीं होंगे
    सब्ज़ी काटने से भले ही गन्दा हो जाए कोई चाकू
    उसके ख़ून से तो हरगिज़ नहीं

    किसी दिन वह एक गाड़ी के नीचे
    नहीं आएगा बचकर बगल से गुज़रता
    उसकी ख़ूबसूरती से मारा जाएगा

    किसी दिन अपने इकलौते सूट में जबरन घुसा हुआ
    एक शानदार दावत में घुसपैठिया-सा वह
    खाकर जबरन रोकेगा डकार
    बीवी की नाक तक ख़ुशबू ले आने
    बग़ैर साबुन से हाथ मले लौटेगा
    कि रास्ते में ही अँगुलियों की जूठी ख़ुशबू डस लेगी उसे

    साहब की घूसखोरी से नहीं डाँट से नहीं
    उनके बड़े बेटे के आत्मविश्वास
    और छोटे बेटे की अँग्रेज़ी से मारा जाएगा वह
    वह मारा जाएगा प्रेम से
    जो अमीर छोकरों ने किया
    साहसी गुण्डों ने किया
    उसने जो नहीं किया उस प्रेम से मारा जाएगा वह

    ऐसी ही मासूम चीज़ों से मारा जाएगा वह लेकिन
    मरकर न अमर होगा वह मुर्दा
    उसकी हत्या
    इतिहास में तो क्या
    थाने में भी दर्ज नहीं मिलेगी आपको ।
    ©prince_kmr

  • prince_kmr 25w

    #मित्रता_दिवस_शुभ_हो

    #Happy_Friendship_Day

    Read More

    तप्त हृदय को सरस स्नेह से
    जो सहला दे मित्र वही है
    रूखे मन को सराबोर कर
    जो नहला दे मित्र वही है

    ©prince_kmr

  • prince_kmr 26w

    किसी भी आदमी या औरत का चरित्र मात्र लोगों से संबंध बनाने से बनता-बिगड़ता नहीं है। चरित्र काफ़ी कॉम्पलेक्स कॉनसेप्ट है, जिसका मापदंड भी काफ़ी कठिन है। परिवार के प्रति, समाज एवं मानवता के प्रति अपना कर्तव्य निर्वाह करते हुए ही चरित्र बनता-बिगड़ता है। किसी एक घटना आदि से इसे निर्धारित नहीं किया जा सकता है।
    ©prince_kmr

  • prince_kmr 26w

    दीनता के दृश्य प्रतिपल
    दृष्टि में घिरते रहे पर,
    दर्शकों के प्राण गीले ना हुए तो ना हुए !

    यह प्रकट युग ग्लानियों के
    अश्रु से सिंचित नहीं है,
    वेदनाओं के उफनते
    ज्वार से विचलित नहीं है,

    इसलिए ही तो सड़क के
    बीच शव तिरते रहे पर,
    श्राद्ध के अनुबंध ढीले ना हुए तो ना हुए !

    पृष्ठ पर टूटी कुदाली
    धन बहुत नीचे गड़ा है,
    श्रम तनिक भी भर न पाया
    भाग्य का उल्टा घड़ा है,

    स्वेद जिनमें संग्रहित है
    पात्र वे झिरते रहे पर,
    मनरथों के हाथ पीले ना हुए तो ना हुए !

    श्वास ने हर पल प्रताड़ित
    आह की माला पिरोई,
    आयु ने हर दिन अभोगे
    उत्सवों की टीस ढोई,

    स्वप्न थककर अनुभवों की
    झील में सिरते रहे पर,
    घाट के कंकड़ रसीले ना हुए तो ना हुए !

    सोच के परिणाम जब भी
    सत्य के विपरीत निकले,
    क्षुब्ध मन ने खूब चाहा
    एक अंतिम गीत निकले,

    दुख हमारे शब्द बनकर
    कथ्य में गिरते रहे पर,
    गीत के कंपन सुरीले ना हुए तो ना हुए !

    ©prince_kmr

  • prince_kmr 30w

    मैं कब तन्हा हुआ था, याद होगा,
    तुम्हारा फ़ैसला था, याद होगा।

    बहुत से उजले-उजले फूल लेकर ,
    कोई तुम से मिला था, याद होगा।

    बिछी थीं हर तरफ़ आँखें ही आँखें,
    कोई आँसू गिरा था, याद होगा।

    उदासी और बढ़ती जा रही थी,
    वो चेहरा बुझ रहा था, याद होगा।

    वो ख़त पागल हवा के आँचलों पर,
    किसे तुम ने लिखा था, याद होगा।
    ©prince_kmr

  • prince_kmr 33w

    जब तक मनुष्य दूसरे की समृद्धि देखकर जलता रहेगा,
    वो कभी भी सुख और शांति का अनुभव नहीं कर सकता।
    ©prince_kmr

  • prince_kmr 34w

    चाहे हुए रास्ते
    जीवन और पूरे व्यक्ति
    कहाँ मिलते हैं!

    नियति के हाथों
    औचक मिले
    मानसिक घाव
    पूरे कहाँ सिलते हैं!
    ©prince_kmr

  • prince_kmr 34w

    सफर देगा मगर मंजिला की न हमको खबर देगा,
    हमारी जिंदगी के बाग को वीरान कर देगा।
    धुआं साँसों में घुलकर के जिगर में आग भर देगा,
    नशा है ये फ़क़त खुद को मिटाने का हुनर देगा।
    ©prince_kmr

  • prince_kmr 35w

    तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुशनज़र थे मगर,
    जो तुझको देख चुका हो वो और क्या देखे।
    ©prince_kmr

  • prince_kmr 35w

    चालाक लोग इसका पूरा हिसाब रखते हैं
    कि क्या-क्या बचाया
    लेकिन यह कभी नहीं जान पाते हैं
    क्या-क्या गंवाया,

    वे पांव गंवा कर
    जूते बचा लेते हैं
    और शान से दुनिया को दिखाते हैं

    ©prince_kmr