priman

Web developer trying to post their words. नाम कर्म से बनती है, और दर्द प्यार से।

Grid View
List View
  • priman 3w

    ठिकाना!

    गुमशुदा ही मिलने का बहाना बताए
    कैसे मुसाफिरों को फसाना बताए।।

    मंजिलों से अब तलक वास्ता ना हुआ
    कदम रुकते नही क्या ठिकाना बनाएं।।
    ©priman

  • priman 4w

    सच्चाई!

    इंसानों की बस्ती में
    सच थी बस परछाई,

    रीत लिखी थी कागज़ पर
    जीत बनी थी पराई।।

    ©priman

  • priman 5w

    दुविधा!

    अजीब सी दुविधा में आज फसा हूं
    लोग कहते है शायर पर अभी कहा लिखा हूं
    मजीलो के पीछे तो भगा रहा,
    मजील मिली तो ख़ामोशी में क्यों खड़ा हूं।।

    पैरो के छाले अब नही दुखते
    गैरो की बाते अब नही चुभती
    तानो की आदत इसकदर हुई
    की इन तानो की बीच मैं और खिला हूं।।
    ©priman

  • priman 6w

    वक्त!

    हालात के नतीजों पर आंख लगी है,
    दिन रात के नतीजों पर जज़्बात लगी है,
    पैसे के लिए आज इस कद्र है परेशान,
    एक वक्त के नतीजों पर पूरी जान लगी है।

    सोच रहे हर वक्त की कैसे बढ़ा जाए,
    जूझ रहे है इस कद्र की कैसे लड़ा जाए,
    अनजाने तो दूर है कबसे पर आज अपनो का सवाल है,
    की कैसे करा जाए।

    धूल बन गई वो मिट्टी जिसपर रक्त बहाया था,
    ऐसे वक्त में गिरा था की सबका शीश जुकाया था,
    पर आज खड़ा हूं वक्त के साथ,
    देखा मां लड़ा तेरा बेटा वक्त के साथ।

    कर्मो की चाह से आज दौड़ रहा मैं,
    नर्म लम्हों से दूर अब रह रहा मैं,
    कहने को बनाएं मैने कितने दोस्त,
    पर सच के सिर्फ खुद का दोस्त बन रहा मैं।

    आंधी उड़ा रखी उन सपनों की,
    जिसको सोच कर कल डर रहा था मैं,
    आज वक्त है मेरी घोड़ों की तरह,
    जिसपर बैठ कर आज राज कर रहा मैं।
    ©priman

  • priman 6w

    तलाश!

    भीड़ की तलाश में एक पन्ना मिल गया,
    सोचा था लिख दूं कुछ उसपर
    लेकिन बारिश पड़ गया,
    हमारे सामने वो ऐसी भीगी थी गलतियों में
    वो कोशिश की रोकने की पर,

    मैं भीड़ में मिल गया!
    ©priman

  • priman 6w

    मुंहबोले-रिश्ते!

    हर टूटे हुए सांस में एक शोर होती है,
    पर लम्हों की तलाश तो मुंहबोले रिश्तों से ही होती है
    जब टूट जाते है वो एक हल्की हवा से
    फिर तो कद्र साला खुद की भी नहीं होती है।
    ©priman

  • priman 6w

    #poetry#hindi#writing#backagain#priman#reality
    #अश्लियत#हिंदी#कविता#श्रेयांश

    Read More

    अश्लियत!

    मुझे लोगो की खूबसूरती देखने की चाह तो बहुत थी पर साली वक्त ने हमेशा उनकी अश्लियत दिखाई है।
    ©priman